BJP का उद्देश्य बौद्ध धर्म का अस्तित्व समाप्त और जनता को गुलाम बनाना
टेकचंद्र शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट,9822550220
नई दिल्ली। भारतीय संविधान निर्माता भारत रत्न बाबासाहब आंबेडकर परिवार के वंशज समझने वाले आंबेडकरी नेता अड प्रकाश आंबेडकर की माने तो संघ भाजपा का मुख्य उद्देश्य बौद्ध धर्म का अस्तित्व समाप्त करना और देश की आम जागरूक मतदाता जनता-जनार्दन को अपना गुलाम बनाना है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) खुद को एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन के रूप में परिभाषित करता है जिसका लक्ष्य भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाना है। उनकी विचारधारा में, बौद्ध धर्म, सिख धर्म और जैन धर्म को भारतीय उपमहाद्वीप में उत्पन्न होने के कारण हिंदू संस्कृति का ही हिस्सा माना जाता है।
आरएसएस की विचारधारा, हिंदुत्व के अनुसार है और भारत में जन्में सभी धर्मों को हिंदू पहचान के तहत देखती है। इसी वजह से, आरएसएस बौद्धों को एक अलग समुदाय के रूप में वर्गीकृत करने का विरोध करता रहा है। आरएसएस के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से बौद्ध धर्म के प्रति सम्मान दिखाया है। उदाहरण के लिए, आरएसएस ने बुद्ध पूर्णिमा पर अपनी शुभकामनाएं दी हैं और कहा है कि बुद्ध धर्म भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राजनीतिक विवाद और आरोप पर आरोप दागे जा रहे हैं. इसके बावजूद, कुछ राजनीतिक समूहों और व्यक्तियों ने आरएसएस पर दलितों के बौद्ध धर्म अपनाने का विरोध करने का आरोप लगाया है। साल 2017 में, बसपा नेता मायावती ने आरएसएस और भाजपा को चेतावनी दी थी कि अगर दलितों और पिछड़े वर्गों पर अत्याचार बंद नहीं हुए, तो वह बौद्ध धर्म अपना लेंगी।
धर्म सम्मेलनों का नामकरण के संबंध में सितंबर 2025 में, इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया था कि हिमाचल प्रदेश के बौद्ध-बहुल क्षेत्रों में, आरएसएस अपने हिंदू सम्मेलनों का नाम बदलकर धर्म सम्मेलन या बोध सम्मेलन करने पर विचार कर रहा था, ताकि यह वहां के स्थानीय लोगों के लिए अधिक स्वीकार्य हो।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि आरएसएस और बौद्ध समुदाय के बीच संबंध जटिल हैं। जबकि आरएसएस बौद्ध धर्म को अपनी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानता है, कुछ दलित बौद्ध समूह आरएसएस की हिंदुत्व विचारधारा का विरोध करते हैं।
*यूज एण्ड थ्रौ* यानी अपना वोट बैंक हासिल करने के लिए कार्यकरताओं का उपयोग करना और उन्हे छोड देना है.चंद सालों मे
*राजनेताजी मालामाल और जनता हूई कंगाल*
की कहावत चरितार्थ हो रही है. दरअसल मे सत्तारूढ पार्टी
देश को गुलाम बनाने में जुटी है
भाकपा माले प्रत्याशी अरूप चटर्जी के समर्थन में काराकाट के सांसद राजाराम सिंह ने मुगमा मोड़ पर चुनावी सभा को संबोधित किया था. सभा में वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार जब से सत्ता में आयी है, गरीब, मजदूर व किसानों के अधिकार को छीना है. सभी सरकारी संस्थानों को कॉरपॉरेट घरानों के हाथों में देकर फिर से जनता को गुलाम बनाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को जिताने की अपील की. उन्होंने हेमंत सरकार की योजनाओं की प्रशंसा की. कहा कि भाजपा समाज में जहर घोलने का काम करेगा, तो लाल झंडा उसका डट कर विरोध करेगा. अध्यक्षता आगम राम व संचालन जिप सदस्य बादल बाउरी ने किया. सभा को झामुमो नेता रामनाथ सोरेन, उपेंद्र सिंह, कृष्णा सिंह, नागेंद्र कुमार, लखी देवी, सन्नी सिंह, जगदीश शर्मा, मनोरंजन मल्लिक, पीएल मुर्मू, दिनेश हाड़ी, अंजु चटर्जी, शिवानी दास, रामजी यादव, रोश़न मिश्रा, कृष्णा यादव, कमलेश यादव आदि ने संबोधित किया
उक्त संक्षेप उदाहरण बतौर महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत है
ज्ञातव्य है कि महाराष्ट्र के अनुसूचित समाज समुदाय के बुद्धिजीवी लोग जो सत्तासुख और धन कमाने के लालच मे BJP से जुडे हुए नजर आ रहे हैं. दरअसल में उन्हें संघ और BJP के विचारों से कोई लेना देना नहीं है. हालकि वे कट्टर आंबेडकर वादी समुदाय भाजपा हाईकमान को खुश करने के लिए माथे मे सिंदुर कुकुम चन्दन लगाकर मंदिरों बेहिचक जाते है. और अपने समुदाय को समझाते हैं कि हिन्दू वोटबैंक और सत्तासुख के लिए हमे ऐसा करना पड रहा है.दरअसल मे देखा गया है कि संविधान निर्माता बाबासाहब डा आंबेडकर जयंती और महापरिनिर्माण दिवस पर मनुवाद संघ और ब्राह्मणवाद के खिलाफ भाषणबाजी करते देखा और पाया जा सकता है.चुंकि संघ ने कभी भी बौद्ध धर्म का सर्वांगीण विकास पर अनदेखी और अनसुनी करना उन्हे बेहद पसंद है.BJPमे शामिल आंबेडकरी समाज कभी भी अन्याय,अत्याचार और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करना उन्हें जरा भी पसंद नहीं है. फिलहाल वे चुप और शांत रहकर अपना उल्लू सीधा करना पसंद है.
कामठी तहसील की जागरूक मतदाता जनता-जनार्दन का मानना है कि तत्कालीन राज्य मंत्री अधि सुलेखाताई कुंभारे कट्टर आंबेडकर वादी और अपने को बौद्ध धर्म उपासिका बतलाती है. परंतु उन्होंने दलितों पर हुए अन्याय अत्याचार और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने उन्हें बिल्कुल ही पसंद नहीं है.उनका यही उद्देश्य है कि
*”काम अपना बनता और भांड मे गई जनता”*
बताते हैं कि कामठी तहसील बाजारपैठ मे महाराष्ट्र मिलावट खोरी के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठा पा रही है.इसे कहते हैं.
*भांड मे गई गरीब दलित जनता और ठीक-ठीक अपना काम बनता*
नतीजा मिलावटी खाधान्न के उपयोग से झोपडपट्टीवासी दलित गरीब जनता पर स्वास्थ्य संकट मंडरा रहा है.
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