क्या BJP से हाथ मिलाएंगे? पर विचार धारा के लिए लड़ाई लडेंगे?NCP चीफ शरद पवार का बयान
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट
मुंबई। क्या NCP चीफ शरदचंद्र पवार BJP से हाथ मिलाएंगे? इसलिए अपना भतीजा अजितदादा को CM बनाने की दृष्टी से उन्होंने भाजपा से मित्रता का हाथ मिलाया है? इस पर NCP अध्यक्ष श्री पवार कह चुके हैं कि भाजपा से कोई बुराई नहीं? वल्कि भाजपा नेताओं के साथ उनकी अच्छी मित्रता और प्रगाढ संबंध रहे है। परंतु वे NCP अध्यक्ष होने के नाते विचारधारा की लड़ाई लडते रहेंगे? इसलिए तो उन्होने अपना भतीजा अजित पवार को भाजपा प्रणीत की सरकार मे शामिल करवा दिया है? वैसे राजनीति मे कोई किसी का ना शत्रु होता और ना किसी का मित्र होता है? अपितु राजनीति मे अवसरवादिता कूूट कूटकर भरी हूई रहती है?
विगत जुलाई मे एनसीपी में विभाजन के बाद पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने पार्टी की भविष्य की दिशा स्पष्ट कर दी है. पवार ने ये साफ कर दिया है कि वो बीजेपी का समर्थन करेंगे या नहीं. विचार किया जाएगा। NCP के गोपनीय सूत्रों की माने तो मराठा छत्रप शरदचंद्र पवार ने NCP पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को एकांत मे समझाया है कि हमारे और तुम सभी के ऊपर ED जांच-पड़ताल और सेंट्रल की खंजर लटक रही है? परिणामत: बचने के लिए भतीजा अजित पवार को भाजपा में भेजना पडा है? उन्होने आगे बताया कि जान बची लाखों पाए? सेंट्रल जेल हूई तो समस्त मटियामेट हो जाएगा? इसलिए खामोश रहना ही बेहतर है?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विभाजन के बाद पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने पार्टी की भविष्य की दिशा स्पष्ट कर दी है, जिसे लेकर NCP कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हूई हैं.हालकि NCP पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का विश्वास संपादन की दृष्टी से शरद पवार ने अपना रुख साफ करते हुए कहा, ”किसी भी हालत में बीजेपी के साथ नहीं जाऊंगा. भाजपा के किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। मैं लडूंगा, लेकिन विचारधारा से कभी समझौता नहीं करूंगा.”
पुणे शहर के एनसीपी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में पवार से मुलाकात की. उनसे बातचीत करते हुए पवार ने पार्टी की आगामी रणनीति के बारे में बताया. सांसद सुप्रिया सुले, श्रीनिवास पाटिल और अमोल कोल्हे, शहर अध्यक्ष प्रशांत जगताप और अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे. उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है। शिवसेना को लेकर जिस तरह से चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर पार्टी और चुनाव चिह्न वापस लिया गया, उससे इन्कार नहीं किया जा सकता.’
*बीजेपी को देंगे समर्थन?*
हालांकि, वह इस दबाव से डरेंगे नहीं. हालांकि कोई नाम और चुनाव चिह्न नहीं है, फिर भी पार्टी के उम्मीदवार चुने जाएंगे. विचारधारा से कोई समझौता नहीं होगा. इसलिए बीजेपी को समर्थन देने का सवाल ही नहीं उठता. इन शब्दों में पवार ने कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि संघर्ष करके सब कुछ नए सिरे से बनाया जाएगा.
पवार अगस्त के अंत तक पुणे में बैठक हूई जिसमें. शहर अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने कहा कि बैठक का स्थान और समय अगले कुछ दिनों में तय किया जाए. चूंकि यह बैठक एनसीपी के गढ़ पुणे जिले में होगी चाहिए। इसलिए इस बैठक में पवार क्या कहेंगे, इसे लेकर उत्सुकता पैदा हो गई थी।
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