नकली MARC बेयरिंग्स के उपयोग से खापरखेडा बिजली संयंत्र का उत्पादन ठप्प
नागपुर। महाराष्ट्र राज्य विधुत उत्पादन कंपनी मर्यादित अंतर्गत खापरखेडा थर्मल पावर प्लांट में असली देशी बेयरिंग्स की आड मे नकली विदेशी MARC बेयरिंग्स के उपयोग की वजह से बिजली उत्पादन ठप्प होने की समस्या बन रही है। इस तरह के मामलों में भारी चलित मशीनों में नकली पुर्जों के कारण अचानक खराबी (ब्रेकडाउन) आ जाती है, जिससे बिजली उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होता है।
MSPGCL के तकनीकि सूत्रों के मुताबिक MARC बेयरिंग्स गत 2025 -2026 के पूर्व महाराष्ट्र राज्य विधुत उत्पादन कंपनी मर्यादित के अस्तित्व मे नहीं था.और इस MARC बेयरिंग्स को देश के किसी भी तापीय विधुत केंद्रों तथा NTPC के अस्तित्व मे नहीं है.तकनीशियनो के अनुसार गत 2025 मे MSPGCL के तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर श्री अनबलगम ने उक्त बेयरिंग्स पर्चेजिंग के पूर्व गुणवत्ता की जांच परिक्षण नहीं करवाया.और मुंह मागी घूस लेदेकर महानिर्मिती की अनुसूचि ग्रुप E- F मे शामिल कर दिया है. महानिर्मिती के जिन जिन पावर प्लांटों मे MARC बेयरिंग्स पर्चेजिंग किया है.इन नकली और घटिया बेयरिंग्स MARC के उपयोग की वजह से अचानक पावर प्लांट बारंबार बंद पडने की स्थिति मे आ गए है. बताते है कि इस तरह के बेयरिंग्स पर्चेजिंग करके लाखों रुपए की घूस लेदेकर खापरखेडा के मुख्य अभियंता कुमारवार पदोन्नत होकर विधुत मुख्यालय मे संचालक पद पर आशीन है. घटिया और नकली बेयरिंग्स के संदर्भ में महाराष्ट्र राज्य के पावर प्लांटों की यह समस्या क्यों और कैसे होती है, इसकी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है .चायना निर्मित बेयरिंग्स मे भारतीय MARC बेयरिंग्स की मुहर लगाकर महाराष्ट्र के पावर प्लांट मे आपूर्ति किया जा रहा है.जिसे लेकर चंद्रपुर भुसावल और खापरखेडा पावर प्लांट मे बारंबार खराबी आ रही है.रिकार्ड मे MARC बेयरिंग्स का कारखाना गुजरात के वेरावल मे दर्शाया गया है.और इस MARC बेयरिंग्स कारखाना में लघु औद्योगिक के लिए विधुत मोटर और आटोमोबाइल के लिए उपयोगी बेयरिंग्स का निर्माण होता है. यह MARC बेयरिंग भारी ऊर्जा औधोगिक ईकाईयों के लिए नहीं है.सस्ते और निकृष्ट दर्जे के MARC नकली बेयरिंग्स के उपयोग का प्रभाव से पावर प्लांट की भारी मशीनों में रुकावटें आती रहती हैं. भारी मशीनरियों का भार यह बेयरिंग्स सहन नहीं कर पाते हैं.असली बेयरिंग्स थर्मल पावर प्लांट के कोयला मिल और टर्बाइन जैसे मुख्य हिस्सों में लगते हैं। जिसमें नकली पुर्जे अत्यधिक दबाव और तापमान नहीं झेल पाते है. इससे बिजली उत्पादन ठप्प होना स्वाभाविक है.कल पुर्जों के टूटने या जाम होने से सुरक्षा कारणों से पूरी यूनिट को आपातकालीन स्थिति में बंद करना पड़ता है, जिससे मेगावाट (MW) उत्पादन रुक जाता है। बिजली उत्पादन ठप्प होने से राज्य में बिजली की किल्लत और महाजेनको (MAHAGENCO) को बड़ा राजस्व नुकसान उठाना पड़ता है।
असली और नकली बेयरिंग की पहचान जानने के लिए MARC बेयरिंग्स की जांच-परीक्षण किए बिना महनिर्मिति की अनुसूचि ग्रुप मे कैसे शामिल कर लिया गया है. यह भी संपूर्ण जांच और कार्यवाई का विषय बना हुआ है.
पावर प्लांट और औद्योगिक इकाइयों में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए विशेषज्ञ कुछ विशेष तरीकों से जांच की सलाह देते हैं.पैकेजिंग और लोगो नकली बेयरिंग की पैकेजिंग और प्रिंटिंग धुंधली होती है। असली प्रोडक्ट पर लोगो और लेबल बहुत स्पष्ट होते हैं।
क्यूआर कोड (QR Code): कई बड़ी बेयरिंग निर्माता कंपनियां अपने बॉक्स पर क्यूआर कोड देती हैं। आप निर्माता के ऑथेंटिकेटर ऐप के जरिए इसे स्कैन करके प्रामाणिकता जांच सकते हैं।
मटेरियल की गुणवत्ता परीक्षण असली बेयरिंग उच्च श्रेणी के एलॉय से बने होते हैं, जबकि नकली कमजोर धातुओं से बने होते हैं।
खापरखेडा संयंत्र में नकली पुर्जों के उपयोग से संबंधित अधिक जानकारी या किसी विशिष्ट समस्या के समाधान के लिए क्या आप जानना चाहते हैं.इस मामले में MAHAGENCO द्वारा की गई आधिकारिक जांच और कार्रवाई? औद्योगिक इकाइयों में नकली पार्ट्स की आपूर्ति श्रृंखला पर अंकुश कैसे लगाया जा सकता है?
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