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अरबों-खरबों के कर्ज में डूबा कंगाल पाकिस्तान जल्द चीन के कब्जे मे

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अरबों-खरबों के कर्ज में डूबा कंगाल पाकिस्तान जल्द चीन के कब्जे मे

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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नई दिल्ली। भारत का पडोसी दुश्मन मुल्क पाकिस्तान वह दिन दूर नहीं जब चायना (ड्रेगन) के कब्जे मे होने वाला है.दरअसल मे में चीन ने पाकिस्तान को अरबों-खरबों करोड रुपए लोन दे रखा है. सुनिश्चित हो गया है. दरअसल में चीन ने पूरे पाकिस्तान की बेरोजगारी दूर करने के लिए अरबों- खरबों डॉलर की भारी धनराशि निवेश की है, मुख्य रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना के तहत. यह निवेश सड़कों, रेलवे, सीमेंट उद्योग, पावर प्लांट, सुगर फैक्टरी और पाइपलाइनों के नेटवर्क के निर्माण पर केंद्रित है, जो दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सहयोग है. 2020 तक, सीपीईसी परियोजनाओं का मूल्य 46 अरब डॉलर से बढ़कर 62 अरब डॉलर हो गया था, और 2022 तक यह 65 अरब डॉलर तक पहुंच गया हैं? जानकार सूत्रों के मुताबिक चीन ने इन औधोगों के माध्यम से 60% बेरोजगार पाकिस्तानियों को धंधा रोजगार उपलब्ध कराया है.शेष 40% प्रतिशत पाकिस्तानी मध्यमवर्गीय और धनाढ्य स्वयं निर्भर हैं?

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जो चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए बनाई गई है. यह गलियारा पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन के झिनजियांग क्षेत्र से जोड़ता है, जिससे चीन को मध्य पूर्व और अफ्रीका तक पहुंच मिलती है.

सीपीईसी में निवेश में शामिल हैं: सड़क और रेलवे नेटवर्क का निर्माण, ऊर्जा परियोजनाओं का विकास, औद्योगिक पार्कों की स्थापना, संचार नेटवर्क का विस्तार.

सीपीईसी परियोजना पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश में बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगी. हालांकि, कुछ चिंताएं भी हैं, जैसे कि पाकिस्तान पर बढ़ते ऋण का बोझ और परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभाव पड रहा है.

यानी कुल मिलाकर चीन- पाकिस्तान आर्थिक गलियारा एक महत्वपूर्ण परियोजना है जो दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगी.

चीन के उद्योग पाकिस्तान में CPEC (China-Pakistan Economic Corridor) के माध्यम से महत्वपूर्ण रूप से फैले हुए हैं। चीन ने पाकिस्तान में कई क्षेत्रों में निवेश किया है, जिसमें ऊर्जा, परिवहन, बुनियादी ढांचा और विनिर्माण शामिल हैं। इसके अलावा, चीन पाकिस्तान से गधों का मांस, कपड़े, और अन्य सामानों का आयात भी करता है।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC):

CPEC एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है।

यह गलियारा पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से चीन के शिनजियांग प्रांत तक फैला हुआ है, और इसमें सड़कों, रेलवे, ऊर्जा परियोजनाओं और औद्योगिक क्षेत्रों का विकास शामिल है।

CPEC के तहत, चीन ने पाकिस्तान में कई ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश किया है, जिसमें कोयला, जलविद्युत और पवन ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं।

चीन ने पाकिस्तान में परिवहन क्षेत्र में भी निवेश किया है, जिसमें सड़कों, रेलवे और बंदरगाहों का विकास शामिल है। CPEC के तहत, चीन ने पाकिस्तान में कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी निवेश किया है, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, और रसायन उद्योग शामिल हैं।

अन्य निवेश: चीन ने पाकिस्तान में अन्य क्षेत्रों में भी निवेश किया है, जैसे कि मोबाइल फोन, कंप्यूटर, और औद्योगिक उपकरण।

