भाग्यशाली महिलाओं के शरीर में होते हैं एसे चिन्ह और निशान
भारतीय हस्तसामुद्रिक ज्योतिष विज्ञान के अनुसार
महिलाओं के शरीर पर कौन-से निशान होने पर वह भाग्यशाली समझी जाती है?
महिलाओं के शरीर पर पाए जाने वाले कुछ ऐसे निशान और चिन्ह जो उनको भाग्यशाली बनाते हैं और वह जिस घर में जाती है उसे स्वर्ग बना देती है ऐसा ज्योतिष शास्त्र ने भी माना है। सामुद्रिक शास्त्र ने भी खास निशानों वाली महिलाओं को भाग्यशाली माना है। जो इस प्रकार हैं:-
1. जिस महिला के तलवों के नीचे त्रिरकोण का निशान होता है वह बहुत बुद्धिमान और किसी भी कार्य को आसानी से करने में सक्षम होती है। ऐसी महिलाएं जीवन में कभी निराश नहीं होती। यह निशान बहुत कम महिलाओं में पाए जाते हैं।
2. अगर किसी महिला की नाभि के नीचे मस्सा हो तो वह भाग्यशाली समझी जाती है।
3. जिस महिला के माथे के बीच तिल होता है वह भाग्यशाली समझी जाती है और उसकी शादी किसी धनी व्यक्ति से होती है।
4. भौंहों के बीच मस्से या तिल का होना सौभाग्यशाली और समझदार महिलाओं की निशानी है। ऐसी महिलाएं अपने पति को खुश रखने में सहायक होती।
5. नाक के पास तिल का होना सौभाग्यशाली महिलाओं की ओर इशारा करता है।
6. जिस महिला की बाएं गाल पर तिल होता है, उसे जीवन में कभी भी कोई कमी नहीं आती।
7. जिस महिला के शरीर के बाएं हिस्से पर ज्यादा तिल या मस्से होते हैं, वह परिवार के लिए लकी साबित होती है।
औरतों की वह कौन सी 4 चीजें हैं जो औरतों में अगर पाई जाए तो वह भाग्यशाली कहलाती है?
मेरी समझ में तो मात्र नारी होना ही भाग्यशाली होना है क्योंकि शून्य से सृजन एवं सृजन से विनाश और विनाश से पुनः सृजन की यात्रा में परमात्मा के रथ की सारथी नारी ही तो होती है.
यदि शक्ति अर्थात नारी न होती तो कदाचित परमात्मा केवल मात्र पुरुष से ही सृष्टि का सृजन कभी भी न कर पाता, शायद यही बात जग जाहिर करने के लिए त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने सदैव अपने वामांग में नारी अर्थात शक्ति को स्थान दिया है.
जिसका अस्तित्व मात्र ही भाग्य का द्योतक है, उस नारी के बारे में यह कहना कि फलां फलां 4 बातें या चीज़ें उसमें हों तो वह भाग्यशाली होती है ऐसा है जैसे कोई साक्षात सूर्य से कहे कि अगर आपमें फलां फलां 4 दीयों जैसा प्रकाश हो तो आप भाग्यशाली कहलाएंगे.
फिर भी मात्र उत्तर देने के उद्देश्य से यदि केवल चार बातें ही लिखनी हैं तो मेरी दृष्टि में वो चार बातें यह हो सकती हैं :
ममता नारी का सबसे सहज गुण ममता है. अपनी सन्तान को जन्म देने के पश्चात् माता बनी नारी के स्तनों में स्वयं ही सन्तान की भूख मिटाने के लिए दूध उतर आता है. सन्तान के लिए ममता तो पिता के हृदय में भी होती है किन्तु सन्तान की भूख मिटाने की आलौकिक क्षमता तो केवल माता में ही प्रकट होती है. कभी कभार तो यह भी देखने में आता है कि अपनी सन्तान को दूध पिलाने वाली माता की उपस्थिति में यदि किसी अन्य माता की सन्तान भूख से रुदन कर रही होती है तो भी उसकी जन्मदात्री न होते हुए भी माता के स्तन ममतावश दूध के स्तनों से बाहर आने से भीग जाते हैं. क्या प्रकृति में ममता का इससे अच्छा उदाहरण कोई और हो सकता है?
प्रेम नारी प्रेम की देवी कहलाती है. उसका प्रेम कभी पुत्री बनकर प्रकट होता है तो कभी बहन बनकर. युवावस्था में उसका प्रेम प्रेयसी के रूप में प्रकट होकर पुरुष को पूर्णता प्रदान करता है. अपने जीवन में भिन्न भिन्न क्षेत्रों में कार्य करते हुए समाज में वह अपना प्रेम कभी अध्यापिका के रूप में तो कभी एक सहकर्मी के रूप में तो कभी चिकित्सक के रूप में प्रकट करती है. नारी के प्रेम की महानता का कहाँ तक बखान करूँ, नारी तो एक सैनिक के रूप में अपने जीवन का बलिदान देकर भी राष्ट्र के प्रति अपने प्रेम का इजहार करने से भी नहीं हिचकती.
सहनशीलता नारी का एक सहज गुण है सहनशीलता. कदाचित इसीलिए सबका भार सहन करने वाली पृथ्वी को हम पृथ्वी माता अर्थात नारी के रूप में मानते हैं पूजते हैं. किन्तु यह मानवता का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि नारी के इस महान गुण का पुरुष नाजायज़ फ़ायदा उठाते रहे हैं और जाने कब तक उठाते रहेंगे.
तरलता जल तरल पदार्थ है, उसे किसी भी अन्य तरल पदार्थ में मिला दें, वह उसके जैसा ही हो जाता है. नारी की भी यह बहुत महान विशेषता है कि उसे किसी के साथ जिस भी परिस्थिति में रखा जाए उसी परिस्थिति में ढल जाती है, शर्त मात्र इतनी होती है कि वो जिसके हिसाब से ढल रही है वह उसे अपने में घुल मिल जाने के लिए पर्याप्त प्रेम एवं आदर दे.
नारी के गुणों का बखान करने के लिए जितनी बुद्धि की आवश्यकता है उतनी तो मेरे पास नहीं है किंतु जो भी लिखा गया है उसे मैं संपूर्ण नारी जाति को समर्पित करता हूँ.
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार जिस स्त्री के दांत सुंदर, चमकीला, सफेद और आगे तरफ निकले हुए हों, ऐसी स्त्रियां बहुत ही भाग्यशाली होती हैं। कहा जाता है ऐसी स्त्रियां शाही जीवन जीती हैं। वहीं, किसी स्त्री के दांत बहुत पतले या फिर छोटे हों या होठ रुखे और फटे हुए हों तो यह शुभ नहीं माना जाता है।
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