वाणी मे विराजे सरस्वती?अपशब्दों का प्रयोग से जलकर नष्ट सारे पुण्य
प्राचीनम् भारतीय सत्य सनातन सांस्कृतिक की मर्यादाओं के अनुसार अपनी “वाणी में सरस्वती का वास” का अर्थ है कि जिस व्यक्ति की बोली, वाणी या भाषा में ज्ञान, पवित्रता,विनम्र सच्चाई और मधुरता होती है, उसकी वाणी में साक्षात ज्ञान की देवी माँ सरस्वती निवास करती हैं.
इस संदर्भ में पौराणिक मान्यता के अनुसार, प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पहले, लगभग 3:30 से 5:30 बजे के बीच) में माँ सरस्वती हर व्यक्ति की जिह्वा (जीभ) पर वास करती हैं.
वाणी में पवित्रता इस समय बोली गई बातें सच होती हैं, इसलिए इस समय हमेशा सकारात्मक और मधुर बोलना चाहिए.ज्ञान और कला की देवी सरस्वती जी ज्ञान, संगीत, कला, वाणी और विद्या की देवी हैं. महापुरुषों या संतों की वाणी में हमेशा सरस्वती का वास माना जाता है, क्योंकि उनके शब्द ज्ञानवर्धक और सुखद होते हैं.तदहेतु अपनी
वाणी का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि यदि आप वाणी के नियमों का पालन करते हैं, सच बोलते हैं और भाषा का दुरुपयोग नहीं करते हैं, तो माता सरस्वती आप पर प्रसन्न रहती हैं और आपकी वाणी को शक्ति प्रदान करती हैं.
इसलिए अपनी वाणी से अच्छे सत्य और सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करना चाहिए.चुंकि वाणी मे साक्षात मां सरस्वती का वास होता है. इसलिए अपनी वाणी को अपवित्र और प्रदूषित नहीं करना चाहिए.कटु वचन वाणी के अपशब्द से बुध ग्रह रुष्ट हो जाता है.यानी अपमानजनक कटु बचन बोलने से सारे पुण्य जलकर नष्ट हो जाते है.यह एक बहुत ही गहरा और आध्यात्मिक विषय है। भारतीय संस्कृति में वाणी को अत्यंत पवित्र माना गया है।
वाणी में साक्षा विधा की जननी सरस्वती का वास रहता है. इसलिए, जब हम अच्छा बोलते हैं, तो ज्ञान और सकारात्मकता फैलती है।
अपशब्दों का प्रभाव के कारण किया कराया दान पुण्यकर्म भी नष्ट हो जाते हैं.जब हम अपमानजनक कठोर, अपशब्द या झूठ बचन बोलते हैं, तो अपनी ही प्रदूषित जुबान की पवित्रता को नष्ट करते हैं। अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने से आपका किया कराया चौपट हो जाता और काम बिगड़ने लगते हैं.
बुध ग्रह और वाणी ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि और संवाद का कारक माना जाता है. जब हम गलत शब्दों का प्रयोग करते हैं या झूठ बोलते हैं, तो यह सीधे तौर पर बुध ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति की बुद्धि और यश का नाश हो सकता है. पौराणिक महत्व के संदर्भ मे संदेश हमें सिखाता है कि हमें अपनी वाणी का प्रयोग सोच -समझकर करना चाहिए। मीठी और सत्य वाणी न केवल दूसरों को प्रसन्न करती है, बल्कि हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाती है, जिससे बुध ग्रह भी शुभ फल देते हैं.
यह ज्योतिष और आध्यात्मिक मान्यताओं में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही गई है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, बुध ग्रह को वाणी, संवाद, बुद्धि और तर्क का कारक माना जाता है।
आपके कथन के पीछे के ज्योतिषीय और आध्यात्मिक कारण यहाँ दिए गए हैं:
बुध और वाणी अपशब्द या कठोर वचन बोलना बुध ग्रह को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। जब आप अनुचित भाषा का प्रयोग करते हैं, तो आपकी कुंडली में बुध कमजोर या दूषित हो जाता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता कम हो सकती है और जीवन में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
पुण्य का क्षय शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति जीवन भर अच्छे कर्मों से जो ‘पुण्य’ अर्जित करता है, वह गलत वाणी (अपशब्द, झूठ, चुगली) के कारण नष्ट हो जाते हैं। वाणी में बहुत ऊर्जा होती है; गलत शब्द न केवल दूसरों को आहत करते हैं, बल्कि बोलने वाले के आध्यात्मिक खाते ( को भी खाली कर देते हैं।
परिणाम बुध के क्रोधित या कमजोर होने से व्यापार में घाटा, वाणी में दोष, शिक्षा में रुकावट और रिश्तों में खटास जैसी समस्याएं आ सकती हैं।
बुध को शांत और प्रसन्न रखने के लिए हमेशा प्रिय वचन और हितकारी (मीठा और सच) बोलने का प्रयास करना चाहिए। कम बोलें और सोच-समझकर बोलें.
बुध को प्रशन्न करने का यह सबसे सरल उपाय माना गया है. अपनी वाणी मे विराजमान सरस्वती को प्रशन्न करने के लिए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए या ‘ॐ नमो भगवते बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जाप करने से हर कार्यमे सफलता मिलती है.यह कथन पूरी तरह सच है कि अपशब्द बोलना न केवल सामाजिक रूप से, बल्कि ज्योतिषीय रूप से भी हानिकारक है।
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