पर पुरुष गमन और पर स्त्री गमन से उज्ज्वल भविष्य तबाह का भय!
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान और सनातन धर्म शास्त्रों के मुताबिक पराई स्त्री से व्यभिचार और पराये पुरुष के संग व्यभिचार वर्जित माना गया है.चुंकि इससे वर्णसंकरता (दोगली नश्ल) यानी नाजायज पिता की संतान कहा जाता है. मानसिक विज्ञान की माने तो संबंधित महिलाओं और -पुरुषों के चरित्र, आचरण, स्वाभाव और उनकी कार्यप्रणालियों से जाना जा सकता है.
गरुण पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार पराये पुरुष से अनैतिक यौन संबंध रखने वाली महिलाओं पर कलंकित कलमुही नामक पिशाचनी शरीर में घर कर लेती है.जो निकट भविष्य मे सर्वांगीण शरीर मे असहनीय पीडा और तकलीफ का समना करना पडता है. उसी प्रकार पराई स्त्री से यौन संबंध रखने वाले पुरुष को कलंकित कलमुहा नामक पिशाच शरीर में आक्रमण करता हैं.दरअसल मे कलमुही नाम की एक पिशाचनी है जो पराये पुरुष से व्याभिचार करने वाली युवतियों को जीवन भविष्य में भीतरी अघात पंहुचाती है. अनेकानेक प्रकार की बीमारियां पैदा होने और नाते रिस्तेदारों मे अनबन बाप-बेटी- मां-बेटी तथा पति पत्नी के बीच झगड़ा और सक संदेह पैदा करती है. चैन से जीने नहीं देती है.घुटन और नफरत होने लगती है.किसी भी काम मे मन नहीं लगता. सक और संदेह पैदा करती है. शरीर के आंतरिक और बाहरी भागों मे अनेकानेक प्रकार की नास्तिक सूतक पातक ग्रह व्याधिदोष र पैदा करती और परिवार में परेशानियां बढाती और बिना कारण झगडा कराती है.उसी प्रकार अनैतिक यौन संबंध रखने वाले पुरुष को कलमुहा कहते हैं.जिनकी संतान झगड़ालू और दिवालिया पागलपन का खतरा पैदा करती है.बामार संतान और नपुंसक पति बेटा दामाद के कारण महिला-पुरुषों मे घ्रणा नफरत और घरेलू हिंसा का डर सताते रहता है. महात्मा गौतम बुद्ध ने अपने पंच्चशील नियमों मे पराई स्त्री और पराये पुरुष से व्याभिचार पर वर्जित बताया है. दरअसल में
यह सही है कि हिंदी में ‘कलमुही’ और कलमुँहा) शब्द का प्रयोग आमतौर पर उस स्त्री या पुरुष के लिए एक गाली या अपशब्द के रूप में किया जाता है, जिस पर अनैतिक यौन संबंध या चरित्रहीनता का आरोप हो।
यह शब्द ‘कलंक’ और ‘मुँह’ से बना है, जिसका अर्थ है ‘वह महिला जिसके मुँह पर (चरित्र का) कलंक लगा हो’।
हालाँकि, यह एक अत्यंत अपमानजनक और लैंगिक पूर्वाग्रह से ग्रसित शब्द है, जो समाज में स्त्री के चरित्रहीनता को लेकर बने दोहरे मानदंडों को दर्शाता है। यह शब्द न केवल अनैतिक माना जाता है, बल्कि यह अनैतिक संबंधों में शामिल पुरुष को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पूरी तरह से महिला के जीवन भविष्य को ही कलंकित करती है। क्योकि अत्याधिक अनैतिक यौन संबंध सेक्स ओवरटेक की वजह से महिलाओं और पुरुषोंञका दैहिक शारीरिक ढांचा कमजोर और जर्जर हो सकता है. और समय के पूर्व अकाल मृत्यु का खतरा बनता है.
सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-
उपरोक्त समाचार सामान्य ज्ञान पर अधारित विविध धर्मशास्त्रों ग्रन्थों और महान पुरुषों के प्रवचनो से संकलीत किया गया है. इसके अलावा यह विषय अनुचित और अपमानजनक माना जाता है। परंतु यह सही और सत्य भी है. इससे बचने के लिए एकांत स्थान मे गोपनीय रुप से मनोवैज्ञानिक चिकित्सक विशेषज्ञ के साथ सर्वांगीण शारीरिक विकास के लिए परामर्श करके निराकरण जरुरी है.
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