✍️टेकचंद्र सनोडीया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट
पुणे की बहुमूल्य जमीन घोटाले का मामला 1989 का है। उस वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शरद पवार थे। उनके कार्यकाल में 3.26 एकड़ जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी तरीके से 326 एकड़ दिखाया गया।
पुणे जमीन घोटाले का मामला 1989 का है। उस वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शरद पवार थे। उनके कार्यकाल में 3.26 एकड़ जमीन का घोटाला हुआ
जमीन घोटाले में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को फिर एक बार विपक्ष ने घेर लिया है। महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि शरद पवार जमीन घोटाले में शामिल हैं। पवार पर विपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा है कि जब पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने पुणे की कीमती ज़मीन निजी लोगों के हाथ देने के लिए अदालत में असलियत से ज्यादा जमीन दिखाई थी। और इसका लाभ मुकुंद ट्रस्ट को हुआ था।
विपक्ष के मुताबिक पुणे जमीन घोटाले का मामला 1989 का है। उस वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शरद पवार थे। उनके कार्यकाल में 3.26 एकड़ जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी तरीके से 326 एकड़ दिखाया गया था। और उस जमीन को पुणे के मुकुंद ट्रस्ट को सौंप दिया गया था। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि ऐसा साजिश के तहत किया गया।
विपक्ष के तत्कालीन नेता एकनाथ खडसे का कहना था कि ये सरासर साजिश है। आरोप है कि निजी हाथों को जमीन सौंपने की जल्दी में डिफेंस की जमीन का बड़ा हिस्सा भी ट्रस्ट को सौंप दिया गया। पुणे के यरवदा इलाके की 80 एकड़ सरकारी जमीन की बंदरबांट की गई। इसका हिस्सा मुकंद ट्रस्ट, डीबी रियलिटी और पंचशील टेक पार्क को मिला। मुकुंद ट्रस्ट में पवार के करीबी पुणे के गोयनका परिवार की हिस्सेदारी है।
विपक्ष के मुताबिक जबकि पंचशील टेक पार्क में पवार के दामाद और बेटी की हिस्सेदारी है। जब जमीन का घोटाला किया गया तब पुणे के कलेक्टर श्रीनिवास पाटिल थे। पाटिल बाद में पवार की पार्टी में शामिल होकर सांसद बने। विपक्ष का तो यहां तक आरोप है कि सरकार से करार होने से पहले ही ट्रस्ट जमीन पर मालिकाना हक जताने लगा था।
विपक्ष के खुलासे के उलट एनसीपी विपक्ष के इन आरोपों को मानने को तैयार नहीं। एनसीपी के तत्कालीन महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष मधुकरराव पिचड़ का कहना है कि श्रीनिवास पाटिल ने असेंम्बली में ये सूचना दी है कि इससे सभी कुछ साफ हो गया है। खडसे ने जो सूचना असेंम्बली को दी उससे सदन को कन्फ्यूज करने की कोशिश की गई है। एनसीपी खडसे के खिलाफ ब्रिच और प्रिविलेज का नोटिस लाएगी।
महंगाई से लेकर भ्रष्टाचार और घोटालों के कई आरोप पवार पर दनादन लगते रहे हैं। बीते दिनों अन्ना हजारे के निशाने पर रहे पवार। इन्हीं दिनों उन पर डीबी रियलिटी के शहीद बलवा के विमान में सफर करने का भी आरोप लगा। टेलीकॉम घोटाले के बाद अब उनका नाम पुणे जमीन घोटाले में उछला है। विपक्ष ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
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