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ट्रंप को सुंअर मांस बेहद पसंद : आसिम मुनीर को लंच में क्या खिलाया?

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ट्रंप को सुंअर मांस बेहद पसंद : आसिम मुनीर को लंच में क्या खिलाया?

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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नई दिल्ली। पडोसी दुश्मन मुल्क पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने डोनाल्ड ट्रंप की लंच पार्टी मे खाया क्या यह जानकर दुनिया चौंक रही हैं? बताते हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुंअर मांस बेहद पसंद है?दरअसल में अमेरिका किसी से फूकट दोस्ती नहीं करता और फूकट मे किसी को खिलाता भी नहीं है? विशेषज्ञों की माने तो अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच अमन शांति नहीं चाहता अपितु सदैव भारत पाकिस्तान के बीच फूट डालने का प्रयास करता है.अमेरिका ने कभी भी किसी का भला नहीं किया है. अब देखिए ना अमेरिका ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर को पता नहीं क्या खिलाया परंतु पाकिस्तान का धर्म नष्ट करके नापाक कर दिया? पूरी दुनियाभर मे कोई कहता है कि अमेरिका ने फील्ड मार्शल असीम मुनीर को शुद्ध शाकाहारी भोजन कराया होगा तो कोई कहता है कि उन्हें मांसाहारी खाना खिलाया होगा?लेकिन लोग यह बताने को झिझक रहे हैं कि अमेरिका ने फील्ड मार्शल असीम मुनीर को किस जानवर के मांस से बने चिकन य मटन खिलाया होगा? बिषय संदेहास्पद बना हुआ है. हालकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की राजनीति मे सबकुछ जायज है और नाजायज कुछ भी नहीं है?

विशेषज्ञों के अनुसार कोई बात अमेरिका और पाकिस्तान के बीच की राजनीति मे सब जायज है या नहीं?ज्ञातव्य है कि चीन का मंत्रीमंडल को भी सुंअर मांस बेहद अहम पसंद रहता है? हालकि पाकिस्तान सरकार के चीन सरकार से मधुर संबंध हैं. के चलते उन दोनो देशों का एक दूसरे के मुल्क में आना जाना लगा ही रहता है.बताते हैं कि चायना भी अपने महमानों को सुंअर मांस, कुत्ते का मांस और अन्य जीव जन्तुओं के मांस से बने व्यंजन परोसता हैं! अब जिसे खाना हो तो खाए या ना खाए मेहमान की मर्जी पर निर्भर करता है.अमेरिका और चायना चाहते तो अपने पाकिस्‍तानी मेहमानों को सुंअर मांस और कुत्ते को छोडकर बकरा के मांस से बने खाना खिला सकते थे. वन्य जीव विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार सुंअर मे मनुष्य से 1000 गुना अधिक सेक्स पावर विधमान रहता है?इसलिए तो सुंअर एक मर्तबा मे 10 से 15 शावकों को जन्म देता है. इसी प्रकार कुत्ता में भी मनुष्य से 50 गुणा अधिक पावर होता है? दरअसल में डोनाल्ड ट्रंप की लंच पार्टी के संबंध में फाइनेंस एक्सपर्ट अक्षत श्रीवास्तव ने चेतावनी दी है कि अमेरिका का कर्ज संकट पाकिस्तान को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने बताया कि डॉलर में लिया गया कर्ज कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को कैसे प्रभावित करता है। पाकिस्तान जैसे देश कर्ज चुकाने में आनाकानी कर रहा हैं और अमीर लोग स्थिर अर्थव्यवस्थाओं में जा रहे हैं।

फाइनेंस एक्सपर्ट अक्षत श्रीवास्तव ने विगत सोमवार को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का कर्ज संकट पाकिस्तान को वाशिंगटन से ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा। अक्षत श्रीवास्तव इन्वेस्टमेंट एजुकेशन प्लेटफॉर्म विजडम हैच के फाउंडर हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया कि क्यों पाकिस्तान जैसे देश ग्लोबल कर्ज के खतरे में हैं। अमेरिका के मुकाबले पाकिस्तान को ज्यादा र‍िस्‍क है।

अक्षत ने डिटेल में समझाया कि कैसे डॉलर में लिया गया कर्ज कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, ‘जब अमेरिका के कर्ज का बुलबुला फटेगा तो यह पाकिस्तान को अमेरिका से ज्यादा भुगतना पडेगा.

