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न्यायाधीशों की नियुक्तिया रुकवाने लगी पूरी लॉबी? PM ने रोकी थी फाइल!

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न्यायाधीशों की नियुक्तिया रुकवाने लगी पूरी लॉबी? PM ने रोकी थी फाइल!

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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नई दिल्ली। किस जज की नियुक्ति रुकवाने को लग गई पूरी लॉबी? PM ने रोकी थी फाइल, पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने खोली दी थी तत्कालीन कांग्रेस सरकार की पोल खोल दी है।

पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ के मुताबिक जिस तरीके से किसी कैंडिडेट के पक्ष में लॉबी काम करती है, ठीक उसी तरह रिवर्स लॉबी भी काम करती है. नियुक्ति रुकवाने के लिए पूरी ताकत झोंक देते हैं.

न्यायपालिका में जोड़-तोड़ और लॉबिंग नई बात नहीं है. नियुक्ति से लेकर किसी जज का अप्वाइंटमेंट रुकवाने तक जोड़-तोड़ और लॉबिंग होती है. यह सिलसिला बदस्तूर जारी है. बॉम्बे हाईकोर्ट के एडवोकेट अभिनव चंद्रचूड़ ने अपनी किताने में हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में जोड़-तोड़ के तमाम किस्सों को दर्ज किया है. उन्होंने अपनी किताब में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया वाईवी चंद्रचूड़ का भी हवाला दिया है, जिन्होंने खुद स्वीकार किया था कि किस तरीके से लॉबिंग होती है.

 

किस जज के पीछे पड़ गई थी लॉबी?

अभिनव चंद्रचूड़ ने अपनी किताब में जोड़-तोड़ से जज बने लोगों का उदाहरण तो दिया ही है. ऐसी जजों का भी उदाहरण दिया है जिनकी नियुक्ति लॉबिंग के चलते रुक गई. ऐसा ही एक उदाहरण जस्टिस पीबी सावंत का है. साल 1986 में जस्टिस पीबी सावंत को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की चर्चा चली. उन दिनों वह बॉम्बे हाई कोर्ट के जज हुआ करते थे. जैसे ही उनके साथी जजों को इसकी भनक लगी, उनकी नियुक्ति रुकवाने के लिए पूरी लॉबी लग गई. अभिनव चंद्रचूड़ लिखते हैं कि जस्टिस सावंत बॉम्बे हाई कोर्ट में सीनियॉरिटी के क्रम में आठवें नंबर पर थे. उनकी हाई कोर्ट के एक दूसरे जज जस्टिस लेंटिन से अदावत थी. दोनों साल 1973 में एक दिन आगे पीछे हाईकोर्ट में नियुक्त हुए थे.

 

क्यों रुकवाना चाहते थे नियुक्ति?

जस्टिस लेंटिन को सिविल कोर्ट से प्रमोट कर हाई कोर्ट का जज बनाया गया था, जबकि सावंत की नियुक्ति बार से हुई थी. उन दिनों परंपरा यह थी कि अगर एक ही दिन किसी शख़्स की बार से नियुक्ति हुई है और दूसरा जज लोअर कोर्ट से हाई कोर्ट में आया है तो बार वाले जज को सीनियर माना जाएगा. लेकिन जस्टिस लेंटिन को सावंत से एक दिन पहले शपथ दिला दी गई. इस तरह वह सीनियर हो गए. अब चूंकि जस्टिस पीबी सावंत की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में हो रही थी, ऐसे में वो सीनियॉरिटी के क्रम में जस्टिस लेंटिन को पीछे छोड़ देते.

CJI चंद्रूचड़ ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसा क्या किया, जो लोगों ने ट्रोल कर दिया था? CJI चंद्रचूड़ ने सोशल मीड‍िया, वकील, जज और न्‍याय को लेकर बड़ी बात कही है। CJI चंद्रचूड़ पहुंचे वैदिक विश्वविद्यालय, फिर किसके संरक्षण का मुद्दा उठाया मुद्दा?

 

CJI को चाय पर बुला हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने दिया ऐसा ऑफर, फौरन भांप गए इरादा; कह दिया था ना । अभिनव चंद्रचूड़ लिखते हैं कि मार्च 1986 में तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पीएन भगवती ने जस्टिस पीबी सावंत को कहा कि 6 मार्च की रात उनके नाम पर मुहर लग जाएगी और 10 मार्च 1986 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज की शपथ दिला दी जाएगी. जस्टिस सावंत का मदुरई में एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम था. सीजेआई भगवती के कहने पर उन्होंने उस कार्यक्रम को कैंसिल कर दिया और मुख्य न्यायाधीश द्वारा बताई गए तारीख पर शपथ लेने दिल्ली आ गए.

 

राजीव गांधी ने रोक दी थी फाइल

 

10 मार्च को उलटफेर हो गया. सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए जो लिस्ट आई, उसमें पीबी सावंत का नाम था ही नहीं. सूची में जस्टिस एमएम दत्त, जस्टिस के एन सिंह और जस्टिस एस. नटराजन का नाम था और उन्होंने शपथ भी ले ली. सीजेआई भगवती ने बाद में जस्टिस सावंत को बताया कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनके नाम को मंजूर ही नहीं किया. प्रधानमंत्री ने उनसे फोन कर कहा कि कुछ कारणों से सिर्फ एक महीने के लिए उनका (जस्टिस सावंत) का नाम रोका जा रहा है. एक महीने बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया जाएगा

हालांकि ऐसा हो नहीं सका. जस्टिस भगवती अपने कार्यकाल में जस्टिस सावंत को सुप्रीम कोर्ट में नहीं ला सके और उनका नाम लटकता रहा. अक्टूबर 1989 में जाकर वह सुप्रीम कोर्ट के जज बन पाए. एक और मशहूर उदाहरण जस्टिस एनपी सिंह का है, जो पटना हाई कोर्ट के जज हुआ करते थे. अभिनव चंद्रचूड़ लिखते हैं कि अगर सारे नियमों का पालन होता तो जस्टिस एनपी सिंह 1980 के दशक में ही सुप्रीम कोर्ट में आ जाते, लेकिन उनकी नियुक्ति रुकवाने के लिए पूरी की पूरी लॉबी लग गई और 1992 में जाकर सुप्रीम कोर्ट में आ पाए.

 

पूर्व CJI ने क्या बताया था?

भारत के 16वें मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ (YV Chandrachud) ने भी न्यायपालिका में लॉबिंग की बात स्वीकार की थी. उन्होंने कहा था कि जिस तरीके से किसी कैंडिडेट के पक्ष में लॉबी काम करती है, ठीक उसी तरह रिवर्स लॉबी भी काम करती है. अभिनव चंद्रचूड़ अपनी किताब में पूर्व सीजेआई वाईवी चंद्रचूड़ के हवाले से लिखते हैं, ‘जैसे ही सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए किसी शख़्स के नाम पर चर्चा शुरू होती है, उसकी विपक्षी लॉबी नियुक्ति रुकवाने के लिए लग जाती है. पूरी ताकत झोंक देती है

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