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कोराडी के महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान मे गुप्त नवरात्रि की अष्टमी हवन यज्ञ पूर्णाहूति संपन्न

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कोराडी। गुप्त नवरात्र अष्टमी तिथि 26 जून को रात 8 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 27 जून को देर रात 02 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। अतः सोमवार 26 जून को दुर्गा अष्टमी मनाई गई। गुप्त नवरात्रि के दौरान जगत जननी मां भगवती महालक्ष्मी दुर्गा की पूजा निशिता काल में की जाती है हर वर्ष आषाढ़ माह की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तक गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन जगत जननी आदि शक्ति मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की गई। साथ ही साधक विशेष कार्य में सिद्धि प्राप्ति हेतु मां दुर्गा के निमित्त व्रत- उपवास रखते हैं। धर्म शास्त्रों में जगत जननी मां दुर्गा को कल्याणकारी, भवानी, अन्नपूर्णा, परमेश्वरी, परम सनातनी, भगवती, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति नामों से संबोधित किया गया है। धार्मिक मान्यता है कि ममतामयी मां दुर्गा अपने भक्तों के सब दुख हर लेती हैं। साथ ही भक्तों को सुख, समृद्धि, शांति और धन प्रदान करती हैं। वहीं, दुष्टों का संहार करती हैं। अगर आप भी आदिशक्ति मां दुर्गा का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो दुर्गाष्टमी पर विधि विधान से देवी मां की पूजा-उपासना करें। आइए, पूजा का शुभ मुहूर्त, तिथि और पूजा विधि जानते हैं-
पूजा की कार्रवाई जगदंबा संस्थान के विद्धान पुजारी आचार्य श्री प्रमोद फूलझेले शास्त्री,श्री रामदास फूलझेले महाराज, श्री अनूप शास्त्री,श्री राहुल शास्त्री,अभिषेक फूलझेले महाराज,श्री ऋषिकेश फूलझेले महाराज, श्री प्रथमेश फूलझेले महाराज,इत्यादि ने विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार द्धारा सम्पन्न कराया गया।

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पूजा हवन याज्ञ का शुभ मुहूर्त

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हिन्दू पंचांग के अनुसारमकोराडी के श्री महालक्ष्मी जगदंबा संंस्थान में अष्टमी तिथि 26 जून को सुबह 8 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 27 जून को देर रात 02 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। अतः आज 26 जून को दुर्गा अष्टमी है। गुप्त नवरात्रि के दौरान जगत जननी मां दुर्गा की पूजा निशिता काल में की जाती है। अतः साधक सिद्धि प्राप्ति हेतु मध्य रात्रि में देवी मां की पूजा करते हैं। सामान्य साधक स्नान-ध्यान के पश्चात मां दुर्गा की पूजा-उपासना कर सकते हैं।
संस्थान के पुजारियों ने गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन ब्रह्म बेला में उठकर सबसे पहले जगत जननी जगदंबा का अभिषेक के पश्चात, स्वस्तिवाचन आरती क्षमा प्रार्थना पुष्पांजलि प्रदीक्षणा किया गया। सर्वप्रथम आचमन कर व्रत संकल्प लिया। अब भगवान भास्कर को जल का अर्घ्य दिया गया। इसके पश्चात, पूजा गृह में गंगाजल छिड़ककर निम्न मंत्रों से मां दुर्गा का आह्वान कियाा गया-

– ॐ सर्वस्वरूपे सर्वेसे सर्वशक्ति समन्विते भये
भयस्त्रही नौ देवी दुर्गे देवि नमोस्तुते
– या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

तदोउपरांत, पंचोपचार कर मां दुर्गा की पूजा लाल रंग के फल और फूल, धूप दीप, तिल, जौ, अक्षत, दूर्वा, कुमकुम आदि से की गई। इस समय दुर्गा चालीसा, दुर्गा कवच, दुर्गा सप्तशती और दुर्गा स्तुति का पाठ तथा अंत में आरती-अर्चना कर सुख, समृद्धि, शांति और धन प्राप्ति की कामना की। मनोकामना पूर्ति हेतु दिनभर उपवास रखा गया। शाम में आरती-अर्चना कर फलाहार अर्पित किया गया। अगले दिन पूजा पाठ संपन्न कर व्रत खोला गया। जगदंबा संस्थान के सभी पदाधिकारियों तथा ट्रस्टियों आयोजन के सफलतार्थ अथक प्रयास किया

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