फाइनेंश‍ियल एक्‍सपर्ट

अक्षत ने जोर देकर कहा कि दुनिया का ज्यादातर कर्ज अमेरिकी डॉलर में है। अमेरिका खुद इस करेंसी को कंट्रोल करता है। इसलिए, वह अनलिमिटेड डॉलर छाप सकता है। डॉलर छापना अमेरिका के लिए ‘इंटरनल’ कर्ज है। अमेरिका अपने कर्ज को अपनी शर्तों पर रिफाइनेंस कर सकता है। ज्यादातर देशों के पास यह ऑप्शन नहीं है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान जैसे देश डॉलर नहीं छाप सकते। पाकिस्तान का बड़ा कर्ज डॉलर में है। अगर पाकिस्तान उस कर्ज को चुकाने में चूक करता है तो कर्जदाता वसूलने आएंगे। अक्षत ने कहा, ‘इसलिए हमने समय-समय पर पाकिस्तान को IMF के सामने कर्ज पुनर्गठन के लिए भीख मांगते देखा है। क्यों? क्योंकि अमेरिका के उलट पाकिस्तान वास्तव में अपनी शर्तों पर अपने कर्ज को रिफाइनेंस नहीं कर सकता है।’

दुन‍िया पर कैसे कर्ज चढ़ाता है अमेर‍िका?

अक्षत श्रीवास्तव के अनुसार, यह समस्या स्ट्रक्चरल है और यह सिर्फ पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैक्रो नजरिए से देखें तो अमेरिका जितना ज्यादा पैसा छापता है (यानी जितना ज्यादा कर्ज लेता है), दुनिया पर उतना ही ज्यादा कर्ज बढ़ता है (सिर्फ अमेरिका पर नहीं)। इसके चलते निवेशक अपना पैसा सुरक्षित जगहों पर रखना चाहते हैं। वे अपनी संपत्ति को ज्यादा स्थिर अर्थव्यवस्थाओं में ले जाते हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘पाकिस्तान जैसे देशों से पैसा अमेरिका, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में जाता है। अमेरिका, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड दुनिया की कुछ स्थिर अर्थव्यवस्थाएं हैं। दुनिया पर कर्ज बढ़ने से इन अर्थव्यवस्थाओं को बाकी देशों के मुकाबले कम नुकसान होता है।’

कर्ज के बुलबुले पर है दबाव

अक्षत ने बताया कि कर्ज का बुलबुला पहले से ही दबाव में है। उन्‍होंने कहा, ‘तो कर्ज का बुलबुला कैसे फूटेगा? यह पहले से ही फूट रहा है। हम देख रहे हैं कि पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देश अपने कर्ज को चुकाने में चूक कर रहे हैं। वहीं, इन देशों के अमीर लोग ज्यादा स्थिर अर्थव्यवस्थाओं में जा रहे हैं।’

उनकी बातें ऐसे समय में आई हैं जब पाकिस्तान का कुल कर्ज 2024-25 के पहले नौ महीनों में ही बढ़कर PKR (पाकिस्तानी रुपया) 76,000 अरब हो गया है। यह जानकारी हाल ही में जारी इकोनॉमिक सर्वे में दी गई है। इसमें से PKR 51,500 अरब लोकल बैंकों का बकाया है। PKR 24,500 अरब बाहरी कर्ज है। आर्थिक स्थिरता के प्रयासों के बावजूद पाकिस्तान अभी भी कर्ज पुनर्गठन और आईएमएफ के सपोर्ट पर निर्भर है।

पाकिस्तान के फाइनेंस मिनिस्टर मुहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि पब्लिक कर्ज-से-GDP अनुपात थोड़ा घटकर 68% से 65% हो गया है। 2025 तक विदेशी मुद्रा भंडार 16.64 अरब डॉल्र है। यह 2023 के लगभग दिवालिया होने के स्तर से बेहतर है। 2023 में पाकिस्तान के पास सिर्फ दो हफ्ते के इम्पोर्ट कवर के लिए पैसे बचे थे।

 

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

 

उपरोक्त समाचार सामान्य ज्ञान पर आधारित आमजनों मे व्याप्त चर्चाओं के मुताबिक हम प्रस्तुत कर रहे हैं?इसलिए लेखक दोषी नहीं है? असलियत को जानने के लिए उनकी मेडीकल डी एन ए रिपोर्ट की जांच-पड़ताल करवा सकते हैं?

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