कन्या की भ्रूण हत्या की वजह से घट रही है लडकियों की जनसंख्या
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: संयुक्त संपादक रिपोर्ट
नई दिल्ली। भारतवर्ष में लड़कों की चाह में कन्या भ्रूण हत्या के कारण लिंगानुपात खतरनाक स्तर तक गिर रहा है। यह एक गंभीर सामाजिक अपराध है, जिसके कारण देश में करोड़ों लड़कियां “लापता” हैं। यह न केवल समाज में असंतुलन पैदा कर रहा है, बल्कि कन्या भ्रूण हत्या से वधू (दुल्हन) संकट बढ रहा है. देश मे लडकियों की कमी, यौन हिंसा, और महिलाओं की तस्करी जैसे अपराध भी बढ़ रहे हैं।
प्रमुख बिंदु और प्रभाव के संदर्भ मे ज्ञातव्य है कि
लिंगानुपात में बेतहाशा गिरावट देखी जा रही है. भारत में प्रति 100 पुरुषों के मुकाबले 90 से कम स्त्रियां हैं,यानी 10 लडकियों का टोटा (कमियां) आंकी जा रही हैं. जबकि वैश्विक स्तर पर यह अनुपात बहुुत ही ज्यादा बढ गया है।
“लापता” बेटियां एक रिपोर्ट के अनुसार, लिंग-चयनी गर्भपात के कारण भारत में लगभग 5 करोड़ लड़कियां गायब हैं। वर्तमान परिवेश मे भारतवर्ष मे सर्वाधिक
दुल्हन का संकट पैदा हो रहा है.पंजाब, हरियाणा,हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में लड़कियों की भारी कमी के कारण लड़कों को दुल्हन नहीं मिल रही है. कुंवारे लडके दुल्हन लडकियों के चयन के लिए दर दर भटक रहे हैं.देश भर में वधू (दुल्हन) संकट पैदा हो गया है।
भारतवर्ष में भ्रूण हत्या के कारण वेश्यावृत्ति और महिलाओं की तस्करी जैसी गंभीर समस्याएं भी जन्म ले रही हैं। कन्या भ्रूण हत्या एक गैरकानूनी कार्य है यह मालुमात रहने के बावजूद भी चोरी छिपे होनहार गर्भवती वही बेटियों का गर्भपात कराना शुरु है.(PCPNDT Act के तहत), फिर भी अवैध लिंग परीक्षण के माध्यम से लड़कों को प्राथमिकता दी जा रही है।एसी क्रूरतापूर्ण घटनाएं बडे सघन व्यवसायिक, औधोगपतियों धन्नासेठ और राजनेताओं के घरानों मे शुरु है.इससे गर्भ परीक्षण केंद्र संचालकों और डाक्टरों को अच्छी खासी लाखों-करोडों की कमाई हो रही हैं. मुंहमागी रुपए ले देकर गर्भ परिक्षण के बाद गर्भपात का धंधा चोरी छिपे बेखौफ चल रहा है.
यह सामाजिक विकृति महिलाओं के सम्मान को कम करती है और उन्हें केवल भोग्या समझने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। इस अवैध कुप्रथा को समाप्त करने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई और सामाजिक मानसिकता में बदलाव की तत्काल आवश्यकता है.
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