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सीट बंटवारे पर संजय राउत के बयान से सियासी बवाल? शिवसेना पर कांग्रेस का गुस्सा फूटा! डैमेज कंट्रोल में जुटे उद्धव

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सीट बंटवारे पर संजय राउत के बयान से सियासी बवाल? शिवसेना पर कांग्रेस का गुस्सा फूटा! डैमेज कंट्रोल में जुटे उद्धव

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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मुंबई। संसद संजय राउत के सीट बंटवारे पर दिए बयान से महाराष्ट्र में सियासी बवाल, शिवसेना पर भड़की कांग्रेस और उद्धव ठाकरे डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए है। होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए मंच सजने लगा है. इसके साथ ही राजनीतिक दलों के बीच सीट को लेकर खींचतान भी शुरू हो गई है.
कांग्रेस के लिए 2024 का चुनाव बड़ा ही मुश्किल होने वाला है. इसकी वजह ये है कि पार्टी कई राज्यों में मजबूत नहीं है और उसे चुनाव जीतने के लिए क्षेत्रीय दलों की जरूरत है. हालांकि, क्षेत्रीय दल ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं. इसका सबसे ताजा उदाहरण महाराष्ट्र में देखने को मिला है, जहां शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र की 48 में से 23 सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है.

कांग्रेस संजय राउत के इस बयान से खासा नाराज भी हो गई. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने यहां तक कह दिया कि राउत को उन पार्टियों को लेकर कोई भी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जिनके साथ शिवसेना (यूबीटी) ने गठबंधन किया हुआ है. वहीं, संजय राउत के बयान के बाद शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे डैमेज कंट्रोल में जुट गए और उन्होंने राउत के बयान से किनारा कर लिया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर किस तरह इस विवाद की शुरुआत हुई है.

संजय राउत ने क्या कहा कि भड़की कांग्रेस?

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शुक्रवार (29 दिसंबर) को कहा, ‘ये महाराष्ट्र है और यहां शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी है. कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है. उद्धव ठाकरे राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कांग्रेस के निर्णय लेने वाले नेताओं के साथ चर्चा कर रहे हैं. हमने हमेशा कहा है कि लोकसभा चुनाव में शिवसेना हमेशा 23 सीटों पर चुनाव लड़ती रही है.’
उन्होंने कहा, ‘इंडिया गठबंधन के साथ बैठक के दौरान हमने फैसला किया कि जिन सीटों पर हमने जीत हासिल की है, उन पर चर्चा होगी. कांग्रेस ने महाराष्ट्र में एक भी सीट नहीं जीती है, इसलिए उन्हें जीरो सीट से शुरू करना होगा. मगर कांग्रेस हमारे लिए एमवीए में एक अहम सहयोगी है.’ महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन है, जिसमें कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं.

नाराज कांग्रेस ने क्या जवाब दिया?

कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने संजय राउत पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें उन पार्टियों को लेकर बयानबाजी नहीं करनी चाहिए, जो उद्धव सेना के साथ गठबंधन में हैं. संजय निरुपम ने कहा, ‘रोजाना होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस और सामना में लिखे जाने वाले आर्टिकल के चलते शिवसेना (यूबीटी) ने बीजेपी के साथ नाता तोड़ा, क्या आप कांग्रेस के साथ भी ऐसा ही करना चाहते हैं? राउत को प्रेस कॉन्फ्रेंस और सामना में गठबंधन दलों के खिलाफ लिखना बंद करना चाहिए.’

मुंबई में मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी के बिना शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा में एक भी सीट नहीं जीत सकती है.’ निरुपम ने यहां तक कह दिया कि संजय राउत ने कभी चुनाव नहीं लड़ा है, तो उन्हें कोई तजुर्बा नहीं है. सीट बंटवारे को लेकर उन्होंने कहा, ‘सीट बंटवारा अभी पूरा नहीं हुआ है. इसकी चर्चा टीवी पर नहीं होनी चाहिए. तीनों दलों के नेताओं को एक साथ बैठकर चर्चा करने और मेरिट के आधार पर फैसला लेने की जरूरत है.’

उद्धव ने किया डैमेज कंट्रोल

संजय राउत के बयान के बाद शिवसेना (यूबीटी) बड़ी मुसीबत में फंस गई. बीजेपी से नाता तोड़ने के बाद राज्य में एमवीए ही उसकी सहयोगी है. ऐसे में उनके खिलाफ बयानबाजी से नुकसान हो सकता है. यही वजह है कि उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘मै ऐसा कुछ नहीं करने वाला हूं, जिससे एमवीए को नुकसान पहुंचे. इसलिए मैं कुछ भी कहने वाले लोगों पर ध्यान नहीं दूंगा. जब तक कांग्रेस सीट बंटवारे पर नहीं बोलेगी, तब तक न तो मैं और न ही मेरी तरफ से कोई कुछ कहेगा.’

सीट बंटवारे को लेकर उद्धव ने कहा, ‘शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के बीच चर्चा अच्छी रही है.’ उन्होंने ये भी कहा कि एमवीए प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के साथ एक संयुक्त बैठक की कोशिश कर रही है. शिवसेना (यूबीटी) और वीबीए पहले से ही गठबंधन में हैं. मगर वीबीए महाविकास अघाड़ी का हिस्सा नहीं है और इसे गठबंधन में शामिल करने पर कोई फैसला नहीं हुआ है.

क्या था 2019 का चुनावी हाल?

महाराष्ट्र की 48 सीटों में से 18 सीटों पर शिवसेना को जीत मिली थी. शिवसेना (यूबीटी) बीजेपी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही थी, जिसके तहत उसने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. बीजेपी ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसके बाद उसके खाते में 23 सीटें गई थीं. कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीतने में सफल हो पाई थी. एनसीपी (अविभाजित) चार सीट जीती

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