आम का रस पीने पर निवस्त्र करके घर से भगाया? जुल्म की इंतेहा
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822550220
कानपुर।उत्तर प्रदेश का कानपुर में युवा वकील प्रियांशु श्रीवास्तव के आत्महत्या मामले में सनसनी मचा दी है। कानपुर कोर्ट की पांचवी मंजिल से छलांग लगाने वाले युवा वकील का सुसाइड नोट इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, गुरुवार को दोपहर बाद युवा वकील ने कोर्ट भवन की पांचवी मंदिर से छलांग लगा दी थी। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इससे पहले उसने सोशल मीडिया एकाउंट पर स्टेटस पर दो पेज का सुसाइड नोट अपलोड किया। इसमें उसने अपने पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के जुल्म की इंतेहा को दर्ज किया। युवा वकील ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसके ऊपर 5-6 साल की उम्र से ही जुल्म किया जा रहा है। मैंगो जूस वाली कहानी भी साझा की। वकील ने लिखा कि बात-बात पर पिता मेरी पिटाई करते थे। हमेशा मेरी बुराई ही होती थी। हमेशा नीचा दिखाया जाता है। इसलिए अब इस जिंदगी को खत्म कर रहा हूं। पिता के खिलाफ आक्रोश जताने वाले युवा वकील परेशान है
कानपुर के युवा वकील की मौत मामले के बाद सुसाइड नोट की हो चर्चा रही है
उस घटना को किया याद
युवा वकील प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में 6 साल की उम्र में हुए अत्याचार की कहानी भी साझा की है। इसमें उसने लिखा कि मुझे यह बताने में काफी शर्म महसूस हो रही है। उसने लिखा कि 6 साल के उम्र में फ्रिज में रखे आम के जूस को पीने के चलते मेरे पिता ने मुझे निर्वस्त्र कर घर के बाहर भगा दिया था। हमारे प्रति उनका ऐसा रवैया हमेशा बना रहा। वह हमेशा मुझे बेइज्जत करते रहते थे। वकील ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं मानता हूं कि हर माता-पिता को शुरू से ही सख्त रवैया अपनाया जाना चाहिए। इससे बच्चों का भविष्य संवर सकता है।
प्रियांशु ने आगे लिखा कि अगर आप अपने बच्चों पर इतनी सख्ती करेंगे तो बच्चों को हर पल घुटन महसूस होने लगेगी। परीक्षा के एक दिन पहले अगर सिलेबस पूरा तैयार नहीं है तो पीटने लगते थे। हर समय, हर मिनट नजर रखते थे। एक-एक मिनट का हिसाब लेते थे। यह मानसिक प्रताड़ना ही है। इस प्रकार के टॉर्चर से मैं अब अधिक समय तक नहीं जी सकता हूं। इसलिए, मैंने यह कदम उठाने का निर्णय लिया।
प्रियांशु ने सुसाइड नोट में दावा किया कि बचपन में मारपीट और घर से भगाए जाने की घटना के बाद भी पिता नहीं थमे। बड़ा होने पर भी पिता उसके साथ अलग व्यवहार करते रहे। लगातार उसे पर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पिता बार-बार उसे बेइज्जत करते थे। पीटने लगते थे। इसने प्रियांशु को अंदर तक तोड़ दिया। वह मानसिक तौर पर टूट गया था। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा भी कि मेरा यह निवेदन है कि मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं। भगवान करे ऐसा पिता किसी को भी न मिले। इससे पिता के प्रति उसके मन की भावनाओं को समझा जा सकता है।
प्रियांशु श्रीवास्तव कानपुर के बर्रा आठ वरुण विहार का रहने वाला था। उसके पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी कानपुर कोर्ट में वकील थे। 23 वर्षीय प्रियांशु ने वर्ष 2025 में डीसी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह अपने पिता के साथ ही कानपुर कोर्ट में वकालत करने लगा। गुरुवार दोपहर 12:05 बजे उसने सुसाइड नोट लिखा। इसके तीन घंटे बाद कोर्ट भवन की पांचवी मंजिल से छलांग लगा दी।
क्या है पूरी घटना?
कानपुर कोर्ट भवन में यह घटना घटी। कोर्ट भवन के पीछे की ओर खिड़कियां बनी हुई हैं। उनके चारों तरफ जाली लगाई है। यहां एक सिरे पर जाली नहीं है। प्रियांशु वहीं जाकर ऊपर बैठ गया था। करीब 10 मिनट तक वहीं बैठा रहा। इसके बाद वह पीछे की तरफ कूद गया। उसके नीचे गिरते ही तेज आवाज ने हर किसी को चौंका दिया। पांचवी मंजिल पर घटना के बाद वहां मौजूद वकील और अन्य लोग हैरान रह गए। कोर्ट भवन में तेज धमाके के साथ आवाज हुई तो वकील नीचे की ओर भागे। प्रियांशु जहां गिरा वहां कोई आता-जाता नहीं है। उधर जाने का रास्ता भी बंद रहता है।
बार एंड लॉयर्स के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। चैनल को खुलवाया गया। इसके बाद सभी मौके पर पहुंचे। कुछ देर बाद वहां जिला जज अनमोल पाल भी न्यायिक अधिकारियों के साथ पहुंच गए। पुलिस और फोरेंसिक टीम भी घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची। घटनास्थल से सबूत जुटाए गए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट में युवा वकील ने पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं
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