नागपुर। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमा की सूखी जंगल पहाडियों में ग्रीष्म ऋतु की चिचलाती तेज धूप की तपन से व्याकुल हजारों वन्य प्राणियों के समूह पानी के लिए दर दर भटक रहे।हाल ही के दिनों मे पानी की तलाश मे जंगली तेंदुए के और जंगली सुंअर के झुण्ड कोराडी परिसर के कोलार नदी तथा महानिर्मिती के जलाशय के इर्द-गिर्द देखा गया है। इतना ही नहीं जंगली सुअरों का समूह जलाशय और कोलार कन्हान तथा पेंचनदी के तटवर्ती जंगल झाड़ियों मे आश्रय लिए हुए देखा और पाया जा सकता है।यह जानकारी भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला मंत्री और सहायक जिला प्रसिद्धी प्रमुख टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री ने बताया कि हर साल ग्रीष्म ऋतु मे जंगली जानवरों को चारा नमक और पीने के पानी की तलाश मे अपनी जान गवाने की नौबत खडी हो जाती है।
उन्होने आगे बताया कि भीषण गर्मी के तल्ख तेवर और आग उगलते आसमान के बीच जहां आम जनजीवन तबाह हो गया है। वहीं वन्य प्राणियों की बेचैनी बढ़ गई हैं। जंगल पहाड़ों का भू-जलस्तर काफी नीचे खिसकने से आहर नहर और तालाब सूख गए हैं। पानी के अभाव में पशु-पक्षियों को इधर-उधर भटकना लचारी बन गई है। सुनसान हरीकी झील और पहाडों में रहने वाले जानवर पानी की तलाश में मैदानी इलाकों की तरफ पलायन शुरू कर दिए हैं।हालकि तोतलाडोह जलाशय और नयेगांव खैरी जलाशय का किनारा दल दल कीचड मे तब्दील जंगली जानवर दल दल के कीचड मे फंस रहे है। इसका फायदा अज्ञात शिकारी उठा रहे है। सिवनी जिला के रुख वन मंडल का दुधिया तालाब का जलस्तर भी गर्मी के कारण काफी नीचे उतर गया है वहां पानी की तलाश मे जंगली जानवर दलदल मे फंसकर काल के गाल मे समा रहे हैं।
भीषण गर्मी के तल्ख तेवर और आग उगलते आसमान के बीच जहां आम जनजीवन तबाह हो गया है। वहीं, वन्य प्राणियों की बेचैनी बढ़ गई हैं। भू-जलस्तर नीचे खिसकने से आहर, नहर, और तालाब सूख गए हैं। पानी के अभाव में पशु-पक्षियों को इधर-उधर भटकना लचारी बन गई है। सुनसान बधारो में रहने वाले जानवर पानी की तलाश में मैदानी इलाकों की तरफ पलायन शुरू कर दिए हैं। एक पखवारा से मौसम के तल्ख तेवर और चढ़ते पारा के चलते जंगलों में रहने वाले नीलगाय, हिरण सहित अन्य जंगली जानवर जंगलों से भागकर मैदानी इलाके की ओर आ रहे हैं। क्योंकि, गर्मी के दिनों में जानवरों के पीने के लिए कोई भी प्रबंध प्रशासन अथवा प्रतिनिधियों की तरफ से नहीं की गई हैं। मध्यप्रदेश के जिला छिन्दवाडा और सिवनी अनुमंडल इलाके में नीलगाय एवं हिरण सहित अन्य जंगली जानवर विचरण कर रहे हैं। ये जानवर विचरण करते-करते सड़क पर भी आ रहे हैं। जिससे सड़क दुर्घटना की आशंका भी बढ़ती जा रही है। इसके अलावा खेतों में लगी फसल की रखवाली करने के लिए किसान पहरेदारी कर रहे हैं। इलाके के सभी आहर-नाहर एवं तालाब सूखने से आम जन-जीवन के साथ-साथ वन्य प्राणियों की स्थिति खराब हो गई है। प्यास बूुझाने के लिए ये वन्य प्राणी मृग-मरीचिका की तरह पूरे इलाके में दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। पिछले तीन-चार वर्षो से यह समस्या बनी हुई है। पिछले साल कुछ गंवई इलाके के बधारों में सूख गए कुंए में गिरने से दो-तीन वन्य प्राणियों की मौत हो गई थी।
जल संरक्षण योजना पर उठने लगे सवाल
केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा विभिन्न प्रायोजित कार्यक्रमों के जरिए जल संरक्षण हेतु कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इसी संदर्भ में मनरेगा योजना के तहत आहर, नहर, एवं तालाबों की कटाई सहित जल संरक्षण हेतु कार्य किए जाते हैं। लेकिन, अनुमंडल इलाके में इन आहर एवं तालाबों में पानी ना के बराबर है। नतीजतन, आमलोगों के साथ-साथ पशु-पक्षियों का हाल बेहाल हो गया। यह जानकारी भाजपा के पूर्व जिला मंत्री टेकचंद्र सनोडिया ने विज्ञप्ति मे दी है।
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