नैतिक मूल्यों में आई गिरावट का कारण पथभ्रष्ट राजनैतिक चरित्र
टेकचंद्र शास्त्री:
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वर्तमान परिवेश में भारतीय समाज में नैतिक मूल्यों में आई गिरावट के प्रमुख कारणों में से पता चलता है कि एक पथभ्रष्ट राजनीतिक चरित्र को माना जा रहा है। राजनीति, जो कभी समाज का मार्गदर्शन करने वाला माध्यम थी, अब अक्सर सत्ता-केंद्रित और लाभ-आधारित हो गई है, जिसका सीधा असर सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहा है।पथभ्रष्ट राजनेता कहते कुछ और करते कुछ और ही हैं.
राजनीतिक नैतिकता में गिरावट के कारण समाज में अनैतिक व्यवहार को सामान्य स्वीकृति मिल रही है। इसके प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
सत्ता की अतृप्त लालसा: वर्तमान में राजनीति का एकमात्र लक्ष्य ‘सत्ता प्राप्ति’ बन गया है, जिसके लिए विचारधारा को दरकिनार कर दिया गया है। दल-बदल, खरीद-फरोख्त और सिद्धांतों से समझौता करना आम बात हो गई है।
राजनीति का अपराधीकरण: राजनीति में अपराधी पृष्ठभूमि वाले लोगों का प्रवेश और धनबल का बढ़ता प्रभाव नैतिक मूल्यों को हाशिये पर ढकेल रहा है।
नेता-प्रशासक गठजोड़ भ्रष्ट राजनेताओं और अधिकारियों का गठजोड़ (Nexus) कानून को ताक पर रखकर निजी लाभ के लिए काम करता है, जिससे आम जनता का व्यवस्था से विश्वास उठ रहा है। पक्षपात भ्रष्टाचार और भाई -भतीजावाद जनहित के बजाय निजी और पारिवारिक लाभ के लिए सत्ता का दुरुपयोग, जिसे ‘परिवारवाद’ के रूप में भी देखा जाता है, नैतिक पतन का एक बड़ा कारण है।
सत्ता के लिए वैचारिक विचलन विचारधाराओं की जगह लाभ-हानि का गणित लेने से राजनीति में नैतिकता का स्थान अवसरवादिता ने ले लिया है।
संस्थागत कमजोरी राजनीतिक दलों में लोकतंत्र की कमी और जनता के प्रति जवाबदेही में गिरावट के कारण, नेता अनैतिकता के उदाहरण पेश कर रहे हैं।
समाज पर प्रभाव
जब राजनीतिक नेतृत्व अनैतिकता का उदाहरण प्रस्तुत करता है, तो समाज का हर स्तर उससे प्रभावित होता है:
सामाजिक अविश्वास नागरिकों में एक-दूसरे के प्रति और राजनीतिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है।
अनुकूलनशीलता भ्रष्ट आचरण को अब बुरा नहीं, बल्कि सामान्य माना जाने लगा है।
युवाओं पर नकारात्मक असर आदर्शों की कमी के कारण युवा पीढ़ी में भी नैतिक मूल्यों में गिरावट देखी जा रही है।
सुधार हेतु उपाय
राजनीति का शुद्धिकरण राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के लिए कठोर कानून और उनके प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है।
नैतिक शिक्षा स्कूली पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि भविष्य की पीढ़ी मूल्य-आधारित राजनीति की सूत्रधार बन सके।
जन-जागरूकता मतदाताओं को अपनी वोट की ताकत समझनी चाहिए और अनैतिक/भ्रष्ट नेताओं को अस्वीकार करना चाहिए।
राजनीतिक दलों में पारदर्शिता पार्टियों के अंदर आंतरिक लोकतंत्र और उनके चंदे में पारदर्शिता अनिवार्य होनी चाहिए।
निष्कर्ष:- नैतिकता विहीन राजनीति विनाशकारी होती है। एक समर्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए राजनीति में सेवाभाव और उच्च नैतिक मूल्यों का पुनर्स्थापन अनिवार्य है, जैसा कि महात्मा गांधी जैसे नेताओं ने स्थापित किया था।
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