बिना रिश्वत लिए आंगनबाड़ी के पोषाहार पंजी पर हस्ताक्षर नहीं
टेकचंद्र शास्त्री:
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बिहार। नालंदा से एक चौंका देने वाली खबर सामने आई है। जहां आंगनबाड़ी के पोषाहार पंजी पर हस्ताक्षर करने के लिए सुपरवाइजर की तरफ से रिश्वत की मांग की गई थी। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि ये महिला बिना रिश्वत के कोई काम नहीं करती थी। उसके बाद आज निगरानी ने उसे दबोच लिया। नगरनौसा प्रखंड में निगरानी विभाग की टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए आंगनबाड़ी महिला पर्यवेक्षिका (एलएस) सुषमा कुमारी को 3200 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने जाल बिछाकर उनके आवास पर ही कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कर निगरानी की टीम उन्हें अपने साथ पटना ले गई। इस कार्रवाई के बाद बाल विकास परियोजना कार्यालय और प्रखंड मुख्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सुपरवाइजर गिरफ्तार
यह कार्रवाई कंचन भवन गांव के वार्ड संख्या तीन स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 28 की सेविका बेबी कुमारी की लिखित शिकायत के आधार पर की गई। सेविका ने निगरानी विभाग को दिए आवेदन में आरोप लगाया था कि पोषाहार पंजी पर हस्ताक्षर करने और अन्य सरकारी कार्यों के निष्पादन के बदले उनसे अवैध राशि की मांग की जा रही थी। शिकायत के अनुसार, 25 हजार 747 रुपये की राशि के भुगतान के एवज में 20 प्रतिशत कमीशन मांगा गया था। इसके अलावा हर माह 3200 रुपये अलग से नजराना देने का दबाव भी बनाया जा रहा था।
निगरानी ने लिया एक्शन
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि पर्यवेक्षिका क्षेत्र के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों की संचालिकाओं से मानदेय और अन्य मदों में मिलने वाली राशि से नियमित रूप से हिस्सा मांगती थीं। इसी आरोप को गंभीरता से लेते हुए निगरानी विभाग ने प्रारंभिक जांच कराई। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई।
पटना ले गई टीम
निगरानी डीएसपी शशि शेखर चौधरी ने बताया कि उनके नेतृत्व में सात सदस्यीय धावा दल का गठन किया गया था। पूर्व निर्धारित योजना के तहत सेविका को रुपये लेकर पर्यवेक्षिका के आवास पर भेजा गया। जैसे ही सेविका ने 3200 रुपये दिए, पहले से घात लगाए टीम ने मौके पर पहुंचकर सुषमा कुमारी को रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई में इंस्पेक्टर विनोद कुमार समेत अन्य अधिकारी शामिल थे।
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