शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन पर पलटवार : नोटिस वापस लें
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822550220
इलाहाबाद। प्रयागराज माघ मेला परिसर में अनसन पर बैठे जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी सरस्वती महाराज ने माघ मेला प्रशासन पर पलटवार किया है कि अपना कानूनी नोटिस वापस लिया जाए.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के अधिवक्ता श्रीमान अंजनी कुमार मिश्रा ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को कानूनी नोटिस भेजा है।
प्रयागराज मे आयोजित माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान करने से रोकने का मुद्दा गरमा गया है। मेला प्रशासन की तरफ से शंकराचार्य को नोटिस भेजकर 24 घंटे में जवाब मांगा गया था। पलटवार में उन्होंने मेला प्रशासन को कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्रा के माध्यम से प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को भेजा गया है। नोटिस में उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को न केवल अपमानजनक बताया, बल्कि इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करार दिया। नोटिस में कहा गया है कि मेला प्रशासन 24 घंटे में अपने पत्र को वापस ले।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि शंकराचार्य पद को लेकर पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में प्रशासन का हस्तक्षेप कोर्ट की गरिमा को चुनौती देने जैसा है। प्रशासन की यह हरकत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यदि प्रशासन अपना पत्र वापस नहीं लेता है, तो उनके खिलाफ मानहानि और अवमानना की कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी।
नोटिस में यह भी लिखा गया है कि प्रशासन ने 19 जनवरी की रात को पुलिस बल के साथ शिविर के प्रवेश द्वार पर नोटिस चस्पा की थी। उस दौरान शंकराचार्य सो रहे थे। इससे’जगद्गुरु शंकराचार्य’ संस्थान का अनादर और अपमान हुआ है।
आपको बता दें कि मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके ‘शंकराचार्य’ पद की वैधानिकता के प्रमाण मांगे थे। अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से उस नोटिस का आठ पन्नों में जवाब दिया गया था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के जिस आदेश का हवाला दिया गया है, वो 14 अक्टूबर 2022 का है जबकि 11 सितंबर 2022 को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के अगले दिन 12 सितंबर को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आश्रम में शंकराचार्य पद पर पट्टाभिषेक किया जा चुका है.दरअसल मे जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के राष्ट्रीय हित में निष्पक्ष विचारों और सत्यासत्य अभिकथन से उत्तरप्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ महोदय नाराज चल रहे हैं. योगी आदित्यनाथ को उनके इशारों पर चलने वाला कथित शंकराचार्य की आवश्यकता है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन पर पलटवार?नोटिस वापस लें
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822550220
इलाहाबाद। प्रयागराज माघ मेला परिसर में अनसन पर बैठे जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी सरस्वती महाराज ने माघ मेला प्रशासन पर पलटवार किया है कि अपना कानूनी नोटिस वापस लिया जाए.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्रा ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को कानूनी नोटिस भेजा है।
प्रयागराज मे आयोजित माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान करने से रोकने का मुद्दा गरमा गया है। मेला प्रशासन की तरफ से शंकराचार्य को नोटिस भेजकर 24 घंटे में जवाब मांगा गया था। पलटवार में उन्होंने मेला प्रशासन को कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्रा के माध्यम से प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को भेजा गया है। नोटिस में उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को न केवल अपमानजनक बताया, बल्कि इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करार दिया। नोटिस में कहा गया है कि मेला प्रशासन 24 घंटे में अपने पत्र को वापस ले।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि शंकराचार्य पद को लेकर पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में प्रशासन का हस्तक्षेप कोर्ट की गरिमा को चुनौती देने जैसा है। प्रशासन की यह हरकत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यदि प्रशासन अपना पत्र वापस नहीं लेता है, तो उनके खिलाफ मानहानि और अवमानना की कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी।
नोटिस में यह भी लिखा गया है कि प्रशासन ने 19 जनवरी की रात को पुलिस बल के साथ शिविर के प्रवेश द्वार पर नोटिस चस्पा की थी। उस दौरान शंकराचार्य सो रहे थे। इससे’जगद्गुरु शंकराचार्य’ संस्थान का अनादर और अपमान हुआ है।
आपको बता दें कि मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके ‘शंकराचार्य’ पद की वैधानिकता के प्रमाण मांगे थे। अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से उस नोटिस का आठ पन्नों में जवाब दिया गया था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के जिस आदेश का हवाला दिया गया है, वो 14 अक्टूबर 2022 का है जबकि 11 सितंबर 2022 को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के अगले दिन 12 सितंबर को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आश्रम में शंकराचार्य पद पर पट्टाभिषेक किया जा चुका है.दरअसल मे जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के राष्ट्रीय हित में निष्पक्ष विचारों और सत्यासत्य अभिकथन से उत्तरप्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ महोदय नाराज चल रहे हैं. योगी आदित्यनाथ को उनके इशारों पर चलने वाला कथित शंकराचार्य की आवश्यकता है.जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के समर्थन में महामण्डलेश्वर, साधू संत महात्मा और भगवतप्रेमी नागरिक जनता-जनार्दन धरना-प्रदर्शन में मौजूद थे.
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