नदियों के भूगर्भीय स्त्रोत से पाकिस्तान को प्रचुर मात्रा में जलापूर्ति शुरु
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822550220
नई दिल्ली। भारत अपने पडोसी दुश्मन मुल्क पाकिस्तान को पानी रोकने की खबर हैं?.परंतु आपस मे दोनो देशों मे आपसी दुश्मनी से पानी का कोई संबंध है? युद्ध का बदला युद्ध से होता है? न कि पानी रोकने? चुंकि प्राकृतिक पृथ्वी आकाश जल वायू अग्नि प्रकाश एसे पंच्च महाभूत तत्वों को रोका नहीं जा सकता है? दम है तो पंच्चमहाभूतों को रोककर बताएं? तब हम जानें? प्राकृतिक (कुदरत) समस्त संसार के साथ आपसी मतभेद भुलाकर समान भाव से न्याय दे रहा है. वह मित्रों और शत्रुओं को भी निशुल्क जलवायु और अग्नि प्रकाश दे रहा है.भारतीय आयुर्विज्ञान और विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों की माने तो प्रकृति पाकिस्तान को भी प्यासा नही रखना चाहता है. प्राकृति यानी कुदरत परमात्मा बिना किसी भेद-भाव के आकाश गंगा से निशुल्क मूसलाधार वारिस के माध्यम से प्रचुर मात्रा में जल और वायु अग्नि सूर्य प्रकाश दे रहा है.इतना ही नहीं दोनो देशों को समस्त ऋतुओं का दुख प्राकृति भारत पाकिस्तान सहित पूरे संसार को समस्त ऋतुओं सुख भोग उपलब्ध करा रहा है.इधर PM मोदी सरकार पाकिस्तान को पानी देना बंद करने का बात कर रहे हैं. दरअसल मे पाकिस्तान का पानी रोकने से नहीं उसके साथ युद्ध करना चाहिए.उसे पानी से नहीं युद्ध से नेस्तनाबूद करने की जरुरत है.चुंकि पाकिस्तान ने भारत के साथ सूक्ष्म युद्ध छेड रखा है.पानी रोकने से युद्ध का कोई संबंध नहीं है.गीता मे भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है हे “पार्थ युद्ध करो युद्ध”
दरअसल में पाकिस्तान की
ओर से अप्रैल 2025 में कश्मीर में आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान जाने वाली सिंधु जल संधि के तहत, विशेष रूप से चिनाब और झेलम नदियों (बगलिहार, किशनगंगा बांध) पर पानी का बहाव कम या नियंत्रित किया है. हालाँकि, भौगोलिक और तकनीकी कारणों से, इन पश्चिमी नदियों का पानी पूरी तरह से नहीं रोका जा सकता है, और यह भूगर्भ व ग्लेशियरों से प्रवाहित होता रहता है
मुख्य तथ्य के संबंध में बतादें कि सिंधु जलसंधि का भारत ने 1960 की संधि के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली पश्चिमी नदियों के पानी को रोकने के संकेत दिए हैं।
तकनीकी सीमा के वारे मे बताते हैं कि सिंधु, झेलम और चिनाब नदियाँ हिमालयी ग्लेशियरों पर निर्भर हैं, जहाँ से 60-70% जल आता है, जिसे भारत पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकता है.इन नदियों का पानी रोकने के लिए सरकार को 20 से 25 साल लगेंगे?
पाकिस्तान की निर्भरता के संबंध मे बताते हैं कि भारत के इस क़दम से पाकिस्तान के लिए जल संकट की गंभीर स्थिति पैदा होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। चुंकि
भूगर्भीय नदी का बहाव ग्लेशियरों के पिघलने और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों के कारण भूगर्भ से पानी का जोरदार बहाव बना हुआ है, जिससे पूरी तरह से पानी रोकना चुनौतीपूर्ण है।
परिणाम: पानी रोकने से पाकिस्तान में तबाही आ सकती है? यह कथन सरासर गलत है.चुंकि पूरी तरह पानी रोकना तकनीकी रूप से पूरी तरह कठिन है.
यह स्थिति पाकिस्तान के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
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