पाकिस्तान चीन से सस्ते कपड़े, धागे और कपड़ा मशीनरी का आयात भी करता है।

चीन पाकिस्तान से गधों का मांस भी आयात करता है, जिसका उपयोग पारंपरिक चीनी दवाइयों में किया जाता है।

चीन की मांग के कारण, पाकिस्तान में गधों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं।

निष्कर्ष: चीन का पाकिस्तान में आर्थिक प्रभाव महत्वपूर्ण है, और CPEC के माध्यम से यह प्रभाव और भी बढ़ रहा है। चीन पाकिस्तान में एक महत्वपूर्ण निवेशक और व्यापारिक भागीदार है, और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भविष्य में और भी मजबूत होने की संभावना है।

इस वीडियो में, पाकिस्तान और चीन के बीच व्यापार और निवेश संबंधों के बारे में बताया गया है:

चीन में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के लोगों में अधिकतर अस्थायी निवासी हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय छात्र और सीमा पार के व्यापारी शामिल हैं। वे उत्तर-पश्चिमी चीन के झिंजियांग स्वायत्त क्षेत्र में केंद्रित हैं।

(क) से (ग) चीन ने पिछले छह दशकों से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है। इसके अलावा, 1963 में हस्ताक्षरित तथाकथित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा समझौते’ के तहत पाकिस्तान ने अवैध रूप से 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र लद्दाख को सौंप दिया है।

देश पूर्वी तुर्किस्तान, तिब्बत, इनर मंगोलिया या दक्षिणी मंगोलिया, ताइवान, हॉन्गकॉन्ग और मकाउ देखे ही होंगे। ये वो देश हैं, जिन पर चीन ने कब्जा कर रखा है या इन्हें अपना हिस्सा बताता है। इन सभी देशों का कुल एरिया 41 लाख 13 हजार 709 वर्ग किमी से ज्यादा है।

पाकिस्तान की आर्थिक संकट से जूझने में मदद के लिए चीन ने 3.7 अरब डॉलर का ऋण देने का आश्वासन दिया है। यह ऋण चीनी मुद्रा में होगा जिससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिलेगा। चीन ने यह फैसला हाल की बैठकों में लिया जिसका उद्देश्य मार्च 2025 तक परिपक्व होने वाले ऋणों का पुनर्वित्त करना है। (ख) 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत, पाकिस्तान ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र चीन को सौंप दिया।

नतीजा पाकिस्तान को बचाने के लिए रहा चीन अथक प्रयास मे जुटा हुआ है.भले ही बीते पांच सालों में पाकिस्तान की सरजमीं चीनी नागरिकों का काल बन रही है. मार्च 2024 में शांगला में एक सुसाइड बॉम्बर ने चीनी इंजीनियरों को ले जा रही गाड़ियों के काफिले को निशाना बनाया था, उस हमले में 5 चीनी नागरिकों और 1 PAK ड्राइवर की मौत हो गई थी.

भारत, द्वारा सिंधु जल समझौता (IWT) रद्द करने के बाद पाकिस्तान में दिखावा के लिए हाहाकार मचा है. चीन अपना हित साधने और पाकिस्तान को बचाने की नीयत से खैबर पख्तूनख्वा (KP) में बांध बनाने का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहा है. भौगोलिक परिस्थितियों के हवाले से सवाल उठ रहा है कि क्या टीटीपी (TTP) द्वारा बीते कुछ महीनों में किए गए हमलों को देखते हुए पाकिस्तान चीन के मजदूरों और इंजीनियरों की सुरक्षा की गारंटी दे पाएगा? पाकिस्तानी चीख-चीख कर कह रहे हैं कि इंडिया ने उनके ऊपर वाटर बम (Water Bomb) मार दिया है. पाकिस्तान, सऊदी अरब से सुलह के लिए गिड़गिड़ा रहे

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भारत की वो बंकर बस्टर मिसाइल, जो 100 मीटर नीचे तक के ठिकाने को कर सकती है.गत 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि निलंबित करने का ऐलान किया.परंतु पाकिस्तान अपने आकार चीन के सहयोग से पाकिस्तान के कब्जे वाली सिंधु नदी के भीतर 100 फिट भूमिगत सुरंग की खुदाई करके लाखों- करोडों घन मीटर पानी उपलब्ध कराने वाला है.परिणाम स्वरुप

चीनी कंपनी चाइना एनर्जी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन ने खैबर पख्तुनवा में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं.

