ग्रहमंत्रालय पाने के लिए आतुर हैं एकनाथ शिंदे सेना? कैसे थम पाएगी नाराजगी
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
मुंबई ।भाजपा के लिए आंतरिक राजनीति को साधने से ज्यादा कठिन एकनाथ शिंदे की शिवसेना को साथ लेकर चलना है। इसकी वजह यह है कि सीएम पद भाजपा को मिलने पर एकनाथ शिंदे गुट ने सहमति जता दी है, लेकिन मंत्रालयों के बंटवारे पर अब भी सहमति नहीं बन पा रही है।दरअसल में एकनाथ शिंदे सेना को ग्रह और राजस्व मंत्रालय चाहिए तो चाहिए
भाजपा ने महाराष्ट्र में 5 दिसंबर को सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय कर दी है। जल्दी ही महाराष्ट्र में भाजपा विधायक दल की मीटिंग होगी, जिसमें मुख्यमंत्री का ऐलान किया जाएगा। अब तक देवेंद्र फडणवीस ही प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन भाजपा की चौंकाने वाली नीति को देखते हुए कुछ भी संभव माना जा रहा है। भाजपा के लिए आंतरिक राजनीति को साधने से ज्यादा कठिन एकनाथ शिंदे की शिवसेना को साथ लेकर चलना है। इसकी वजह यह है कि सीएम पद भाजपा को मिलने पर एकनाथ शिंदे गुट ने सहमति जता दी है, लेकिन मंत्रालयों के बंटवारे पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है।
खासतौर पर गृह मंत्रालय की दावेदारी भी स्वीकार न किए जाने से एकनाथ शिंदे नाराज बताए जा रहे हैं। यही वजह थी कि वह अहम मीटिंगों को छोड़कर अपने सतारा स्थित गांव निकल गए थे। होम मिनिस्ट्री के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना की दलील भी भाजपा वाली ही है। उनका कहना है कि जब भाजपा ने एकनाथ शिंदे के सीएम बनने के बाद होम मिनिस्ट्री ली थी तो फिर अब उनका सीएम है तो हमें यह मंत्रालय क्यों नहीं दिया जा रहा। शिवसेना के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहा कि इस बार भी मंत्रालयों का बंटवारा उसी तर्ज पर होना चाहिए। यह एक नैचुरल पैटर्न है। यदि हम सीएम पद का त्याग कर रहे हैं तो फिर होम मिनिस्ट्री तो मिलनी ही चाहिए।
वहीं भाजपा यह संदेश नहीं देना चाहती कि वह एकनाथ शिंदे को इग्नोर कर रही है क्योंकि वह मराठा नेता हैं और शिवसेना की हिंदुत्व वाली छवि है। लेकिन वह उनके आगे झुकना भी नहीं चाहती। इसलिए अपनी तरफ से ही सीएम की शपथ समेत कई जानकारियां साझा की हैं। शिवसेना नेता संजय शिरसाट के बयान पर भी भाजपा ने सधा हुआ जवाब ही दिया है। प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि मीडिया में बयान देकर कुछ नहीं हो सकता। कोई भी फैसला तीनों दलों के नेताओं के बैठने पर ही होगा।
भाजपा के एक नेता ने भी साफ कहा कि विभागों के बंटवारे में 2022 का फॉर्मूला नहीं चलेगा। भाजपा के लीडर ने कहा, ‘हमारे एकसाथ शिंदे की शिवसेना से दोगुने से भी ज्यादा विधायक थे। इसके बाद भी 2022 में हमने उनको सीएम का पद सौंपा और पूरे ढाई साल तक जिम्मेदारी दी। हमने डिप्टी सीएम और होम मिनिस्ट्री से ही समझौता किया।’ इन्हीं सब बातों को लेकर समझौता आखिरी रूप नहीं ले पा रहा है और दबाव बनाने के लिए एकनाथ शिंदे गांव चल गए हैं। माना
