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स्वदेशी अपनाओ और विदेश हटाओ के उद्देश्य के अनन्य लाभ

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स्वदेशी अपनाओ और विदेश हटाओ के उद्देश्य के अनन्य लाभ

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टेकचंद्र शास्त्री:

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प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी न हमारे स्देशवासियों से विनम्र अनुरोध किया हैं कि स्वदेशी खाद्य उत्पादों वस्तुओं को अपनाने और विदेशी उत्पादों के बहिष्कार से न केवल देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी अनन्य लाभ मिलते हैं। इसे मुख्य रूप से चार क्षेत्रों में समझा जा सकता है:

1.स्वदेशी खाध वस्तुएं स्वास्थ्य के लिए लाभ मिलता है.इससे ताजा और रसायन-मुक्त स्थानीय स्तर पर उत्पादित (Local) खाद्य पदार्थों को आपके तक पहुँचने में कम समय लगता है, जिससे वे अधिक ताजे और पौष्टिक होते हैं।

विदेशी खाद्य पदार्थों को लम्बे समय तक खराब होने से बचाने के लिए उनमें भारी मात्रा में केमिकल और प्रिजर्वेटिव मिलाए जाते हैं, जबकि स्वदेशी उत्पाद आमतौर पर प्राकृतिक और ताजा होते हैं।

मौसम के अनुकूल स्वदेशी खाधान्न चीजें और स्वदेशी स्थानीय खेती अक्सर मौसम और मिट्टी के अनुकूल होती है, जो हमारे शरीर की प्राकृतिक जरूरतों को पूरा करती है।

2. आर्थिक मजबूती

स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा और स्वदेशी अपनाने से देश के किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को बढ़ावा मिलता है, जिससे ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। स्वदेशी अपनाने से मुद्रा का संरक्षण प्राप्त होता है. जब आप विदेशी उत्पादों पर पैसे खर्च करते हैं, तो वह धन देश से बाहर जाता है। स्वदेशी अपनाने से देश का पैसा देश में ही रहता है, जिससे राष्ट्रीय मुद्रा (INR) मजबूत होती है।

3. पर्यावरण संरक्षण

कम कार्बन उत्सर्जन (Carbon Footprint): विदेशी खाद्य पदार्थों को हजारों मील दूर से हवाई जहाज या जहाजों द्वारा लाया जाता है, जिससे भारी मात्रा में ईंधन और कार्बन का उत्सर्जन होता है। स्थानीय उत्पाद खरीदने से परिवहन जनित प्रदूषण कम होता है।

पैकेजिंग कचरे में कमी: आयातित खाद्य पदार्थों में अक्सर बहुत अधिक प्लास्टिक और डिब्बों (मल्टी-लेयर पैकेजिंग) का इस्तेमाल होता है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।

4. सांस्कृतिक और सामाजिक लाभ

पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण प्राप्त होगा. स्वदेशी अपनाने से हमारी सदियों पुरानी खाद्य परंपराएं, जैसे— मोटे अनाज (बाजरा, रागी आदि), मौसमी फल और पारंपरिक व्यंजन जीवित रहते हैं। स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने से

आत्मनिर्भरता होगी. यह दृष्टिकोण देश को खाद्य सुरक्षा और अन्य आवश्यक चीजों के मामले में आत्मनिर्भर (Self-reliant) बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अपने दैनिक आहार में स्थानीय और स्वदेशी अनाजों, फलों, और जैविक उत्पादों (Organic foods) को शामिल करके आप एक स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी अपना योगदान दे सकते हैं।

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