Breaking News

नागपूर : रामटेक सडक हादसे में महिला की मौत? पुलिस का मनमाना रवैया से जनता परेशान!

Advertisements

रामटेक सडक हादसे में महिला की मौत? पुलिस का मनमाना रवैया से जनता परेशान!

Advertisements

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

Advertisements

रामटेक | तहसील के खुमारी गांव में सड़क हादसे में बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था उजागर हुई है। वहीं, पुलिस विभाग का शर्मनाक रवैया सामने आया है।

खुमारी निवासी प्रेमाबाई सहदेव पाली शाम करीब 6 बजे गांव के चौक से पैदल जा रही थी। इसी दौरान एक बाइक (क्रमांक MH 49 CB 5965 ) ने महिला को टक्कर मार दी। बाइक पर तीन लोग सवार थे। महिला को घायल अवस्था में बोर्डा टोल नाके के एंबुलेंस से रामटेक उप जिला रुग्णालय लाया गया। रुग्णालय ने प्रारंभिक चिकित्सा के बाद महिला को नागपुर के सरकारी अस्पताल (जीएमसी) रेफर कर दिया। साथ ही रामटेक पुलिस को हादसे की सूचना दी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सूचना मिलने के बाद रामटेक पुलिस का कर्मचारी अस्पताल पहुंचा। उसने स्थिति को संभालने के बजाय पीड़ित महिला के परिवार के साथ ही बुरा व्यवहार शुरू कर दिया। पुलिसकर्मी ने महिला के परिवार के एक सदस्य को ही दो-चार थप्पड़ लगा दिए।

दूसरी ओर सरकारी एंबुलेंस न मिलने के कारण महिला को जीएमसी नहीं पहुंचाया जा सका। महिला ने उपजिला रुग्णालय के बाहर ही दम तोड़ दिया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन उदासीन बना रहा। परिवार महिला का शव घर लेकर आया। मंगलवार को महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया। महिला का परिवार बेहद गरीब है। उनके घर पर ठीक से छत भी नहीं है। परिवार निजी एंबुलेंस का खर्च नहीं उठा सकता था। दूसरी ओर उपजिला अस्पताल समय रहते एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कर सका। खबर लिखे जाने तक मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। जबकि हादसे को 24 घंटे से अधिक हो चुके थे।

दरअसल, यह पहला मामला नहीं है, जिसमें रामटेक पुलिस स्टेशन का निर्दयी व्यवहार दिखा है। रामटेक पुलिस बार-बार भूल रही है कि आम लोग न्याय के लिए सबसे पहले पुलिस का दरवाजा खटखटाते हैं। वे उम्मीद करते हैं कि थानों में उनकी बात ठीक से सुनी जाएगी। समय पर उचित कार्रवाई कर न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। लेकिन लगता है कि रामटेक थाने को इन बातों से कोई लेना-देना नहीं रह गया है। यहां पीड़ितों की शिकायतें कई महीनों तक धूल खाती रहती है। आखिर में पीड़ित थक-हारकर इंसाफ की उम्मीद छोड़ देता है। आर्थिक धोखाधड़ी से लेकर कई मामलों में यही हो रहा है। अगर कोई व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाए तो उससे कहा जाता है कि क्या हमसे पूछकर पैसे दिए थे? किसी व्यक्ति का पड़ोसी से विवाद हो जाए और वह इसे सुलझाने के लिए थाने जाए, तो उससे थाने में कहा जाता है- मैं उसका मुंह बंद करूं क्या? कई लोगों ने पुलिस के ऐसे व्यवहार का सामना किया है। पीड़ित दो-चार बार यह बात सुन सकता है। लेकिन बार-बार यही कहकर पुलिस अपने कर्तव्य से पल्ला झाड़ती रही तो पीड़ित इंसाफ के लिए कहां जाएगा? क्या पुलिस को अपनी शपथ याद है?

Advertisements

About विश्व भारत

Check Also

मेडिकल की आड़ में अवैध हथियारों का कारोबार:डॉक्टर सिंह गिरफ्तार

मेडिकल की आड़ में अवैध हथियारों का कारोबार:डॉक्टर सिंह गिरफ्तार टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: 9822550220 पटना। …

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का मामले में 7 कर्मचारी गिरफ्तार

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का मामले में 7 कर्मचारी गिरफ्तार टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: 9822550220   नासिक। …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *