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मामा के अंतिम संस्कार मे गया तो ठेकेदार द्धारा श्रमिक को काम से बेदखल 

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मामा के अंतिम संस्कार मे गया तो ठेकेदार द्धारा श्रमिक को काम से बेदखल

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नागपुर।कोराडी तापीय विधुत केंद्र मे ई-निविदा धारक फर्म मेसर्स:ABU Constitution मे कार्यरत कामठी निवासी अजय यादव नामक अनुबंध वेल्डर श्रमिक अपने मामा का निधन की खबर सुनकर वह अपने परिवार सह उनके अंतिम संस्कार मे शामिल होने झांसी चले गये.इसकी मोबाइल पर सूचना कंपनी के सुपरवाइज़र को दी थी.कि वह अपने झांसी निवासी मामा का अंतिम संस्कार अस्थि विसर्जन और तेरहवीं सम्पन्न होने के पश्चात ही अपने काम पर वापस लौटेगा.परंतु दुर्भावनाओं का आवेश आकर फर्म मालिक श्री भरत भाई पटेल ने अपने अनुबंध वेल्डर श्रमिक अजय यादव को लिखित सूचना देकर उसे काम से बेदखल कर दिया है.नतीजा अनुबंध वेल्डर श्रमिक अजय यादव महिनों फर्म मालिक के कार्यालय मे चक्कर काट काट कर हैरान और परेशान है.यह घटना अक्टूबर 2025 की है. इस संदर्भ मे वरिष्ठ श्रमिक नेता भीमराव बाजनघाटे ने यादव को न्याय दिलाने के लिए कोराडी पावर प्लांट के मुख्य अभियंता सेक्शन इंचार्ज और श्रम कल्याण अधिकारी को ज्ञापन सौंपने वाले है.जिसमे अनुबंध श्रमिक अजय यादव को वापस काम पर लेने का प्रयास कर रहे हैं. जब तत्संबंधित अधिकारियों ने फर्म नियोक्ता श्री भरतभाई पटेल को श्रमिक यादव को वापस काम पर लेने की बात कही तो फर्म मालिक ने अधिकारियों के आदर्शों को ठुकरा दिया है. ठेकेदार का कहना है कि सर्व लेबर मगरा गए हैं. बराबर काम नहीं करते और उल्टा मुहजोरी करते हैं. जा जो बने सो कर ले.अनुबंध श्रमिक अजय यादव ने बताया है कि हम बडी ईमानदारी से अपने काम मे तटस्थ रहते हैं. अकारण काम से बेदखल कर देने से हमारे बालबच्चों को भूखे रहने का पारी आ चुकी है.

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श्रम कानून तज्ञ मजदूर नेता भीमराव बाजनघाटे का कहना है कि वे अपने स्वर्गीय मामा के अंतिम संस्कार में झांसी जाने पर ठेकेदार द्वारा श्रमिक को काम से बेदखल करना अनुचित और गैर-कानूनी है, विशेषकर यदि आपने पूर्व सूचना दी हो। भारत में लेबर कानूनों के तहत श्रमिकों को कुछ मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। वे जल्द ही श्रमायुक्त कार्यालय मे दोषी ठेकेदार के खिलाफ मामले की शिकायत दर्ज करवाने वाले हैं. चूंकि यह मााला’औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947′ या ‘अनुबंध श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970’ के तहत अनुचित श्रम प्रथा के अंतर्गत आता है।

लेबर कोर्ट या ट्रिब्यूनल: यदि शिकायत से काम नहीं बनता, तो लेबर कोर्ट में फर्म के खिलाफ अनुचित बर्खास्तगी का केस दायर किया जा सकता है। श्रम आयुक्त ठेका फर्म का मुख्य नियोक्ता को सूचित करगा कि उसे वापस काम पर लिया जाना चाहिए.श्रम कानून के मुताबिक फर्म ठेकेदार महानिर्मिती पावर प्लांट के ठेकेदारी कार्य कर रहा है, उन्हें इस बात की जानकारी देगा. कानून के अनुसार पावर प्लांट स्टेशन के मुख्य अभियंता शेक्शन इंचार्ज और श्रमिक कल्याण अधिकारी भी भी ठेकेदार के अनुबंध श्रमिकों की समस्याओं के लिए जिम्मेदार होता है। काम से निकालने का समय, ठेकेदार से हुई बातचीत या संदेश, और अंतिम संस्कार में जाने की सूचना का सबूत अनुबंध श्रमिक अजय यादव के पास सुरक्षित है.श्रम औद्योगिक विवाद अधिनियम कानूनी स्थिति के संबंध मे बतादें कि

संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत श्रमिक अपने रिश्तेदार का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करना एक मौलिक अधिकार माना जाता है।इस संदर्भ मै श्रमिकौं को शोक अवकाश का भी कानूनी प्रावधान है.इसे आकस्मिक अवकाश के रूप में मानवीय आधार पर स्वीकार किया जाना चाहिए।

बिना नोटिस के नौकरी से निकालना, विशेषकर वैध कारण (मौत) के लिए उचित नहीं है.

 

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

 

उपरोक्त लेख समाचार जन सामान्य ज्ञान पर अधारित सत्य और सही है.चूंकि

श्रम कानून के मुताबिक यदि वह मजदूर एक असंगठित क्षेत्र का श्रमिक हैं, तो वह ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना’ के माध्यम से भी सहायता प्राप्त कर सकता हैं।

वशर्ते उचित परामर्श और मार्गदर्शन के लिए है। किसी भी कानूनी कार्यवाही के लिए स्थानीय वकील या श्रम अधिकारी से सलाह लेना अनिवार्य है.

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