नागपुर शहर में 65 करोड़ की जमीन का गोलमाल: दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज
टेकचंद्र शास्त्री:
9822550220
नागपुर – रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। हिमालय पैराडाइज, यश बैंक के पीछे, के निवासी और पेशे से बिल्डर ने अपनी ही कंपनी की पार्टनर और शंकरपुर की करोड़ों की जमीन को दो बार बेचकर करीब 65 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इस मामले में सदर पुलिस थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस में शिकायत दर्ज कराने वाले प्रशांत बाबासाहेब शेंडे, 56 वर्ष, नागपुर के जरीपटका स्थित जी-2, हिमालय पैराडाइज के निवासी हैं और ‘फिरमिड रियलटर्स’ नाम की कंपनी में पार्टनर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी गणेश बिल्डर्स लिमिटेड के डायरेक्टर विजय किसनराव मामनी, 66 वर्ष, शिवाजी नगर निवासी और दो अन्य ब्रोकर नारायण चंद्रधर डंबले व अतुल नारायण डंबले ने मिलकर साजिश रची।
जमीन 2 बार बेचने का खेल
शिकायत के अनुसार, गणेश बिल्डर्स का मौजा शंकरपुर, खसरा नं. 86/1 व 86/2 में पहले से ही एग्रीमेंट था। इसके बावजूद, आरोपी ने फिर से उसी जमीन को आरोपी नारायण डंबले को बेचने का फर्जी पत्र बना दिया। आरोप है कि उक्त पीड़ित का विश्वास जीतकर और फर्जी आर्थिक लेन-देन दिखाकर यह जमीन उनके नाम करने से इनकार कर दिया। पीड़ित ने बताया कि इस धोखाधड़ी से उन्हें 65 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया।
18.22 करोड़ की जमीन डील में भी धोखाधड़ी
इसी मामले में एक और एफआईआर दर्ज की गई थी। नावेद साबिद अली द्वारा एडवोकेट से जुड़ा था। अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार, विवादित जमीन का लगभग 18.22 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ था। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि वर्ष 2008 तक पूरी रकम चुका दी गई और करीब 18.89 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री भी हुई, लेकिन बाकी संपत्ति का हस्तांतरण नहीं किया गया। आरोपी पक्ष ने पैसे लेने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया और तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर जमीन के बड़े हिस्से पर अपना कब्जा बनाए रखा।
शिकायत में कहा गया कि वर्ष 2017 में एसआईटी के समक्ष दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। आरोपी ने शेष जमीन की रजिस्ट्री और एपले-टू-आउटडोर करने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में वह वादा भी पूरा नहीं किया गया।
पुलिस जांच शुरू
आर्थिक अपराध शाखा ने शिकायत देने के बावजूद मामला दर्ज नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने ग्रीमल कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि दीवानी विवाद होने के बावजूद आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है, यदि प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी दिखाई दे।
इस एफआईआर पर भी पुलिस ने कमलेश चंद्रधर डंबले, नारायण चंद्रधर डंबले, गिरीशंकर भगवान सचमानी, गीता नारायण डंबले और अतुल नारायण डंबले के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर किया है। न्यायालय में सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि यह पूरा तरह से एक दीवानी विवाद है और इसमें पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है, लेकिन अदालत ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
आगे की कार्रवाई
आधार पर क्राइम ब्रांच के आर्थिक अपराध शाखा की ने मामले की जांच के बाद सदर पुलिस थाने में यह अपराध दर्ज किया है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 406, 420, 471, 477(1), 120 (ब) जालसाजी, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी तहत मामला पंजीकृत किया गया है। फिलहाल पुलिस ने किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है। मामले की जांच जारी है और जल्द ही सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
गौरतलब है कि फरियादी और आरोपी एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं। आरोपी जमीन खरीद-बिक्री में ब्रोकर का काम करते हैं। पुलिस अब फर्जी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
बॉक्स: केस के मुख्य बिंदु
कुल घोटाला: 65 करोड़ रुपये
आरोपी: विजय मामनी, नारायण डंबले, अतुल डंबले समेत 5 लोग
धाराएं 467, 468, 406, 420, 471, 477(1), 120बी
जमीन: शंकरपुर, खसरा नं. 86/1 व 86/2
शुरुआत: 2008 में 18.22 करोड़ की डील से
विश्वभारत News Website