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दो कौंडी की होती जा रही है भाजपा नेताओं की अहमियत

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दो कौंडी की होती जा रही है भाजपा नेताओं की अहमियत

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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कटनी। भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों की अहमियत अब दो कौड़ी की होती जा रही है.? आलम ये है कि भाजपाइयों का गुरुर जो सातवें आसमान पर हुआ करता था सीधे अर्स से फर्स पर आकर धड़ाम हो गया। सबसे मजेदार बात यह है कि जो खाकी कभी इनके रसूख के आगे घुटने टेक दिया करती थी अब बीच सड़क में हुज्जत करने से भी पीछे नहीं है।

इसी तरह का एक मामला 4 अप्रैल को कोतवाली थाने तिराहे में घटा। जिसके बाद ये मामला गलियारों में चर्चा का विषय बन लोग चटकारे ले – ले के बता रहे थे। बची कुची कसर खुद भाजपा के किसान मोर्चा के पदाधिकारी ने खोल कर रख दी है।

आपको बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के जिला मंत्री इन्द्र मिश्रा ने अपने लेटर हैड में यातायात थाना प्रभारी को एक शिक़ायत पत्र सौंप कर बताया कि 4 अप्रैल को जब कोतवाली थाना तिराहे में एसडीएम कटनी और यातायात पुलिस के द्वारा जब दो पहिया और ई रिक्शा वाहन की चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था

तभी वहा से भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के जिला मंत्री इंद्र मिश्रा गुजर रहे थे। तभी नई गाड़ी लिए मिश्रा जी का एक कार्यकर्ता खड़ा था। उसके बुलाने पर नेता जी वहां चले गये। और गाड़ी का एक कागज मोबाइल पर ऑनलाइन होना बताया। लेकिन यातायात पुलिस की एसआई मैडम सोनम उइके ऑनलाइन कागज वाली बात सुनने और मानने को तैयार नहीं थीं। जिसके बाद मैडम पर आरोपों की बरसात की बारिश शुरू हो गई।

जिला मंत्री मिश्रा जी ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अपने कार्यकर्ता के सपोट में मैडम उइके से बात की तो मैडम उइके ने नेता जी के साथ अभद्र भाषा का उपयोग करते हुए कहा कि कहीं के सेलिब्रिटी हो तुम, मैं महिला हूं दो मिनिट में औकात बता दूंगी। कहते हुए आगे निकल गईं।

इतना ही नहीं मामला यहीं पर थम जाता तो बात और थी। जिला मंत्री इन्द्र मिश्रा ने एक ओर शिगूफा छोड़ते हुए शिकायत पत्र में उल्लेख किया कि जब हमारे मोर्चा के जिलाध्यक्ष वहाँ से निकल रहे थे तो हमने उन्हें इस घटना से अवगत कराया। जिसके बाद जिलाध्यक्ष भी मैडम उइके से बात करने पहुँचे तो मैडम ने उन्हें भी फटकार लगाते हुए कहा कि मैं महिला हूँ मेरे उच्चाधिकारी खड़े हैं। मैं प्रभारी होती तो दो मिनट में ठीक कर देती।

इतना सुनते ही अपमान का घूंट पी जिलाध्यक्ष वहा से उल्टे पांव वापस हो गए। और मैडम उइके की करतूत की कहानी उच्चाधिकारी को बता कर चले गए। क्या यातायात पुलिस विभाग में पदस्थ मैडम उइके इतनी सिरफिरी है.? कि वह अपने आगे किसी की नहीं सुनती। यहां तक कि सत्ता नवीसों की बातों का भी कोई असर नहीं होता।

इसका सीधा सा मतलब जो समझ में आता है वह यह है कि मैडम बेहद ही ईमानदार है या फिर एक दम घमंडी। जिस तरह का आरोप लगा है उसका निष्कर्ष यही निकल कर बाहर आता है। खैर इस पूरे मामले की शिक़ायत शिकायत कर्ता ने कटनी पुलिस अधीक्षक को भी की थी। लेकिन कोई कार्रवाई जब नहीं कि गई तो मजबूर होकर भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा को सड़क में हंगामा करते हुए आंदोलन करना पड़ा।बताते हैं कि इन दिनों शाम ढलते ही भाजपा के फिट्याल किस्म के छुटभैये नेता शराब के नशे मे डूबे रहते हैं और झूठमूठ की डींगें हांकते रहते हैं? नतीजतन कांग्रेसी लोग इसका मजाक उड़ा रहे हैं.

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