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ईश्वरीय मर्यादाओं के खिलाफ आचरण वाले वर्णसंकरित- वामपंथी

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ईश्वरीय मर्यादाओं के खिलाफ आचरण वाले वर्णसंकरित- वामपंथी

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

भारतीय वैदिक सनातन धर्म की उत्पत्ति निसर्ग परमात्मा यानी ईश्वरीय की महान कृपा से स्थापित हूई है.और ईश्वरीय नियमों की मर्यादाओं और सिद्धांतों के खिलाफ आचरण करने वाले वर्णसंकरित यानी नाजायज पिता के सहवास से उत्पन्न हुई संतान को कहते हैं. चुंकि सनातन धर्म की उत्पत्ति निसर्ग परमात्मा यानी ईश्वर के द्धारा स्थापित हूई है. इस संदर्भ में ‘वामपंथी’ विचारधारा और ‘वर्णसंकर’ की अवधारणाओं को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण प्रचलित हैं। इन विषयों पर अक्सर सांस्कृतिक और वैचारिक बहस होती रहती है. वर्णसंकरित स्त्री और पुरुष वैश्या गामी और बहुत तेज दिमाग के होते हैं.प्रबुद्ध बुद्धीजीवियों का मानना हैं कि अंग्रेज शासक वर्णसंकरित थे. जिन्होंने 200 साल तक भारतवर्ष सहित पूरी दुनियाभर मे राज्य शासन किया था.

वामपंथी और सनातन धर्म के संबंध में बतादें कि दक्षिणपंथी समर्थकों का मानना है कि वामपंथी विचारधारा सनातन धर्म के सिद्धांतों, वर्णव्यवस्था, संस्कृति और परंपराओं का विरोध करती है. अनेकानेक प्रबुद्ध बुद्धिजीवी विद्धानों का मानना है कि वामपंथी विचारधारा पूरी तरह से नास्तिक होती है और भारत के पारंपरिक सामाजिक ढांचे, जैसे वर्ण व्यवस्था, को तोड़कर समतावाद लाना चाहती है, जिसे वे सनातन धर्म के नियमों के विरुद्ध मानते हैं। वर्णसंकरित यानी हाईब्रिड (मिलावटी संतानें) यानी नाजायज पिता की संतान को वर्णसंकरित कहते हैं. उदाहरणार्थ जैसे नपुंसक पिता की संतानों को वर्णसंकरित संतान कहा जाता है. वह सादी शुदा स्त्री जो दूसरे व्यक्ति से यौन संबंध स्थापित करने से उत्पन्न हुई संतान को वर्णसंकरित संतान कहते हैं. दरअसल में नपुंसक पुरुष की समझदार पत्नियां गुफ्तगू कहती हैं कि आखिर अपना वंश चलाने के लिए पराये पुरुष से संतान पैदा करना अपराध नहीं अपितु संतान के नाम के पीछे उसके विवाहित पति का ही नाम चलता है.अनुवांशिक (DNA) रिपोर्ट के मुताबिक असलियत का पता लगाया जा सकता है.परंतु कानून के मुताबिक DNA का मेडीकल कराना वर्जित माना गया है.यह साहस सिर्फ न्यायालय के आदेश पर ही DNA की जांच की जा सकती है?शास्त्रों के अनुसार वर्णसंकरित पुरुष बहुत ही कूटनीतिज्ञ पाये जाते हैं.हालकि वर्णसंकरित महिला-पुरुष की जीवनीय झूठ छल कपट बेईमानी विश्वासघात और भ्रष्टाचार जैसे अनैतिक कार्यप्रणालियों से भरी हूई रहती है.यानी वर्णसंकरित व्यक्ति की जीवनी आचरण चरित्र और कार्यप्रणालियां ईश्वरीय (नैसर्गिक) मर्यादाओं के खिलाफ होते हैं.

ईश्वरीय नैसर्गिक नियमों के मुताबिक वर्णसंकरित संतानों के आचरण सनातन धर्म की मर्यादाओं के खिलाफ आचरण पाया जाता है.हालकि कोई भी माता पिता यह नहीं चाहते कि मेरी संतान झूठा छली कपटी बेईमान और धोखेबाज ना हो.परंतु पिता की नाजायज संतान यानी वर्णसंकरित संतान के आचरण ईश्वरीय मर्यादाओं के विरुद्ध पाये जाते है.इसका भेद सिर्फ मां को मालुम रहता है.आखिर अपना वंश चलाने के लिए संतान का होना जरुरी होता है.भले ही संतान दूसरे व्यक्ति से पैदा की हो परंतु संतान के नाम के पीछे उसके विवाहित पती का ही नाम चलता हैं.जैसे वर्णसंकरित संतान के आचरणों में मेहनती चपल ईर्श्यालू जलनखोर पना, चुगलखोर चापलूसखोर, धोखेबाज,झूठ को सच मे तब्दील करने वाला, छल, कपट, विश्वासघात,धोखाधडी, बेईमान और भ्रष्टाचारी किस्म आचरण के होते है.

