क्या सचमुच में देश के लिए कलंक है गांधी नेहरू परिवार?
टेकचंद्र शास्त्री:
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नई दिल्ली। क्या सचमुच मे गांधी-नेहरु परिवार देश के लिए कलंकित रहा है. इस विषय पर अध्ययन मनन और चिंतन की आवश्यकता महसूस की जा रही है. एक सर्वेक्षण के मुताबिक महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल मे हिन्दू और मुसलमानों के बीच वैमनस्यता पैदा की है.वे हिन्दू मंदिरों मे इस्लाम की पवित्र किताब कुरान शरीफ पढने की कोशिशें करते थे. परंतु उन्होंने मस्जिदों मे श्रीमद्भागवत गीता पढने की जरा भी कोशिश नहीं की.इससे सनातन हिन्दू समाज मे महात्मा गांधी के प्रति नफरत और घ्रणा उत्पन्न होने लगी है. महात्मा गांधी चाहते तो मस्जिदों मे गीता पाठ और मंदिरों मे कुरान पाठ शुरु करवाकर हिन्दू-मुस्लिम मे प्रखर एकता और भाईचारा पैदा कर सकते थे. पर उन्होंने एसा कदापि नहीं किया.उनका मुख्य उद्देश्य हिन्दू-मुस्लिमों के बीच नफरत और आपसी घ्रणा की भावना पैदा करना था?उसी प्रकार पं जवाहर लाल नेहरू भी सिर्फ मुसलमानों के पक्ष मे अपना आचरण अनुसरण अनुकरण और अनुगमन करते थे.जवाहर लाल नरु ने अपने नाम के आगे पंडित शब्द जोडकर सकल सनातनी हिन्दू समाज को मूर्ख बनाने के शिवाय कुछ नहीं किया है.नेहरु को मालुम था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.परंतु जवाहर लाल नेहरु ने वहां 370 धारा लागू करवाकर हिन्दू-मुस्लिमों के बीच झगडा फसाद पैदा करवाया.
महात्मा गांधी और पं जवाहर लाल नेहरू परिवार भारतीय राजनीति में एक अत्यंत ध्रुवीकृत विषय है, जिस पर तीखी बहस होती रहती है। आलोचक अक्सर इस परिवार पर भ्रष्टाचार (जैसे नेशनल हेराल्ड मामला), वंशवाद, और राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाते हैं, जबकि समर्थक देश के प्रति उनके बलिदान और आधुनिक भारत के निर्माण का उल्लेख करते हैं।
इस विषय पर विभिन्न दृष्टिकोण इस प्रकार के संबंध मे गांधी-नेहरु परिवार
आलोचना के बिंदु रहे हैं. भाजपा नेताओं और समर्थकों का मानना है कि परिवार ने स्वतंत्रता के बाद से ही अपनी नीतियों और “काले कारनामों” से देश को समस्याओं के चौराहे पर ला खड़ा किया है। उन पर नेहरू जी के विदेश दौरों में खानपान की आदतों (बीफ खाने के आरोप) से हिंदू आस्था का अपमान करने और सोनिया गांधी के कार्यकाल में समानांतर सरकार चलाने का आरोप लगाया गया है।
इस परिवार के समर्थकों का दावा है कि नेहरू-गांधी परिवार ने 1930 से ही अपनी निजी संपत्ति देश को समर्पित की है और उन पर भ्रष्टाचार के सभी आरोप बेबुनियाद हैं। इस विषय पर पिछले काफी समय से देश भर में
राजनीतिक बहस छिड चुकी
है.
राजनीतिक जगत में यह बहस जारी है और जारी रहेगी चुंकि गांधी नेहरु परिवार ने देश को दिशा दी या अपनी राजनीति के लिए देश को नुकसान पहुँचाया है.इस विषय पर चिंतन करना बेहद जोखिम भरा है.
यह एक राजनीतिक रूप से प्रेरित धारणा है, जिसे विरोधी दल “देश का कलंक” के रूप में देखते हैं, जबकि समर्थक इसे देश का स्तंभ मानते हैं
सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-
उपरोक्त समाचार सामान्य ज्ञान पर अधारित भारतवर्ष के विभिन्न स्तरीय वार्तालाप सर्वेक्षण और अवलोकन के अनुसार प्रसारित है.इसमे किसी की आदर्श भावनाओं को आहत करना हमारा उद्देश्य नहीं है. समाचार अच्छा लगे तो हमे सधन्यवाद जरुर देना और उपरोक्त समाचार अच्छा ना लगे तो आपकी ओर से तथ्यात्मक प्रतिक्रिया हमें भेजने का महान उपक्रम करेंगे।सधन्यवाद
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