मुंबई : महाराष्ट्र में एक तरफ जहां फिलहाल शिंदे-फडणवीस की सरकार है वहीं आगामी 2024 के चुनाव मे तख्ता पलट कार्यक्रम हो सकता है?हालकि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने गत अप्रैल माह मे कह चुके हैं कि शरद पवार और सुप्रिया सुले की वजह से शिवसेना में बगावत हुई थी। पवार सुप्रिया को सीएम बनाना चाहते थे।
हालांकि सुप्रिया सुले कभी महाराष्ट्र की सीएम नहीं बन सकती परंतु वह विधिवत भाजपा मे शामिल हो जाती हैं तो उनको मुख्यमंंत्री बनने का सुवर्ण अवसर मिल सकता है।हालकि पिछले मार्च-अप्रैल महिने मे सांसद सुप्रियाताई सुले ने अनेक महिला कार्यकर्ता ओं के साथ भाजपा मे शामिल होने का मन बना लिया था? परंतु वह अपने पिता श्री शरदचंद्र पवार और भ्राताश्री अजीतदादा पवार को नाराज नहीं करना चाहती हैं? इसीलिए अपना मन मसोसकर उन्होने चुपचाप मौन रहना बेहतर समझा? इस संबंध मे NCP चीफ शरदचंद्र पवार भीञअपने जीते जी सुप्रियाताई सुले को सीएम बनाने का सपना संजोये हुए है? शरद पवार के करीबी सूत्रों की माने तो सुप्रिया ताई सुले सीएम बनती है तो उनके पिताश्री शरदचंद्र पवार के शरीर मे नई जान आ सकतीञहै।हालकि पिछले अप्रैल माह मे सुप्रिया सुले को सीएम और आदित्य को डिप्टी सीएम बनाने की डील हुई थी । नतीजतन एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की इस डील से शिवसेना के विधायक नाराज हो गए थे?
महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले के एक दावे से राज्य में फिर सियासत गर्म हो गयी थी। अपने दावे में बावनकुले ने शिवसेना में पिछली साल हुई बगावत की असल वजह बताई थी। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने एक नया सियासी फॉर्मूला तैयार कर लिया था। जिसके मुताबिक सुप्रिया सुले को साल 2024 में राज्य का मुख्यमंत्री और आदित्य ठाकरे को उपमुख्यमंत्री बनाने की बात तय की गई थी। जब यह बात शिवसैनिकों को पता चली तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया और बाद में शिवसेना के 40 विधायकों ने बगावत हो गई थी। इसकी वजह से महाराष्ट्र की तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गयी थी। इस डील के विषय में विस्तार से बात करते हुए चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा था कि महाविकास अघाड़ी सरकार में उद्धव ठाकरे पांच साल तक मुख्यमत्री बने रह सकते थे।
राजनैतिक भविष्य वक्ताओं की माने तो साल 2024 के चुनाव के बाद सुप्रिया सुले मुख्यमंत्री बनेंगी और चंद्रशेखर बाानकुले को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। श्री बावनकुले को DCM बनने की दिलचस्पी नहीं है । वे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी से बेहद खुश हैं। इस दावे पर यकीन करें तो यह भी कहा गया था कि आगामी चुनाव में शिवसेना दो फाड होने से निर्वाचित विधायकों का सुखचैन उजड चुका है। क्योंकि शिव सेना विधायकों की संख्या भी कम हो गई है।न उधर केंद्रीय आलाकमान सीएम एकनाथ शिंदे और डीसी एम देवेन्द्र फड़णवीस को पदोन्नत के रुप में केंद्र सरकार मे ले सकते हैं।
NCP चीफ शरद पवार के टारगेट से डरे शिवसैनिक?
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने यह दावा भी किया था कि इस काम के लिए महाविकास अघाड़ी के संयोजक शरदचंद्र पवार ने पार्टी को चुनाव में 100 विधायक चुनकर लाने का टारगेट भी दिया था। उन्होंने कहा था कि जहां एक तरफ उद्धव ठाकरे मंत्रालय नहीं जा रहे थे वहीं अजित पवार बतौर उपमुख़्यमंत्री मंत्रालय में काम कर रहे थे। शरद पवार के इसी टारगेट की वजह से शिवसेना के विधायकों को जीत का डर सताने लगा जो बाद में बगावत के रूप में बदल गया। महाराष्ट्र की सियासत में साल 2022 जून का महीना हमेशा याद रखा जायेगा।
उसी महीने शिवसेना में बगावत हुई और आखिर में एकनाथ शिंदे और बीजेपी ने मिलकर महाविकास अघाड़ी सरकार को हटाकर शिंदे- फडणवीस सरकार का गठन किया। इस दौरान पार्टी के 40 विधायकों और 13 सांसदों ने भी उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया। दोनों तरफ से यह जंग चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई।
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