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व्हायरल न्यूज : बेट द्वारका के दो टापू पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने किया दावा, हाई कोर्ट ने कहा-कृष्णनगरी में कैसा हक?

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गुजरात में भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका स्थित बेट द्वारिका के दो टापू पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपना दावा जताया है। गुजरात उच्च न्यायालय ने इस पर आश्चर्य जताते हुए पूछा कि कृष्ण नगरी पर आप कैसे दावा कर सकते हैं। ‌गुजरात उच्च न्यायालय की न्यायाधीश संगीता विशेन की अदालत में एक ऐसा मामला पहुंचा, जिसे सुनकर वह खुद चौंक गई। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने देवभूमि द्वारका में स्थित बेट द्वारका के दो टापू पर अपना दावा जताया है। न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप कैसी बात कर रहे हैं। भगवान कृष्ण की नगरी पर आपका कैसे हक हो सकता है। न्यायाधीश ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया। बेट द्वारका में करीब आठ टापू है, जिनमें से दो पर भगवान कृष्ण के मंदिर बने हुए हैं। प्राचीन कहानियां बताती हैं कि भगवान कृष्ण की आराधना करते हुए मीरा यहीं पर उनकी मूर्ति में समा गई थी। बेट द्वारका के इन दो टापू पर करीब 7000 परिवार रहते हैं, इनमें से करीब 6000 परिवार मुस्लिम हैं। वक्फ बोर्ड इसी के आधार पर इन दो टापू पर अपना दावा जताता है, लेकिन अदालत में उसकी इस हरकत पर आश्चर्य जताते हुए उनके दावे को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका को संशोधित करके फिर से दायर करें।‌

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महाभारत के बाद समुद्र में विलीन हो गई थी द्वारकापुरी

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महाभारत के 36 साल बाद ही द्वारकापुरी समुद्र में विलीन हो गई थी। 9000 साल पुराना यह उत्कृष्ट नगर 4000 साल पहले समुद्र में समा गया था। पहले माना जा रहा था कि ईसा पूर्व भारत में उच्च कोटि की कोई सभ्यता नहीं रही होगी, लेकिन कार्बन डेटिंग से अब यह स्पष्ट हो गया कि द्वारका 9000 साल पुरानी नगरी है। हिमयुग के बाद जलस्तर 400 फीट बढ़ जाने से इस पौराणिक नगरी के समुद्र में डूबने की भी बात कही जाती है। माना जाता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने यहां 12 योजन भूमि पर नगर बसाया था। समुद्र की अनंत गहराई में डूबी द्वारका गोमती नदी (गुजरात) व अरब सागर के संगम पर बसी समृद्ध नगरी थी। समुद्र में विलीन हो जाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण बैकुंठधाम चले गए। वर्तमान की बेट द्वारका जहां स्थित है, उसी समुद्र के भाग में प्राचीन नगर बसा था।

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