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हाथ जोड़कर प्रणाम-नमस्कार करने के हैं कई वैज्ञानिक लाभ : शास्त्रों में छिपा है इसकी शक्ति का रहस्य

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हाथ जोड़कर प्रणाम-नमस्कार करने के हैं कई वैज्ञानिक लाभ, शास्त्रों में छिपा है इसकी शक्ति का रहस्य

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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विज्ञान के अनुसार, हमारे हाथों एवं शरीर की नसें हमारे सिर की नसों से जुड़ी हुई है. जब हम दोनों हाथ जोड़कर साष्टांग या दण्डवत प्रणाम एवं नमस्कार करते हैं, तो हमारे शरीर में एक नवीन चेतना आती है, जिससे हमारी याददाश्त बढ़ती है. किसी व्यक्ति को हाथ जोड़कर नमस्कार करने से सामने वाला व्यक्ति नमस्कार करने वाले को ज्यादा दिनों तक याद रख पाता है

दोनो हाथ जोड़कर प्रणाम करने के हैं कई लाभ, शास्त्रों में छिपा है इसकी शक्ति का ‘राज’

भारतीय संस्कृति में हाथ जोड़कर अभिवादन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. जब भी किसी से मिलते हैं तो भी हाथ जोड़कर नमस्कार करते हैं. क्या आप जानते हैं कि हाथ जोड़कर प्रणाम करने का शास्त्रों में भी विशेष महत्व है? इस बारे में अनोखी बातें जान लीजिए.

अच्छी सेहत व दीर्घ आयु के लिए व्यायाम बेहद जरूरी है. शास्त्रों और वेदों में भी योग क्रियाओं के बारे में वर्णन मिलता हैं. भारतीय संस्कृति में हाथ जोड़कर अभिवादन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. हिंदू धार्मिक स्थलों में भी हाथ जोड़कर ही भगवान से प्रार्थना करते हैं. वहीं, जब भी किसी से मिलते हैं तो भी हाथ जोड़कर नमस्कार करते हैं. ऐसे में सवाल आता है कि आखिर नमस्कार करते समय हाथ जोड़ने के पीछे क्या कारण है. पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि शास्त्रों में हाथ जोड़कर नमस्कार करना भी योग क्रिया का हिस्सा माना गया है. आइये जानते हैं नमस्कार करते वक्त हाथ जोड़ने का रहस्य.

 

शिव से जुड़ा है रहस्य

शास्त्रों में उल्लेख है कि हमारा शरीर पंचतत्वों से बना हुआ है. हमारे शरीर को दो भागों में बांटा गया है, जिसमे दाएं भाग को इडा और बाएं भाग को पिंडली कहा जाता है. माना जाता है की इडा और पिंडली नाड़ियां दोनों ही शिव और शक्ति के रूप हैं. जैसे शिव और शक्ति दोनों मिलकर अर्धनारीश्वर के रूप को पूरा करते हैं, उसी तरह जब हम दाएं हाथ को बाएं हाथ से जोड़कर हृदय के सामने रखते हैं, तो हमारा हृदय चक्र या आज्ञा चक्र सक्रिय हो जाता है. हमारे अंदर की दैवीय शक्ति हमें सकारात्मक ऊर्जा देती है. हमारे सोचने और समझने की शक्ति बढ़ जाती है. हमारा मन शांत हो जाता है. शरीर में रक्त का प्रवाह भी सही होता है. इसलिए हाथ जोड़कर अभिवादन करने से व्यक्ति के मन में सकारात्मक विचार आते हैं, जिससे दूसरे व्यक्ति के प्रति भी सम्मान की भावना आती है.

