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भारत अंग्रेजों का गुलाम था, तो झक मारने अंग्रेजी अपना रहे हो!

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भारत अंग्रेजों का गुलाम था, तो झक मारने अंग्रेजी अपना रहे हो!

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

नई दिल्ली। भारत के 200 साल तक अंग्रेजुएट के गुलाम था तो फिर अंग्रैजी पाश्चात्य संस्कृति को क्यों अपना रहे हो?हमने माना कि200 वर्षों के ब्रिटिश शासन (गुलामी) के बावजूद, स्वतंत्रता के बाद भी पाश्चात्य संस्कृति की तरफ झुकाव होना एक जटिल राष्ट्रीय समस्या है। इसके पीछे मुख्य रूप से औपनिवेशिक मानसिकता को बढावा, आधुनिक खान-पान और अश्लीलता तथा विलासिता की होड़ लगी हुई है। जब देश स्वतंत्र हुआ तब भारत मे मात्र 50 से 55 अंग्रेजी कॉन्वेंट अंग्रेजों द्धारा चलाए जा रहे थे.लेकिन देश स्वतंत्रता के बाद वर्तमान परिवेश मे देश भर मे अंग्रेजी कान्वेंट की संख्या 3 लाख से भी अधिक हो गई हैं? यह आधुनिक भारत सरकार की यंत्रणा के समक्ष एक प्रकार का बदनुमा ही कहा जा रहा है.देश भर के होनहार लडका लडकियों को पश्चाताप संस्कृति को आकर्षित करने की आधुनिक शिक्षा और अर्धनग्न और अश्लील परिधान क्यों अपनाए जा रहे हैं.दरअसल मे सच देखा जाए तो पाश्चात्य संस्कृति की तरफ झुकाव के प्रमुख कारण है औपनिवेशिक मॉडल शिक्षा प्रणाली विलासिता यानी अश्लीलता को बढावा देने मे सुखानुभूति के लिए बेचेन है.बताते है कि अंग्रेजों ने भारत में ‘मेकॉले की शिक्षा नीति’ लागू की थी, जिसका उद्देश्य “रंग और खून से भारतीय, लेकिन स्वाद, विचारों और बुद्धि में अंग्रेज” तैयार करना था।

अंग्रेजी भाषा का प्रभुत्व बनाए रखना अंग्रेजी को प्रशासनिक, न्यायिक और उच्च शिक्षा की भाषा बना दिया गया। इससे सामाजिक प्रतिष्ठा और बेहतर रोजगार के लिए अंग्रेजी सीखना अनिवार्य कर दिया गया, जिससे पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने में आसानी हुई है।

आधुनिकीकरण और तर्कवाद उस समय की भारतीय समाज में सती प्रथा, बाल विवाह और जातिगत भेदभाव जैसी कुप्रथाएं थीं। पाश्चात्य शिक्षा से आए स्वतंत्रता, समानता और तार्किक सोच के विचारों ने भारतीय मध्यम वर्ग को प्रभावित किया है।

औपनिवेशिक हैंगओवर लंबे समय तक शासक वर्ग (गोरे अंग्रेजों) की नकल करने की मानसिकता भारतीयों में होड लगी हुई है.और इसे उच्च समाज का प्रतीक माना जाने लगा। जबकि अंग्रेजों ने भी भारत पर 200 साल राज किया था लेकिन उस समय सनातनी हिन्दू समाज उनके खिलाफ क्यों कुछ करते थे?

मुगलों ने देश की अर्थव्यवस्था को 32% से घटा कर 28% कर दिया था। इसलिए वे बुरे हैं।

अंग्रेजों ने हमारी अर्थव्यवस्था के बोझ को 28% से हल्का करके उसे केवल 1% तक ला दिया था, इसलिए हम उनके कृतज्ञ हैं।

अंग्रेजों ने भारत क्यों छोड़ा?

आखिर अंग्रेजों ने भारत क्यों छोड़ा से संबंधित कुछ तथ्य

अंग्रजों ने भारत को लगातार लगभग 190 साल तक लूटा था

जिसके कारण से भारत पूरी तरह से कंगाल हो चुका था इसलिए अंग्रेजों को भारत से आगे और कुछ मिल पाने की आशा ही नहीं रह गई थी।

2) भारत के अनगिनत क्रान्तिकारियों ने अंग्रेजों के नाक में दम कर रखा था जिसके कारण अंग्रेजों को भारत से चले जाने में ही अपनी खैरियत नजर आने लगी थी।

3) अंग्रेजी सेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध में लगातार 6 साल तक अपना खून बहाया था जिसके कारण, ब्रिटेन के जीतने के बावजूद भी, अंग्रेजी सेना का मनोबल चूर-चूर हो गया था और उनमें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से लड़ने का साहस नहीं रह गया था।

4) भारत में अंग्रेजी सेना के अधिकांश सैनिक भारतीय थे जिनकी निष्ठा अंग्रेजों के प्रति खत्म होने लगी थी और वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने लगे थे।

अपने भारतीय सैनिकों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने से रोक पाना अंग्रेजों के बस की बात नहीं रह गई थी।

5) नेताजी सुभाषचेंद्र बोस के आजाद हिन्द फौज से अंग्रेज भयभीत थे।

उन्हें यह भी डर लग रहा था कि नेताजी का अनुसरण कर और कई “नेताजी” पैदा न हो जाएँ।

6) द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत संघ महाशक्तियों के रूप में उभर कर आई थे और ये दोनों ही महाशक्तियाँ भारत की स्वतंत्रता की पक्षधर थीं।

अंग्रेज इन महाशक्तियों का विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे।

7) इंग्लैंड में कंजर्वेटिव पार्टी की जगह लेबर पार्टी का शासन हो गया था, जिसके अधिकांश नेता भारत की आजादी के पक्ष में थे।

8) भारत से लात मारकर भगाए जाने की अपेक्षा भारतीयों को सत्ता सौंप कर चुपचाप पतली गली से निकल जाने को अंग्रेजों ने बेहतर समझा।

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