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कोराडी प्लांट की डेल्टा इंडस्ट्रियल फर्म पर कठोर कार्रवाई की मांग 

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कोराडी प्लांट की फर्म डेल्टा इंडस्ट्रियल फर्म पर कठोर कार्रवाई की मांग

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822560220

 

नागपुर जिला के कोराडी थर्मल पावर प्लांट मे ई-निविदा धारक मेसर्स: डेल्टा इंडस्ट्रियल फर्म में कार्यरत अन्याय ग्रस्त श्रमिक रितेश नरेश ढोके के साथ कंपनी नियोक्ता घोर अन्याय और आर्थिक शोषण कर रहा है.इसकी लिखित शिकायत महानिर्मिती कोराडी थर्मल पावर स्टेशन के चीफ इंजीनियर और महाजनको मुख्यालय के मैनेजिंग डायरेक्टर से की गई है.शिकायत मे श्रमिक रितेश ढोके ने स्पष्ट रूप से बताया है कि वेतन बढोतरी परिमंडल 1 के अनुसार 20% पगार तथा संशोधित बोनस नहीं दिया गया है. शोषित श्रमिक रितेश ढोके ने आगे बताया है कि शिकायत करने के बावजूद भी उसे श्रमिक न्यायालय मे मामला दायर करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.दरअसल मे मामला प्रकरण क्रमांक 446/22 प्रलंबित रखा गया है.

श्रमिक रितेश ढोके ने शिकायत मे बताया है कि गत 8 दिसंबर 2025 को ई-निविदा की समयावधि समाप्त हो चुकी है.और 3 जनवरी 2026 को उसी काम का नया कार्यादेश डेल्टा इंडस्ट्रियल को मिल चुका है.श्रमिक ढोके का गेटपास नवीनीकरण तो कर दिया गया परंतु ना उसे अपना गेटपास भी नहीं दिया और ना ही काम पर लिया जा रहा है.जबकि 10 जनवरी 2026 को कंपनी मालिक ने कामगार कल्याण अधिकारी कार्यालय में बुलाया और न्यायालय मे विचाराधीन प्रकरण को पीछे लेने के लिए श्रमिक रितेश को दबाव डाला है. जबकि किसी को भी केश पीछे लेने के लिए दबाव डालना या परेशान करना कानूनन अपराध माना गया है.डेल्टा डस्ट्रियल ने कहा है कि जब तक केश पीछे नहीं लेता तब तक उसे काम पर नहीं लेने के लिए धमकाया गया है. जबकि 14 जनवरी और 16 जनवरी 2026 को डेल्टा इंडस्ट्रियल मालिक का लेटर श्रमिक रितेश ढोके को दिया जा चुका है. अनावेदक डेटा इंडस्ट्रियल मालिक का कहना है कि जब तक केश पीछे नहीं लेगा वह श्रमिक को गेटपास भी नहीं देगा? एसी धमकियां श्रमिक ढोने को दिया जा रहा है.

विधि न्याय विशेषज्ञ की माने तो डेटा इंडस्ट्रियल कंपनी द्वारा श्रमिक को कानूनी मामला (Case/FIR) वापस लेने के लिए डराना-धमकाना एक गंभीर अपराध है। भारत में कानून श्रमिकों को ऐसे शोषण के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। धमकी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और चरण मे सबूत इकट्ठा करना चाहिए.अगर कंपनी मालिक ने मौखिक धमकी है, तो गवाहों के नाम नोट करें।इन सबूतों का इस्तेमाल पुलिस रिपोर्ट और श्रम विभाग में किया जा सकता है। इसकी स्थानीय

पुलिस स्टेशन मे शिकायत दर्ज करने को कहा गया है.

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत डराने-धमकाने के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत करें।अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती है, तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करना चाहिए।

श्रम आयुक्त के पास शिकायत

आप क्षेत्रीय श्रम आयुक्त या श्रम विभाग को शिकायत दर्ज कर सकते हैं।यह शिकायत वेतन न मिलने, गलत तरीके से निकालने या शोषण के खिलाफ की जा सकती है।

कानूनी नोटिस किसी वकील के माध्यम से कंपनी को कानूनी नोटिस भेजने को कहा है, जिसमें धमकी देने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करें। (NGO) से संपर्क

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:

IPC/BNS के तहत कार्रवाई: अगर कंपनी नौकरी से निकालने या झूठे केस में फंसाने की धमकी देती है, तो इसे आपराधिक धमकी माना जा सकता है (Section 506 IPC/BNS) के तहत कार्रवाई हो सकती है. अगर धमकी देकर इस्तीफा लिया गया है,

माना जाता है, जिसे श्रम अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

डरें नहीं: भारतीय कानून के अनुसार, कोई भी नियोक्ता आपको अपनी मर्जी के खिलाफ काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

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