बिहार में चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद राहुल गांधी ने ली जिम्मेदारी
टेकचंद्र शास्त्री:
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पटना। कांग्रेस की बिहार विधान सभा चुनाव मे हूई हार पर पार्टी में आक्रोश देखने को मिला है, जिसे लेकर राहुल गांधी ने नेताओं के साथ बैठक की और हार की जिम्मेदारी ली है।
बिहार विधानसभा चुनाव
में महागठबंधन की करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस पार्टी के अंदर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। पार्टी के सिर्फ 19 सीटें जीतने से नेताओं में निराशा का माहौल है और अब खुले तौर पर एक-दूसरे पर उंगलियां उठ रही हैं। इस बीच, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली में बिहार कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और हारे हुए उम्मीदवारों के साथ करीब चार घंटे लंबी मैराथन समीक्षा बैठक की। बैठक में राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि हार की जिम्मेदारी सिर्फ बिहार इकाई पर थोपना गलत होगा, वे खुद भी इस हार के लिए उतने ही जिम्मेदार हैं।
क्या बोले राहुल?
“हम सब मिलकर लड़े थे, हम सब मिलकर हारे हैं। हार की जिम्मेदारी मैं भी उतनी ही लेता हूं जितनी बिहार के हमारे साथी ले रहे हैं। अब पीछे मुड़कर देखने या एक-दूसरे पर आरोप लगाने का वक्त नहीं है। हमें एकजुट होकर आगे बढ़ना है और संगठन को और मजबूत करना है।”
“वोट चोरी” का गंभीर आरोप
बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने हार का पूरा ठीकरा चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर फोड़ा। पार्टी का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए बिहार में बड़े पैमाने पर कांग्रेस और महागठबंधन समर्थकों के लाखों वोट जानबूझकर डिलीट कर दिए गए, जबकि फर्जी वोटर जोड़े गए। कांग्रेस अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
2015 के मुकाबले आधी सीटें भी नहीं है.
गौरतलब है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 27 सीटें जीती थीं और महागठबंधन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इस बार सिर्फ 19 सीटें मिलने से पार्टी महागठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी बनकर उभरी है। इस हार ने न सिर्फ बिहार इकाई बल्कि केंद्रीय नेतृत्व पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल मे INDIA गठबंधन में अधिकांश धूर्त और करप्टेट नेताओं की भरमार होने की वजह से आपस में ऐसा के बजाय अंदरुणी मतभेद मौजूद होने के कारण सफलता मिलना असंभव है.
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