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एम्बुलेंस सेवा बेकार: पुलिस ने बचाई गर्भवती की जान, युवक की मौत

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एम्बुलेंस सेवा बेकार: पुलिस ने बचाई गर्भवती की जान, युवक की मौत

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टेकचंद्र शास्त्री:

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9822550220

 

छिंदवाडा। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। छिंदवाड़ा और पांढुर्ना में हुई दो घटनाओं ने 108 आपातकालीन एंबुलेंस व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया है।

पांढुर्ना में पुलिस की तुरंत कार्रवाई ने रोकी त्रासदी

14 मार्च की रात पांढुर्ना के बिछुआकलां गांव में नवनीत नारनवरे की सात माह की गर्भवती पत्नी रवीना को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिवार ने फौरन 108 एंबुलेंस के लिए कॉल किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। बिगड़ती हालत देख नवनीत ने उसे बाइक पर लादकर अस्पताल की ओर रवाना किया। रास्ते में भंडारगोंदी टी-पॉइंट पर ड्यूटीरत एएसआई अशोक तुरिया और प्रधान आरक्षक गजानन मांगुलकर ने दर्द से कराहती महिला को देखा तो सरकारी वाहन से उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने बताया कि थोड़ी सी भी देरी घातक साबित हो सकती थी।

चलती कार में लगी आग, डॉक्टर की पत्नी जिंदा जली

सागर – गढ़ाकोटा रोड पर शनिवार तड़के करीब 4 बजे एक चलती कार में आग लग गई। हादसे…

दूसरी घटना छिंदवाड़ा के चोरगांव तिराहे के पास हुई, जहां थावड़ी कला के 18 वर्षीय राजा वर्मा सड़क दुर्घटना का शिकार बने। परिवार का कहना है कि हादसे के बाद घंटों 108 एंबुलेंस का इंतजार किया गया, लेकिन वह नहीं पहुंची। मजबूरन निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। राजा इकलौते संतान थे, जिससे परिजनों का शोक दर्दनाक हो गया। परिवार का आरोप है कि समय पर मदद मिली होती तो जान बच सकती थी।

स्वास्थ्य अधिकारियों की स्वीकारोक्ति

पांढुर्ना बीएमओ डॉ. दीपेन्द्र सलामे ने माना कि क्षेत्र में संसाधनों की भारी कमी है। पांढुर्ना और नांदनवाड़ी अस्पतालों के लिए मात्र एक ही एंबुलेंस उपलब्ध है, जो मांग के अनुरूप नहीं। उन्होंने कहा कि शासन से अतिरिक्त वाहनों की मांग की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां न बनें। राज्य स्तर पर 108 सेवा की कई पुरानी शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जैसे रखरखाव की कमी और देरी से पहुंचना।

व्यापक संकट के संकेत

मध्य प्रदेश सरकार मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने के दावे करती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर ये घटनाएं व्यवस्था की लापरवाही दिखाती हैं। विपक्षी दल इसे बड़ा मुद्दा बना रहे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में आमजन आपात सेवाओं पर भरोसा खो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एंबुलेंस संख्या बढ़ाने के साथ रखरखाव और स्टाफ प्रशिक्षण पर तत्काल ध्यान जरूरी है। ये मामले न केवल स्थानीय हैं, बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य तैयारियों पर सवालिया निशान लगाते हैं।

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