वैदिक सनातन धर्मावलंबियों के लिए पुरुषोत्तम मास में नियम पालन
टेकचंद्र शास्त्री:
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पुरुषोत्तम मास (जिसे अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है) में वैदिक सनातन हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए यह मास सात्विक जीवन, दान, और आध्यात्मिक साधना का विधान है। इस दौरान तामसिक भोजन और भौतिक विलासिता से परहेज कर संयमित जीवन बिताने की परंपरा है।इस मास के दौरान पालन किए जाने वाले प्रमुख नियम और परहेज इस प्रकार हैं:प्रमुख परहेज (क्या न करें)तामसिक भोजन का निषेध के संदर्भ मे बताते हैं कि लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, और बासी भोजन का पूर्णतः त्याग करना चाहिए।अन्न का संयम के संदर्भ में बैंगन, मूली, मसूर की दाल, गाजर, और राई का सेवन वर्जित माना जाता है।भौतिक सुख-सुविधाएं: भूमि पर शयन (चटाई या जमीन पर सोना) करना चाहिए और पलंग या बिस्तर का उपयोग नहीं करना चाहिए।नकारात्मकता से दूरी: किसी के साथ झूठे अश्वासन और विश्वासघात ईर्श्या व निंदा वर्जित है. उसी प्रकार एक दूसरे के प्रति जलनखोरी झूठ छल कपट विश्वासघात धोखाधडी बेईमानी भ्रष्टाचार क्रोध करना, और अपशब्द कहने से बचना चाहिए।नए निर्माण कार्यों की मनाही है. इस मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य और कोई भी नया व्यापार आरंभ नहीं किया जा सकता है।प्रमुख नियम (क्या करें)भगवद आराधना भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) की पूजा, व्रत, और कथा का वाचन विशेष पुण्यदायी होता है।मंत्र जाप: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का नियमित जाप करें।दान और पुण्य के संदर्भ मे बता दें कि जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, और दीपदान करना चाहिए। धार्मिक स्थलों पर गाय या ब्राह्मण को दान देने का अत्यधिक महत्व है।तीर्थ यात्रा: पवित्र नदियों में स्नान और तीर्थ स्थलों पर दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है।दीपदान:- प्रतिदिन या संध्या के समय तुलसी के पौधे के पास या किसी मंदिर में घी का दीपक जलाना चाहिए।पुरुषोत्तम मास के नियमों को अपने दैनिक जीवन में उतारने के लिए, यदि आप जानना चाहते हैं:इस मास में किए जाने वाले क्या हो सकती है? इस पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास य मल मास मे पर स्त्री गमन और पर पुरुष गमन निषेध माना गया है. धर्मशास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास मे उपरोक्त नियमों का पालन नहीं करने से जीवन मे विविध प्रकार के अनिष्ठ नास्तिक सूतक ग्रह व्याधिदोष का खतरा उत्पन्न हो सकता है.
सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-
उपरोक्त लेख समाचार सामान्य ज्ञान पर अधारित सिर्फ और सिर्फ वैदिक सनातन हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए है. अधिक जानकारी के लिए मनुस्मृति, नारद स्मृति, बिदुर नीति,गरुण पुराण और भविष्य पुराण के आध्यात्म विज्ञान विशेषज्ञों से परामर्श अवश्यक है.
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