जानिए शिव-शंकर-बाबा-बम-बम भोलेनाथ के शिवलिंग में दूध चढाने का वैज्ञानिक महत्व
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट
बम बम भोलेनाथ के शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाने के वैज्ञानिक कारण यह है कि शिव मंदिर में कई तरह के लोगों का आगमन होता है और यहां सकारात्मक के साथ नकारात्मक ऊर्जा भी समान रूप से जमा होती है और शिवलिंग पर लगातार दूध और पानी डालने से मंदिर के गर्भ ग्रह मे नैसर्गिक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा शक्ति का प्रादुर्भाव होता है और यही कारण है कि जब हम मंदिर में प्रवेश करते हैं तब हमें ऊर्जावान प्राणवायु उपलब्ध होती हैं। शिवलिंग में चढाया हुआ दुग्ध मंदिर के बाहर जमीन पर नाली के जरिए नालों और नदियों की जलधारा मे मिश्रित होती जहां विभिन्न प्रकार के जल जीव जन्तुओं को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध होना है।
हमारी प्राचीनतम् 19 अरब,99 करोड,88 लाख,5000 वर्ष पुरानी वैदिक सनातन परंपराओं के पीछे कई सारे आध्यात्म वैज्ञानिक रहस्य छिपे हुए हैं, जिन्हें हम नहीं जान पाते क्योंकि इसकी शिक्षा हमें कहीं नहीं दी गई है। भगवान शिव को सावन के महीने में ढेरो टन दूध यह सोच कर चढ़ाया जाता है कि वे हमसे प्रसन्न होंगे और हमें उन्नती का मार्ग दिखाएंगे। लेकिन श्रावण मास में शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के पीछे बहुत ही बडा वैज्ञानिक महत्व छुपा हुआ है वह आज हम आपको बताएंगे। भगवान शिव एक अकेले ऐसे देव हैं जिनकी शिवलिंग पर दूध चढ़ाया जाता है। शिव भगवान दूसरों के कल्याण के लिए हलाहल विषैला दूध भी पी सकते हैं। शिव जी संहारकर्ता हैं, इसलिए जिन चीज़ों से हमारे प्राणों का नाश होता है, मतलब जो विष है, वो सब कुछ शिव जी को भोग लगता है। भगवान शिव से जानें जीवन जीने का तरीका
सोमवार के दिन पूजा करने वालों पर होती है शिव व गणेश की विशेष कृपा भी होती तथा कष्ट व्याधियां भी दूर होते हैं। क्योंकि पुराने जमाने में जब श्रावण मास में हर जगह शिव रात्रि पर दूध चढ़ता आया है, तब लोग समझ जाया करते थे कि इस महीने में दूध विष के सामान है और वे दूध इसलिये त्याग देते हैं कि कहीं उन्हें बरसाती बीमारियां न घेर ले। क्या है महाशिवरात्रि का महत्व? अगर आयुर्वेद के नजरिये से देखा जाए तो सावन में दूध या दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिये क्योंकि इसमें वात की बीमारियाँ सबसे ज्यादा होती हैं। शरीर में वात-पित्त-कफ इनके असंतुलन से बीमारियाँ पैदा होती हैं। टीवी के पॉपुलर कपल गौतम रोडे पंखुड़ी अवस्थी जुड़वां बच्चे को अस्पताल से छुट्टी, देखा फुल वीडियो श्रावण के महीने में ऋतू परिवर्तन के कारण शरीर मे वात बढ़ता है। तभी हमारे पुराणों में सावन के समय शिव को दूध अर्पित करने की प्रथा बनाई गई थी क्योंकि सावन के महीने में गाय या भैंस घास के साथ कई कीडे़-मकौड़ों का भी सेवन कर लेते हैं। जो दूध को हानिकारक बना देत है इसलिये सावन मास में दूध का सेवन न करते हुए उसे शिव को अर्पित करने का विधान बनाया गया है।
भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर चढाया हुआ दुग्ध मंदिर के पिछले हिस्से से नाली के जरिए नदियों मे जाता है जहां विविध प्रकार के जलचर जीव जन्तुओं को भरपूर पोषक तत्व उपलब्ध होता रहता है। इससे चराचर जगत के स्वामी भगवान शिव बहुत प्रसन्न रहते हैं।
विश्वभारत News Website