RSS ने अपने गुरु स्थान पर भगवाध्वज को स्थापित किया है।
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
नागपुर । भगवाध्वज त्याग, समर्पण का प्रतीक है। स्वयं जलते हुए सारे विश्व को प्रकाश देने वाले सूर्य के रंग का प्रतीक है। संपूर्ण जीवों के शाश्वत सुख के लिए समर्पण करने वाले साधु, संत भगवा वस्त्र ही धारण करते अर्थात भगवा वस्त्र पहनते हैं, इसलिएभगवा, केसरिया त्याग का प्रतीक माना जाता है। अपने राष्ट्रीय आध्यात्मिक जीवन के,भगवा ध्वज मानव जीवन के इतिहास का साक्षी रहा है। यह शाश्वत है, अनंत अगम्य है, चिरंतन है।
*व्यक्ति पूजा नहीं, तत्व पूजा*
संघ तत्व पूजा करता है, व्यक्ति पूजा नहीं। व्यक्ति शाश्वत नहीं, समाज शाश्वत है। अपने समाज में अनेक विभूतियां हुई हैं, आज भी अनेक विद्यमान हैं। उन सारी महान विभूतियों के चरणों में शत्-शत् प्रणाम,
परन्तु अपने राष्ट्रीय समाज को, संपूर्ण समाज को, संपूर्ण वैदिक सनातन हिन्दू धर्म समाज को राष्ट्रीयता के आधार पर, मातृभूमि के आधार पर संगठित करने का कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है। इस नाते किसी व्यक्ति को गुरुस्थान पर न रखते हुए भगवाध्वज को ही हमने गुरु माना गया है।
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