मल्टी ऑपरेशनल डैम प्रोजेक्ट से पाकिस्तान में बिजली प्रोडक्शन बढ़ेगा. इस बांध का काम पूरा होने से चीन में सिंचाई और शहरी जल आपूर्ति की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकती हैं. भारत से बुरी तरह पिटने के बाद चीन ने पाकिस्तान के पक्ष में होने का ऐलान किया था.

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) प्रोजेक्ट पूरा होने देगा तहरीक- ए-तालिबान पाकिस्तान, पाकिस्तान की सरकार का धुर विरोधी है. टीटीपी को PAK फौज या पुलिस की जरा भी परवाह भी नहीं है. उनका अलग टशन है. वो जब चाहते हैं पाकिस्तानी फौजियों को पटककर मारते हैं.

वर्ल्ड बैंक द्रारा समर्थित सिंधु समझौते को निलंबित करने के भारत के फैसले का मतलब था कि पश्चिमी नदियों और उनकी सहायक नदियों से जल प्रवाह को भारत द्वारा जहां भी संभव हो, बाधित किया जाना.

भारत के इस कदम से इस बार फिलहाल भीषण गर्मी के सीजन में पाकिस्तान में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है. सिंधु संधि के निलंबन से पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र, खासकर पंजाब और सिंध जैसे क्षेत्रों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है, जो अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर हैं.

खैबर पख्तूनख्वा में स्वात नदी पर मोहमंद जलविद्युत परियोजना का काम पूरा हो जाने पर, 800 मेगावाट के इस संयंत्र से बिजली पैदा होने के साथ पेशावर को रोजाना 1.13 बिलियन लीटर पीने का पानी मिलने की उम्मीद है. इस परियोजना का उद्देश्य पाकिस्तान की जल सुरक्षा को मजबूत करना और बाढ़ और बिजली की कमी से अक्सर प्रभावित होने वाले क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करना है.

खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय टीटीपी न केवल पाकिस्तानी फौज और पाकिस्तान रेंजर्स और अन्य सुरक्षा बलों को मारता है बल्कि पाकिस्तान में चीनी हितों को भी जमकर निशाना बनाता है. ये एक ऐसा मुद्दा जिसे चीन ने पाकिस्तान के सामने सैकड़ों बार उठाया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में फिलहाल 20,000 चीनी नागरिक हैं और उनमें से अधिकांश सी-पैक (CPEC) प्रोजेक्ट में लगे हुए हैं.

टीटीपी का गठन 2007 में पाकिस्तानी सेना से लड़ने के लिए किया गया था. यह संगठन अफगानिस्तान तालिबान का वैचारिक समर्थक है. अफगान तालिबान द्वारा 2021 में काबुल पर नियंत्रण करके सरकार बनाने के बाद इसने खैबर पख्तूनख्वा में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है. पिछले साल पाकिस्तान में एक दशक में सबसे अधिक आतंकवादी हमले हुए, जिनमें से अधिकांश टीटीपी और उसके संबद्ध समूहों द्वारा किए गए थे.

पाकिस्तान में चीनी नागरिक बलूच अलगाववादियों/बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के निशाने पर हैं, टीटीपी चीन के लिए दूसरा बड़ा खतरा है. बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) CPEC के विरोध में है. टीटीपी पाकिस्तान को एक ‘काफिर’ स्टेट के रूप में देखता है और उसके सहयोगियों के खिलाफ युद्ध छेड़ना चाहता है. वहीं चीनी डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन के लोगों के खिलाफ टीटीपी की दुश्मनी शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के दामन से भी जुड़ी है.

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