छिंदवाड़ा में डॉक्टरों ने की 28 फरवरी से सामूहिक अवकाश की चेतावनी
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
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छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश के छिंदवाडा के जिला अस्पताल में समय पालन को लेकर जिला प्रशासन की सख्ती के बाद डॉक्टरों और प्रबंधन के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। चिकित्सकों ने अधिष्ठाता को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उन्हें 5–10 मिनट की देरी पर कारण बताओ नोटिस और वेतन कटौती की चेतावनी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?डॉक्टरों द्वारा जारी पत्र के अनुसार, पिछले 15–20 दिनों से अधिष्ठाता द्वारा कार्यालयीन समय में दो-दो बार राउंड लिया गया, जिसमें सभी चिकित्सक अपने कार्यस्थल पर उपस्थित पाए गए। इसके बावजूद 25 फरवरी 2026 को सुबह 8:30 बजे लिए गए राउंड को डॉक्टरों ने “द्वेषपूर्ण कार्रवाई” बताते हुए कहा कि इससे उनका मनोबल और आत्मविश्वास प्रभावित हुआ है।
चिकित्सकों का कहना है कि मामूली देरी (5 या 10 मिनट) पर भी कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं और वेतन कटौती की जा रही है। इससे वे मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं और इसका असर मरीजों की सेवा पर भी पड़ सकता है।
नोटिस वापस लेने की मांग डॉक्टरों ने अपने पत्र में मांग की है कि जिला चिकित्सालय और CIMS के सभी डॉक्टरों को जारी किए गए नोटिस वापस लिए जाएं तथा वेतन कटौती न की जाए। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से आम जनता के बीच डॉक्टरों की नकारात्मक छवि बन रही है।
28 फरवरी से सामूहिक अवकाश की चेतावनी चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे 28 फरवरी 2026 से सामूहिक अवकाश पर जाने को बाध्य होंगे। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।वही जानकारों की मानें तो यह डॉक्टरो की एक प्रकार की ब्लैकमेलिंग है।
फिलहाल इस मामले में कॉलेज प्रबंधन डीन मेडिकल कॉलेज अभय सिंह का कहना है कि यह मामला आपसी समझाइश से सुलझ जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर जाते हैं, तो मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
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