साष्टांग प्रणाम के संबंध में जो बाहर दिखता है उससे ज्यादा भीतर होता है मनुष्य का अस्तित्व आठ अंगों में है पांच ज्ञान और बुद्धि चित्त वह अह्म ये आठ अंग दिव्य के आगे समर्पित सरेंडर श्रद्धा भाव से कहो भाव से प्रण प्राण देने तक सेवा में हाजीर हो उसे स अष्ट अंग प्रण अम यानी साष्टांग प्रणाम कहते हैं ये नाटक और रियल दोनों होता है रियल है तो दिव्य से तुरन्त शक्ति पात होता है जैसे नास्तिक नरेन्द्र में हुवा दिव्य विवेकानंद बन गये ये खड़े बैठे सोये भी हो सकता दंडवत लेटना मस्ट नहीं ये शरणागति है भज मम एकम है

 

शास्त्रों में दंडवत प्रणाम को “साष्टांग प्रणाम” भी कहा जाता है ! प्राचीनकाल में “दंड” सीधे बाँस को कहा जाता था, और जब इस बाँस को भूमि पर समतल रख दिया जाए, तो वह मुद्रा “दण्डवत” हो जाती है ! जब शरीर को इसी अवस्था में मुंह के बल भूमि पर लिटा दिया जाए, तो इसे दंडवत प्रणाम कहते हैं ! शरीर की इस मुद्रा में शरीर के छ: अंगों का भूमि से सीधा स्पर्श होता है ! अर्थात् शरीर मे स्थित छ: महामर्मो का स्पर्श भूमि से हो जाता है, जिन्हें वास्तुशास्त्र में “षण्महांति” या “छ:महामर्म” स्थान माना जाता है ! ये अंग वास्तुपुरूष के महामर्म इसलिए कहे जाते हैं, क्योंकि ये शरीर (प्लॉट) के अतिसंवेदनशील अंग होते हैं !!

साष्टांग आसन में शरीर के आठ अंग ज़मीन का स्पर्श करते हैं अत: इसे ‘साष्टांग प्रणाम’ कहते हैं। इस आसन में ज़मीन का स्पर्श करने वाले अंग ठोढ़ी, छाती, दोनो हाथ, दोनों घुटने और पैर हैं। आसन के क्रम में इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि पेट ज़मीन का स्पर्श नहीं करे। विशेष नमस्कार मन, वचन और शरीर से हो सकता है।

“पंचांग प्रणाम” किसे कहते हैं?

पंचांग नमस्कार, या पंच-अंग नमस्कारम, एक विधा है जिसमें देवता की पूजा की जाती है।

पूजा के इस रूप की मुख्य रूप से महिलाओं के लिए सलाह दी जाती है। पंच का अर्थ है पाँच और यहाँ अंग का अर्थ शरीर के अंगों से है। पंचांग घुटने, हथेलियाँ, माथा, हाथ जोड़कर और एक मन हैं।

घुटनों के बल खड़े होकर हथेलियों के सहारे माथे को जमीन पर स्पर्श करें। इसके बाद घुटनों पर खड़े होकर हाथ जोड़कर (नमस्कार) और एकाग्र मन से देवता से प्रार्थना की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि नमस्कार का यह रूप महिलाओं के गर्भ को मजबूत करने में मदद करता है।

घुटनों के बल बैठकर पूजा करते समय आंखें कसकर बंद कर ली जाती हैं और हाथ जोड़कर सिर के ऊपर रख दिया जाता है।

महिलाएं केवल पंचांग नमस्कार करती हैं, न कि अष्टांग नमस्कारम। पंचांग नमस्कार तब किया जाता है जब महिला हथेलियों को आपस में जोड़कर घुटने टेकती है या सामने वाले के पैर छूती है। शास्त्रों के अनुसार सष्टांग नमस्कार नहीं किया जाता है क्योंकि महिलाओं का गर्भ और हृदय जमीन को नहीं छूना चाहिए। हृदय महिला के शरीर का एक हिस्सा है जो अपने भीतर भ्रूण के लिए पोषण पैदा करता है और गर्भ में भ्रूण का जीवन होता है। इसलिए इसे जमीन के संपर्क में नहीं आना चाहिए

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