शिंदे की है गृहमंत्री बनने की पुरानी इच्छा,रंग दिखा रही है। जब उद्धव ठाकरे CM बने थे तब भी शिंदे ने ग्रहमंत्रालय के लिए जोर लगाया था।
राजनीति को साधने से ज्यादा कठिन एकनाथ शिंदे की शिवसेना को साथ लेकर चलना है। इसकी वजह यह है कि सीएम पद भाजपा को मिलने पर एकनाथ शिंदे गुट ने सहमति जता दी है, लेकिन मंत्रालयों के बंटवारे पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है।
भाजपा ने महाराष्ट्र में 5 दिसंबर को सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय कर दी है। जल्दी ही महाराष्ट्र में भाजपा विधायक दल की मीटिंग होगी, जिसमें मुख्यमंत्री का ऐलान किया जाएगा। अब तक देवेंद्र फडणवीस ही प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन भाजपा की चौंकाने वाली नीति को देखते हुए कुछ भी संभव माना जा रहा है। भाजपा के लिए आंतरिक राजनीति को साधने से ज्यादा कठिन एकनाथ शिंदे की शिवसेना को साथ लेकर चलना है। इसकी वजह यह है कि सीएम पद भाजपा को मिलने पर एकनाथ शिंदे गुट ने सहमति जता दी है, लेकिन मंत्रालयों के बंटवारे पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है।
खासतौर पर गृह मंत्रालय की दावेदारी भी स्वीकार न किए जाने से एकनाथ शिंदे नाराज बताए जा रहे हैं। यही वजह थी कि वह अहम मीटिंगों को छोड़कर अपने सतारा स्थित गांव निकल गए थे। होम मिनिस्ट्री के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना की दलील भी भाजपा वाली ही है। उनका कहना है कि जब भाजपा ने एकनाथ शिंदे के सीएम बनने के बाद होम मिनिस्ट्री ली थी तो फिर अब उनका सीएम है तो हमें यह मंत्रालय क्यों नहीं दिया जा रहा। शिवसेना के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहा कि इस बार भी मंत्रालयों का बंटवारा उसी तर्ज पर होना चाहिए। यह एक नैचुरल पैटर्न है। यदि हम सीएम पद का त्याग कर रहे हैं तो फिर होम मिनिस्ट्री तो मिलनी ही चाहिए।
वहीं भाजपा यह संदेश नहीं देना चाहती कि वह एकनाथ शिंदे को इग्नोर कर रही है क्योंकि वह मराठा नेता हैं और शिवसेना की हिंदुत्व वाली छवि है। लेकिन वह उनके आगे झुकना भी नहीं चाहती। इसलिए अपनी तरफ से ही सीएम की शपथ समेत कई जानकारियां साझा की हैं। शिवसेना नेता संजय शिरसाट के बयान पर भी भाजपा ने सधा हुआ जवाब ही दिया है। प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि मीडिया में बयान देकर कुछ नहीं हो सकता। कोई भी फैसला तीनों दलों के नेताओं के बैठने पर ही होगा।
भाजपा के एक नेता ने भी साफ कहा कि विभागों के बंटवारे में 2022 का फॉर्मूला नहीं चलेगा। भाजपा के लीडर ने कहा, ‘हमारे एकसाथ शिंदे की शिवसेना से दोगुने से भी ज्यादा विधायक थे। इसके बाद भी 2022 में हमने उनको सीएम का पद सौंपा और पूरे ढाई साल तक जिम्मेदारी दी। हमने डिप्टी सीएम और होम मिनिस्ट्री से ही समझौता किया।’ इन्हीं सब बातों को लेकर समझौता आखिरी रूप नहीं ले पा रहा है और दबाव बनाने के लिए एकनाथ शिंदे गांव चल गए हैं। माना जा रहा है कि उनकी यह दबाव की रणनीति है, लेकिन भाजपा फिलहाल एक हद से ज्यादा झुकने को तैयार नहीं है।