दूसरों पर उंगली उठाने के पहले अपने भीतर झांककर देखना चाहिए
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822560220
प्राचीन भारतीय सनातन सांस्कृति के मुताबिक जो लोग दूसरों की गलतियों का बखान करते हुए दूसरों पर कीचड उछालते हैं उन्होंने अपने भीतर के शैतान को निकालकर अपने आपको पाकशाप यानी मन बचन और कर्म से पवित्र होने का प्रयत्न करना चाहिए. कुछेक लोग दूसरों के सामने अपना कथित विश्वास अर्जित करने के लिए स्वयं की उच्चस्तरीय तारीफों के पुल बांधते रहते हैं और दूसरों की बाजू निचले स्तरीय यानी घ्रणा और नफरत के बीज बोते रहते हैं.इससे तो बेहतर होगा कि दूसरों की बुराई करने के वजाय अपने भीतर झांककर देखना चाहिए और स्वयं के द्धारा किए गए अकर्मों-कुकर्मों- पाप और तथा अन्याअन्य गलतियों को भी प्रदर्शित करना चाहिए. ताकि पाप और पाखण्ड का प्रायश्चित हो सकेगा.
जो लोग अपना जीवन सुख से जीना चाहते हैं, तो उनके लिए यह आवश्यक है, कि *”वे कुछ मात्रा में दूसरों की गलतियों को सहन करें। और आत्मनिरीक्षण करते हुए अपनी गलतियों को भी दूर करें, उन्हें उखाड़ फेंकें।”* यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार से पुरुषार्थ पूर्वक अपना जीवन जीए, तो वह सुखपूर्वक जी सकता है, और अपने जीवन में पर्याप्त उन्नति कर सकता है।
*”और यदि कोई व्यक्ति विशेष योगाभ्यासी हो, तो उसके लिए तो यह अनिवार्य ही है। अन्यथा उसकी योगाभ्यास में वर्षों तक भी कोई प्रगति नहीं हो पाएगी।”*
*”इसलिए चाहे कोई सामान्य व्यक्ति हो, चाहे विशेष योगाभ्यासी हो, सभी को ये दो काम अवश्य ही करने चाहिएं। दूसरों के दोषों को कुछ सीमा तक सहन करना, और अपने दोषों को उखाड़ फेंकना।”*
*”और जब दूसरों के दोष बहुत अधिक बढ़ जाएं, तथा आपकी सहनशक्ति की सीमा समाप्त हो जाए, तब उनसे दूर हो जाना चाहिए। अर्थात उनके साथ व्यवहार कम कर देना चाहिए, अथवा संबंध तोड़ देना चाहिए।” “परंतु झगड़ा तो किसी भी स्थिति में नहीं करना चाहिए, अन्यथा आप शांतिपूर्वक नहीं जी सकेंगे।”*
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