प्रिंट मीडिया से काफी आगे है बढ चुका है सोशल मीडिया
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
मुंबई। वर्तमान परिवेश मे
यह सच है कि सोशल मीडिया ने प्रिंट मीडिया (अखबार और पत्रिकाएं) को काफी पीछे छोड़ दिया है, विशेष रूप से समाचार की गति व्यापकता और जुड़ाव के मामले में डिजिटल क्रांति और सस्ते इंटरनेट के कारण समाचार उपभोग के पैटर्न में भारी बदलाव आया है।
यहाँ सोशल मीडिया पोर्टल न्यूज से प्रिंट मीडिया काफी पीछे निकलने के मुख्य कारण और प्रभाव दिए गए हैं:
1. समाचार की गति और तात्कालिकता
सोशल मीडिया की खास विशेषता यह है कि कोई भी घटना होने के कुछ ही सेकंड में फेसबुक, ट्विटर (X), और व्हाट्सएप के माध्यम से दुनिया भर में खबर फैल जाती है।
प्रिंट मीडिया के पाठकों को समाचार के लिए अगली सुबह तक का इंतजार करना पड़ता है, जो आज के समय में “पुराना” हो जाता है।
2. व्यापक पहुँच और जुड़ाव 2024 तक भारत में 491 मिलियन से अधिक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता थे, जो एक बहुत बड़ा पाठक वर्ग है।
सोशल मीडिया पर समाचारों पर तत्काल प्रतिक्रिया (लाइक, कमेंट, शेयर) दी जा सकती है, जबकि प्रिंट मीडिया एकतरफा संचार
3. विज्ञापनों में बदलाव
कंपनियाँ अब प्रिंट के बजाय सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देना पसंद कर रही हैं क्योंकि यहाँ सटीक दर्शकों तक पहुँचना आसान है।
भारत में 2025 तक डिजिटल विज्ञापन व्यय कुल विज्ञापन राजस्व का 63% हो गया है, जो प्रिंट मीडिया के लिए एक बड़ी चुनौती है।
4. विश्वसनीयता बनाम तेज समाचार हालाँकि सोशल मीडिया तेजी से खबरें फैलाता है, लेकिन इस पर ‘फेक न्यूज’ का खतरा बहुत ज्यादा है।
इसके विपरीत, प्रिंट मीडिया को आज भी सोशल मीडिया की तुलना में अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
5. चुनौतियाँ और भविष्य
प्रिंट मीडिया का परिसंचरण कम हो रहा है, जिससे कई प्रकाशन डिजिटल रूप में स्थानांतरित हो रहे हैं।
हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों और क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार पत्रों में प्रिंट मीडिया अभी भी अपनी जगह बनाए हुए है क्योंकि वहां इसे अभी भी साक्षरता और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
सच देखा जाए तो सोशल मीडिया ने त्वरित समाचार और जुड़ाव के मामले में प्रिंट मीडिया को काफी पीछे छोड़ दिया है, लेकिन विश्वसनीयता के मामले में प्रिंट मीडिया अभी भी एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है।
डिजिटल मीडिया ने प्रिंट को पीछे कैसे छोड़ा MP Latest
22 दिस॰ 2024 — दीपक शर्मा। डिजिटल युग में मीडिया की भूमिका में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। जहां एक ओर प्रिंट मीडिया अपनी पुरानी परंपराओं और सीमाओं में बंधा हुआ है,
प्रिंट मीडिया सोशल मीडिया से पिछड़ने का मुख्य कारण क्या है
प्रिंट मीडिया का सोशल मीडिया से पिछड़ने का सबसे मुख्य कारण सोशल मीडिया की रियल-टाइम (तत्काल) उपलब्धता, स्पीड और हर जगह पहुँच है, जिसके सामने अखबार का अगला सुबह आना बहुत धीमा माना जाता है।
इसके अलावा प्रिंट मीडिया के पिछड़ने के अन्य प्रमुख कारण निम्न हैं. कार्य स्थल घटना और आयोजित समारोह
त्वरित समाचार सोशल मीडिया पर घटना घटते ही जानकारी प्रसारित हो जाती है, जबकि प्रिंट मीडिया समाचार पत्रों को अगली सुबह का इंतज़ार करना पड़ता है। तब तक काफी समय बदल गया होता है.
डिजिटल और मोबाइल क्रांति: भारत में 850 मिलियन से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं, जो समाचार के लिए मोबाइल पर निर्भर हैं।
वीडियो और मल्टीमीडिया कंटेंट: सोशल मीडिया वीडियो, रील और लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से खबर दिखाता है, जो पाठक को ज्यादा आकर्षित करता है।
इंटरैक्टिव और साझा करने योग्य: सोशल मीडिया पर पाठक खबर पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं और उसे तुरंत शेयर कर सकते हैं, जो प्रिंट मीडिया में असंभव है।
उच्च लागत और परिचालन मुद्दे: कागज़, स्याही और वितरण की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे समाचार पत्र महंगे हो रहे हैं।
युवा पाठकों की कमी: नई पीढ़ी समाचार के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर है, जिससे प्रिंट मीडिया का पाठक
हालांकि, भारत में क्षेत्रीय समाचार पत्र अभी भी अपनी विश्वसनीयता के कारण बने हुए हैं, लेकिन समाचार की गति और विज्ञापन के मामले में सोशल मीडिया ने प्रिंट मीडिया को पीछे छोड़ दिया है।उपरोक्त जानकारी का समाचार एक सर्वेक्षण के अनुसार “आल इंडिया शोसल आर्गनाइजेशन” के महासचिव वरिष्ठ पत्रकार टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: ने दी.
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