वर्णसंकर के संबंध में भगवद्गीता और मनुस्मृति (मानव धर्म शास्त्र)में वर्णसंकर का उल्लेख मिलता है. अक्सर भगवद्गीता के संदर्भ में किया जाता है, जहाँ अर्जुन ने युद्ध के परिणामस्वरूप होने वाली सामाजिक अव्यवस्था और वर्णसंकर संतान(अलग-अलग वर्णों के मेल से उत्पन्न) के बारे में चिंता व्यक्त की थी। श्रीमद्भागवतगीता के अनुसार, वर्णसंकर जनसंख्या को अयोग्य माना जाता है जो पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था को नष्ट करती है।

विभिन्न दृष्टिकोण के संदर्भ के अनुसार, वर्णव्यवस्था जन्म-आधारित थी, जिसे आधुनिक समय में नकारा जा रहा है, जबकि दूसरा दृष्टिकोण इसे सामाजिक कार्य विभाजन के रूप में देखता है जो वर्णाश्रम धर्म के अनुसार है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि वामपंथी विचारधारा सनातन धर्म के प्रति खिलाफ आचरण”फोबिया” रखती है।

इस प्रकार, यह एक जटिल विषय है जहाँ एक वर्ग इसे धर्म का ह्रास मानता है, जबकि दूसरा वर्ग इसे सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया के रूप में देखता है.

वर्णसंकर संतान का अर्थ आमतौर पर दो अलग-अलग जातियों, प्रजातियों या नस्लों के मिलन से उत्पन्न संतान से है। यह शब्द मुख्य रूप से दो अलग-अलग सांस्कृतिक या नस्लीय पृष्ठभूमि (जैसे- एशियाई-यूरोपीय) के माता-पिता से जन्मे बच्चों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे बच्चों (Mixed Race आम तौर पर विभिन्न संस्कृतियों के सम्मिश्रण को दर्शाती हैं, जिसमें माता-पिता दोनों की शारीरिक विशेषताएं झलक सकती हैं।

वर्णसंकर संतान से संबंधित तस्वीरें और जानकारी:

मिश्रित नस्ल (Mixed श्रेणी में अलग-अलग नस्लीय पृष्ठभूमि के माता-पिता के बच्चों की तस्वीरें आती हैं, जो काफी विविधतापूर्ण होती हैं।

सांस्कृतिक विविधता: ऐसी संतानें अक्सर दो संस्कृतियों के संगम के रूप में देखी जाती हैं, जो आधुनिक समाज का हिस्सा हैं।

शास्त्रों में उल्लेख के मुताबिक और पारंपरिक हिंदू संदर्भों में वर्णसंकर का उल्लेख अलग-अलग वर्णों के मिश्रण से पैदा हुई संतान के रूप में भी किया गया है, जिसका विवरण महाभारत काल तक मिलता है। दरअसल मे महात्मा सिद्धार्थ गौतम बुद्ध ने पंच्चशील की रचना की है. जिसमें पंच्चशील नियमों और अष्टांग नियमों मे पर स्त्री गमन और पर पुरुष गमन को वर्जित माना गया है.साहित्यकार विशेषज्ञों का मानना है कि भगवान बुद्ध द्धारा निर्मित अष्टांग नियम और पंच्चशील मे कुछ बातें मनुस्मृति से लिया गया है.जिसका वामपंथी समाज इसका पूर्णत: विरोध करते हैं.हालकि सत्य में देखा जाए तो कोई भी स्त्री अपने पति को दूसरी अन्य महिलाओं के साथ अनैतिक यौन संबंध बिल्कुल ही पसंद नहीं करती.उसी प्रकार कोई भी पुरुष अपनी पत्नि को दूसरे पुरुष से अनैतिक संबंध करना पसंद नही करना चाहता है.इस संबंध मे अनेक वादविवाद और झगडा फसाद न्यायालयों मे न्याय प्रविष्ट हैं.और पर पुरुष और पर स्त्री गमन के मामलों को लेकर अनेक छोडछुट्टी (डायवर्स) तलाक लेने-देने की घटनाएं घट चुकी और घट रहीं हैं.परंतु पाश्चात्य अंग्रेज वामपंथी भारतीय लोग वर्णसंकरित का विरोध करने के वजाय उस अपनाने को मजबूर हैं.इसलिये पूरी दुनियाभर मे छुपछुपकर पति य पत्नि के पीठ पीछे अनैतिक यौन संबंध स्थापित किए जा रहे हैं.इससे वर्णसंकरित समाज का प्रादुर्भाव होना तय है.विद्धानजन बतलाते हैं कि इस कलिकाल मे वर्णसंकरित पुरुष और स्त्री राज करेंगे.

 

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

उपरोक्त समाचार सामान्य ज्ञान पर अधारित सनातन धर्म के अनुसार विविध ग्रन्थों, महात्माओं और महिला बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञ के सम्भाषणो से संकलित किया गया है.यह भी सत्य है कि विवाहिता पिता के अलावा अन्य दो व्यक्तियों के आनुवंशिक मिश्रण (Genetics) पर निर्भर करता है.

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