जानिए हस्तरेखाओं मे छिपा है भाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली होने के संकेत
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
हस्त सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार मनुष्य के भाग्यशाली और दुर्भाग्यशाली होने के संकेत मिलते हैं.हस्तरेखा शास्त्र सामुद्रिक शास्त्र का एक अंग है। इसकी रचना सामुद्र ऋषि ने की थी, इसी कारण इसे सामुद्रिक शास्त्र कहा जाता है। इसके सिद्धांतों के आधार पर हाथों का सूक्ष्म रूप से अध्ययन कर के भविष्य बताया जाता है। हस्त रेखाएं कर्म के अनुसार शुक्लपक्ष और कृष्णपक्ष में बनती-बिगड़ती रहती हैं, लेकिन हाथों की बनावट में बदलाव नहीं आता है. हस्तरेखाओं की बनावट के आधार पर 7 तरह के हाथ होते हैं। निम्न श्रेणी का हाथ, वर्गाकार हाथ, चमसाकार हाथ, दार्शनिक हाथ, कलापूर्ण हाथ, आदर्श हाथ और मिश्रित हाथ की अलग पहचान होती हैं.
जानिए कैसी है आपके हाथ की बनावट और उसका फल –
1. – बेडौल बनावट वाला हाथ निकृष्ट माना गया है। यह जरूरत से ज्यादा छोटा, मोटा, भरा और भारी होता है। अंगूठा हाथ के सामान्य अनुपात में बहुत छोटा होता है। निकृष्ट हाथ वाले लोग अपने में ही गुम रहते हैं। ऐसे लोग अपनी बातें और भावनाएं किसी से शेयर नहीं करते और अपने ही मन की करते हैं। इन लोगों का दुनियादारी से बहुत कम वास्ता होता है और वे भोजन, वस्त्र और आवास तक ही सीमित रहते हैं।
2. – हस्त रेखा शास्त्र में समकोणिक अथवा चौकोर हाथ को वर्गाकार हाथ कहा जाता है। ऐसे हाथ को बहुत अच्छा माना गया है। जिन लोगों के हाथ इस आकार के होते हैं, वे दयालु, स्वच्छताप्रेमी, सत्यनिष्ठ, सच्चरित्र और स्वाभिमानी होते हैं। वे धीर, वीर और गंभीर होते हैं। ऐसे लोग बड़े काम करने वाले होते हैं और जीवन के एक विशेष पड़ाव बहुत नाम कमाते हैं।
3. – जिस हाथ में कलाई के पास वाला हथेली का हिस्सा अधिक चौड़ा होता है उसे चमसाकार हाथ कहते हैं। इस तरह के हाथ वाले लोग आदर्शवादी, कार्यकुशल और ख्यातिलब्ध होते हैं, लेकिन इनके कामों से किसी को फायदा नहीं मिलता और इन लोगों को भी किसी की मदद नहीं मिल पाती। ऐसे लोग खुद की मेहनत से आगे बढ़ते हैं और खुद के फायदे के लिए काम करते हैं।
4. – लंबा, गठीला किंतु बीच में कुछ झुका हुआ हाथ, जिसकी उंगलियों के जोड़ उभरे हुए और नाखून लंबे हों, ऐसा हाथ दार्शनिक हाथ कहलाता है। ऐसे हाथ वाले लोगों की विवेकशक्ति साधारण लोगों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है। ऐसे लोग बड़े काम करने वाले होते हैं। दार्शनिक हाथ वाले जिस जातक की उंगलियां दृढ़ या कसी हुई हों, वह अपनी रचनात्मकता से लोगों को प्रभावित करता है। ऐसे लोगों के मन की बात पता करना कठिन होता है।
5. – कलापूर्ण हाथ मामूली लंबाई-चौड़ाई वाला हाथ, जिसमें उंगलियों का ऊपरी हिस्सा पतला और निचला मोटा सा हो, कलाकार या व्यावसायिक हाथ की श्रेणी में आता है। ऐसे हाथ वाले लोग दूसरों की बातों में जल्दी आ जाते हैं। किसी भी काम को शुरू कर के उसे बीच में ही अधूरा छोड़ देना इनकी आदत होती है। ऐसे हाथ में यदि उंगलियां बड़ी या सख्त हों तो व्यक्ति कलात्मक कार्यों में माहिर होता है और व्यापारिक कारोबार से धन कमाता है। व्यापारी, गायक, चित्रकार, मूर्तिकार, कलाकार आदि के हाथ इस श्रेणी में आते हैं।
6. – नुकीली, पतली, नीचे हल्की और ऊपर भारी उंगलियों वाला मुलायम, चिकना तथा लंबा हाथ आदर्शवादी हाथ कहलाता है। जिनके हाथ इस आकार के होते हैं, वे सपनों की दुनिया में खोए रहने वाले होते हैं। ऐसे लोग मेहनत नहीं कर पाते हैं लेकिन बड़ी-बड़ी प्लानिंग बनाते हैं, लेकिन समय पर इनके साथ जो स्थिति बनती है उसके अनुसार ये लोग काम कर लेते हैं। ऐसे लोग किसी की भावनाएं आसानी से नहीं समझ पाते।
7. – मिश्रित लक्षणों वाले हाथ की कोई श्रेणी नहीं होती। इस हाथ की उंगलियों के लक्षण विभिन्न तथा मिश्रित होते हैं। कोई उंगली चमसाकार होती है तो कोई वर्गाकार, कोई नुकीली तो कोई दार्शनिक। मिश्रित हाथ वाले लोग कभी कुछ सोचते हैं और कभी कुछ। ऐसे लोगों के मन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। ये लोग कोई भी फैसला लेते समय डरे हुए या कन्फ्यूज रहते हैं
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