नागपुर डिर्सट्रक्ट बार एसोसिएशन के चुनाव को बेहद प्रतिस्पधी और चर्चित चुनाव के रूप में जाना जाता है। ये चुनाथ 24 अप्रैल को होने वाले हैं। यह चुनाव सामान्य मतदाताओं का नहीं है।
अध्यक्ष पद के लिए हर उम्मीदवार अपना एजेंडा और अपना विजन लेकर मतदाताओं तक पहुंच रहा है। जिला न्यायालय में वकालत करने वाले हर वकील का प्रमुख मुद्दा पार्किंग है।
इसलिए हर उम्मीदवार पार्किंग की समस्या का समाधान निकालने का दावा कर रहा है। कांटे की टक्कर तय इस बार अध्यक्ष पद के लिए पूर्व सचिव एड. नितिन देशमुख, पूर्व अध्यक्ष एड. प्रकाश जायसवाल, एड. सुनील लाचरवार, एड. राजेश नायक, एड. तरुण परमार और पूर्व सचिव एड. मनोज साबले मैदान में हैं।
चुनाव प्रचार जोर पकड़ चुका है। इसी दौरान अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों ने अपने-अपने विजन सामने रखे। इसमें सभी को पार्किंग के मुद्दे की गंभीरता का एहसास है। इसलिए हर उम्मीदवार ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी है। इसके अलावा, सभी ने अपने-अपने अलग-अलग मुद्दे भी उठाए हैं।
पारदर्शिता होगी प्राथमिकता एड. जायसवाल
एड. प्रकाश जायसवाल ने कहा कि डीबीए के निधि का नियमित ऑडिट करना और कामकाज में पारदर्शिता लाना मेरी प्राथमिकता होगी। न्यायिक परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन कक्षाएं शुरू करना और बंद पड़े कार्यक्रमों को फिर से शुरू करना मेरे एजेंडे में शामिल है।
नए वकीलों को बैठने की जगह मिले, इसके लिए में प्रयास करूंगा, ई-फाइलिंग की अनिवार्यता हटाने के लिए भी प्रयासरत रहूंगा। साथ ही स्मार्ट पहचान पत्र जारी किए जाएंगे।
नवोदितों को स्टाइपेंड : एड. साबले
एड. मनोज साबले ने कहा कि नए वकीलों के लिए जेएमएफसी परीक्षा की तैयारी हेतु मार्गदर्शन कक्षाएं शुरू की जाएंगी। साथ ही नवोदितों के लिए स्टाइपेंड और वरिष्ठ वकीलों के लिए पेंशन की व्यवस्था के लिए सरकार के पास प्रस्ताव रखा जाएगा, जिला न्यायालय की कैंटीन में डीबीए सदस्यों को रियायत दी जाएगी, वकीलों को सरकारी चिकित्सा सुविधाओं का लाभमिले, इसके लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा, उच्च न्यायालय में जनहित याचिका के माध्यम से जिला न्यायालय के आवश्यक कार्यों के लिए निधि लाने का प्रयास किया जाएगा।
वकीलों के लिए सहायता निधि : एड. देशमुख
एड. नितिन देशमुख ने कहा कि अगर मैं अध्यक्ष बना, तो बार और न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने पर मेरा ध्यान रहेगा।
नए वकीलों के लिए नई सेवाएं और सुविधाएं शुरू करने का प्रयास करूंगा।
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