Breaking News

गोंदिया के KTS अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र को लेकर भारी लापरवाही, मरीज परेशान

Advertisements

गोंदिया के KTS अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र को लेकर भारी लापरवाही, मरीज परेशान

Advertisements

गोंदिया: जिले के शासकीय KTS अस्पताल में दिव्यांग (हैंडिकैप) प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आई है। दूर-दराज के गांवों से 50 से 100 किलोमीटर का सफर तय कर आने वाले मरीजों को बार-बार चक्कर लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

Advertisements

जानकारी के अनुसार, दिव्यांग प्रमाणपत्र केवल जिला स्तर पर ही बनाया जाता है, जिसके लिए जिला मेडिकल अधिकारी के हस्ताक्षर और डॉक्टरों द्वारा जांच आवश्यक होती है। अस्पताल में यह प्रक्रिया केवल मंगलवार और बुधवार को ही की जाती है, जिससे पहले से ही सीमित समय में बड़ी संख्या में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मरीजों का आरोप है कि कई बार फॉर्म भरने के बाद भी समय पर जांच नहीं हो पाती। यदि 8 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो मरीजों को दोबारा नया फॉर्म भरना पड़ता है और पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ती है।

एक मरीज ने बताया कि वे तीसरी बार अस्पताल पहुंचे हैं, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से काम नहीं हो पा रहा है। खासतौर पर आंख के डॉक्टर की अनुपस्थिति से सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। बताया गया कि संबंधित डॉक्टर न तो कल समय पर उपस्थित थीं और न ही आज निर्धारित समय पर पहुंची हैं।

मरीजों के अनुसार, वे सुबह 9 बजे से अस्पताल में बैठे हैं, लेकिन 11:30 बजे तक भी डॉक्टर नहीं आईं। कल भी मरीज दोपहर 1:30 बजे तक इंतजार करते रहे, लेकिन जांच नहीं हो सकी।

इस स्थिति में एक दृष्टिहीन (ब्लाइंड) मरीज सहित कई गंभीर मरीजों को बार-बार आना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों और मरीजों ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रक्रिया को सुचारू किया जाए, डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और दिव्यांग मरीजों को अनावश्यक परेशानियों से राहत दी जाए।

मरीजों की प्रमुख मांगें:

मरीजों और उनके परिजनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जो डॉक्टर समय पर उपस्थित नहीं रहते, उनके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।

इसके साथ ही मरीजों ने यह भी मांग रखी है कि दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने की सुविधा केवल मंगलवार और बुधवार तक सीमित न रखकर पूरे सप्ताह (सभी कार्यदिवसों) में उपलब्ध कराई जाए। क्योंकि यह जिला स्तरीय सेवा है और गोंदिया जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से मरीज 50 से 100 किलोमीटर तक का सफर तय कर यहां पहुंचते हैं।

कई मरीजों को अपने साथ दिव्यांग व्यक्ति को लाने के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है, वाहन किराए पर लेना पड़ता है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। खासकर गरीब परिवारों के लिए यह प्रक्रिया बेहद कठिन और खर्चीली साबित हो रही है।

मरीजों का कहना है कि बार-बार चक्कर लगवाने के बजाय अस्पताल प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि एक ही बार में जांच और सर्टिफिकेट की प्रक्रिया पूरी हो सके। साथ ही, सभी संबंधित डॉक्टरों की नियमित और समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि दिव्यांग व्यक्तियों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल सके।

Advertisements

About विश्व भारत

Check Also

महसूल मंत्री बावनकुळे यांच्या नागपूर जिल्ह्यात नायब तहसीलदाराची आत्महत्या : कौटुंबिक कारण की आणखी काही?

नागपूर जिल्ह्यातील हिंगणा तालुक्यातील एमआयडीसी पोलीस स्टेशन हद्दीत येणाऱ्या वानाडोंगरी येथील ग्रीन फील्ड सोसायटीमध्ये मौदा …

नागपूरचे अतिरिक्त जिल्हाधिकारी प्रवीण महिरे अडचणीत : लाच प्रकरणात महसूल मंत्री बावनकुळे लक्ष घालणार

जिल्हाधिकारी कार्यालयातील एका बड्या अधिकाऱ्याला ५ लाखांची लाच घेताना रंगे हाथ पकडण्यात आल्याची घटना घडली …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *