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जानिए! 138 साल पुरानी कांग्रेस को क्यों पड़ी ‘क्राउड फंडिंग’ की जरूरत?कांग्रेस पार्टी के पास अनाप-शनाप संपत्ति

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जानिए! 138 साल पुरानी कांग्रेस को क्यों पड़ी ‘क्राउड फंडिंग’ की जरूरत?कांग्रेस पार्टी के पास अनाप-शनाप संपत्ति

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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नई दिल्ली। 138 साल पुरानी कांग्रेस ने क्राउड फंडिंग के लिए ‘डोनेट फॉर देश’ अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत 18 साल से उम्र का कोई भी व्यक्ति कम से कम 138 रुपये डोनेट कर सकता है. ऐसे में जानते हैं कि कांग्रेस के पास कितनी संपत्ति है और उसकी कमाई कितनी है?

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने क्राउड फंंडिंग के लिए अभियान शुरू किया है. साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने फंड जुटाने के लिए ‘क्राउड फंडिंग अभियान’ शुरू किया है. कांग्रेस ने इसे ‘डोनेट फॉर देश’ नाम दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 1 लाख 38 हजार रुपये डोनेट कर इस अभियान की शुरुआत की.

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और कोषाध्यक्ष अजय माकन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि 18 साल से ज्यादा उम्र का कोई भी व्यक्ति 138, 1380, 13800 या 1,38,000 रुपये का डोनेशन दे सकता है. वेणुगोपाल ने बताया कि कांग्रेस 138 साल की यात्रा का जश्न मना रही है. इसलिए लोगों से 138 के गुणांक में चंदा देने की अपील की गई है. उन्होंने बताया कि कांग्रेस का ये अभियान महात्मा गांधी के ऐतिहासिक ‘तिलक स्वराज फंड’ से प्रेरित है, जिसे 1920-21 में लॉन्च किया गया था. लोकसभा चुनाव से पहले चंदा जुटाएगी कांग्रेस, खड़गे ने 1.38 लाख रुपये देकर शुरू किया ‘डोनेट फॉर देश’ कैंपेन कौन हैं वो ‘लखपति दीदी’ चंदा देवी, जिनको पीएम मोदी ने दिया चुनाव लड़ने का ऑफर है, जब राजीव गांधी की सरकार में एक साथ 63 सांसद हुए थे सस्पेंड, जानें- संसदीय इतिहास में निलंबन की बड़ी घटनाएं हूई ,किसी ने विजिटर पास तो किसी ने जुगाड़ा कलर स्मोक… ऐसे तैयार हुआ संसद में घुसपैठ का प्लान था।

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हालांकि, बीजेपी ने इसे लेकर कांग्रेस को घेरा है. बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि जिन्होंने 60 साल तक देश को लूटा, वो अब उसी देश से चंदा मांग रहे हैं. कांग्रेस ने भ्रष्टाचार से जनता का ध्यान हटाने के लिए ये अभियान शुरू किया है.पर ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर देश की सबसे पुरानी पार्टी को क्राउड फंडिंग की जरूरत क्यों पड़ गई?

घटती जा रही है कांग्रेस की संपत्ति

राजनीतिक पार्टियों की कमाई-खर्च और संपत्तियों का लेखा-जोखा रखने वाली संस्था एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म हर साल रिपोर्ट जारी करती है. इसमें राजनीतिक पार्टियों की संपत्ति का ब्योरा भी दिया जाता है. ये रिपोर्ट पार्टियों की इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग के आधार पर थी. इसके मुताबिक, साल 2021-22 में सबसे ज्यादा संपत्ति बीजेपी के पास थी. बीजेपी के पास 2021-22 तक छह हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति थी. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी जब से सत्ता में आई है, तब से उसकी संपत्ति कई गुना तक बढ़ गई. सत्ता में आने से पहले तक 2013-14 में बीजेपी के पास 781 करोड़ रुपये की संपत्ति थी. वहीं, कांग्रेस की संपत्ति में घटती-बढ़ी रही है. 2013-14 में कांग्रेस की संपत्ति 767 करोड़ रुपये थी. 2018-19 में ये संपत्ति बढ़कर 929 करोड़ रुपये हो गई. 2021-22 में कांग्रेस के पास 806 करोड़ रुपये की संपत्ति थी.

कहां से कमाती है पार्टियां?

राजनीतिक पार्टियों की कमाई का सबसे बड़ा सोर्स चुनावी बॉन्ड होता है. ये बैंकों से मिलता है. इसे ऐसे समझिए कि किसी व्यक्ति ने SBI से चुनावी बॉन्ड खरीदा और उसे किसी पार्टी को दे दिया. ये बॉन्ड 1 हजार रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का हो सकता है.बीते पांच साल में चुनावी बॉन्ड से सबसे ज्यादा कमाई बीजेपी को हुई है. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, 2016-17 से 2021-22 के बीच बीजेपी को 10,122 करोड़ रुपये का चंदा मिला है. इसमें से 5,272 करोड़ रुपये का चंदा चुनावी बॉन्ड से आया है. वहीं, इन्हीं पांच साल के दौरान कांग्रेस को महज 1,547 करोड़ रुपये का चंदा मिला है. इसमें से 952 करोड़ रुपये का चंदा सिर्फ चुनावी बॉन्ड से ही मिला है. चुनावी बॉन्ड के अलावा डोनेशन, क्राउड फंडिंग और मेंबरशिप से आने वाली रकम भी राजनीतिक पार्टियों की कमाई का बड़ा सोर्स होता है. इसके अलावा कॉर्पोरेट डोनेशन से भी पार्टियों की कमाई होती है. इसमें बड़े कारोबारी पार्टियों को डोनेशन देते हैं.

महंगे होते जा रहे हैं चुनाव

एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान सात राष्ट्रीय पार्टियों को साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड मिला था. इन पार्टियों ने दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया था. 2019 में बीजेपी को 4,057 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली थी. इसमें से उसने 1,142 करोड़ रुपये खर्च किए थे. जबकि, कांग्रेस को 1,167 करोड़ रुपये का फंड मिला था, जिसमें से उसने 626 करोड़ रुपये खर्च किए थे.

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