वैदिक सनातन हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया का बडा ही महत्व
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
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वैदिक सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का अत्यंत उच्च और पावन महत्व है। वैशाख शुक्ल तृतीया को आने वाली यह तिथि एक अबूझ मुहूर्त (स्वयंसिद्ध मुहूर्त) है, जिसका अर्थ है कि इस दिन कोई भी नया कार्य, विवाह, या खरीदारी करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। ‘अक्षय’ का अर्थ है—जो कभी क्षय न कभी पतन न हो, इसलिए इस दिन किए गए पूजा, दान, जप और तप का फल अनंत गुना होकर मिलता है। अक्षय तृतीया के विशेष महत्व के संबंध मे बतादें कि इस दिन विधिवत पूजन अनुष्ठान करने से समस्त नास्तिक सूतक पातक ग्रह व्याधिदोषों का निवारण होता है. और बिगड़ हुए सभी काम बनते हैं. वसर्तें प्राकृतिक नियमों का पालन करना चाहिए.
पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व और पावन दिन है जब त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था। इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुरामजी का जन्म हुआ था। इस दिन किया गया दान-पुण्य, जैसे जल, अन्न, वस्त्र का दान, मृत्यु के बाद भी साथ रहता है और अनंत जन्मों तक पुण्य देता है।
महाभारत व कथाएं. महाभारत के अनुसार, इसी दिन पांडवों को सूर्य देव से ‘अक्षय पात्र’ प्राप्त हुआ था। साथ ही, सुदामा ने जब श्रीकृष्ण से भेंट की थी, तब उन्हें इसी दिन दरिद्रता से मुक्ति मिली थी। इस दिन सोना-चांदी खरीदना, नई संपत्ति में निवेश करना या नया व्यवसाय शुरू करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे समृद्धि कभी कम नहीं होती। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, देवी लक्ष्मी और विष्णु की पूजा करना आत्मा की शुद्धि और स्थिरता लाता है। अक्षय तृतीया समृद्धि, नई शुरुआत और आध्यात्मिक उन्नति का सबसे महत्वपूर्ण दिवस है।
अक्षय तृतीया इस बार 19 अप्रैल 2026 को मनाई जा रही है. सनातन धर्म में सबसे शुभ तिथियों में से एक है, जिसे ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है। इस दिन बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य (विवाह, गृह प्रवेश, नई शुरुआत) किया जा सकता है। ‘अक्षय’ का अर्थ है जिसका क्षय (नाश) न हो, इसलिए इस दिन किए गए पूजा, दान और निवेश का फल अक्षय यानी कभी न खत्म होने वाला मिलता है। यह दिन साल के सबसे पवित्र दिनों में से एक है, जो सफलता और स्थिरता लाता है। मान्यता है कि इसी दिन सतयुग का आरंभ हुआ था, भगवान विष्णु के अवतार (नर-नारायण, परशुराम, हयग्रीव) हुए थे, और सुदामा ने कृष्ण से मिलकर दरिद्रता दूर की थी। यह माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के लिए उत्तम दिन है, जिससे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा स्नान और सत्तू, जल, घड़ा, वस्त्र आदि का दान करने से पुण्य अक्षय हो जाता है. इस दिन सोना, चांदी या प्रॉपर्टी खरीदने से धन-संपत्ति में लगातार वृद्धि होती है। दान और जप करने से उसका फल कई गुना होकर पूरे जीवन भर मिलता है।
नया बिजनेस, निवेश या मांगलिक कार्य शुरू करने से उसमें सफलता के योग बढ़ जाते हैं। इस दिन की गई पूजा और उपाय से घर में नकारात्मकता दूर होती है और लक्ष्मी जी का वास होता है।
अक्षय तृतीया के दिन, विशेषकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना और भगवान को तुलसी व पीले फूल अर्पित करना अत्यधिक शुभ फलदायी माना गया है।
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