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हिन्दुओं की चेतना का स्तर कितना गिर चुका है: डॉ.गौतम खट्टर के विचार

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हिन्दुओं की चेतना का स्तर कितना गिर चुका है: डॉ.गौतम खट्टर के विचार

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

नागपुर। कोराडी के सेवानंद विधालय प्रांगण मे आयोजित हिन्दू धर्म और संस्कृति सम्मेलन का आयोजन हुआ.कार्यक्रम मे राजस्वमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और अन्य गणमान्य मौजूद थे.विश्वहिन्दू परिषद के प्रमुख प्रवक्ता डा गौतम खट्टर ने वर्तमान में हिंदुओं की चेतना के स्तर में गिरावट को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि सनातनी अपनी परंपराओं से दूर होकर आडंबरों (जैसे दरगाह और मखबरों मे चादर चढाने और माथा टेकने में भटक रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति कमजोर हुई है।उन्होंने आगे कहा कि दरअसल मे मुस्लिम समुदाय दरगाहों और मखवरों मे नहीं जाते परंतु वे नियमित अपने मस्जिदों मे नमाज अदा करने जाते और संगठित रहने का आह्वान करते हैं.

गौतम खट्टर ने कहा है कि सनातनी लोग ज्ञान के मार्ग के बजाय पाश्चात्य संस्कृति और बाहरी आडंबरों में विश्वास करने लगे हैं, जो चेतना के स्तर में गिरावट का संकेत है। उन्होंने बताया कि जहाँ-जहाँ हिंदू कम हुए हैं, वहां-वहां सनातन धर्म शास्त्रों और हिन्दू संस्कृति की व्यवस्था टूटी है। उनका मानना है कि हिंदुओं को एकजुट होना चाहिए ताकि उनकी धर्म संस्कृति को बचाया जा सके। खट्टर ने जोर दिया है कि आज के हिंदुओं को श्री कृष्ण और श्री राम को पढ़ने की आवश्यकता है, न कि केवल भौतिक लाभ के लिए भागने की। उन्होंने धर्म परिवर्तन को हिंदुओं के लिए एक बड़ा खतरा बताया है और इस बात पर जोर दिया है कि सनातनी अपनी जड़ों (गुरुकुल और वेद वेदांतो) के अध्ययन पटन पाठन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. और

अक्सर सनातनी संस्कृति को बढ़ावा देने और शिक्षा प्रणाली को सुधारने (गुरुकुल) की बात करते हुए सुना जाता है।

गौतम खट्टर ने कहा बच्चों के लिए विधालय सनातन धर्म संस्कृति का संगम है

डॉ. गौतम खट्टर के अनुसार, विद्यालय केवल किताबी ज्ञान का स्थान नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा और प्राचीन भारतीय संस्कृति व संस्कारों का एक अनूठा संगम है, जहाँ बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। वे पारंपरिक मूल्यों के साथ आधुनिक ज्ञान को शिक्षा में शामिल करने पर जोर देते हैं। श्री खट्टर बताते हैं कि शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्य और संस्कृति का समावेश आवश्यक है।

गुरुकुल की महत्ता: खट्टर ने पुरानी गुरुकुल परंपरा को सांस्कृतिक धरोहर और चरित्र निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने युवाओं में संस्कृति और संस्कारों के प्रति बढ़ती जागृति पर भी जोर दिया है।कि वैदिक साहित्य, सनातनी मूल्यों और शिक्षा पद्धति में सकारात्मक सुधार के प्रबल समर्थक हैं।

उनका मानना है कि सही शिक्षा बच्चों को अपनी संस्कृति और आधुनिक तकनीक दोनों के साथ आगे बढ़ने में मदद करती है।

जहाँ शिक्षा सिर्फ पढ़ाई नहीं, संस्कारों का संगम है!

कार्पक्रम के शुभारंभ मे गौमाता की पूजन और गायत्री मंत्रोच्चार हवन-अनुष्ठान किया गया और अतिथियों का पुष्प गुच्छ और शाल श्रीफल देकर सत्कार किया गया. बडी संख्या मे महिला-पुरुष गण मौजूद थे.

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