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सरन्यायाधीश संजीव खन्ना ने कपिल सिब्बल को बीच में बोलने से रोका

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सरन्यायाधीश संजीव खन्ना ने कपिल सिब्बल को बीच में बोलने से रोका

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना जब फैसला सुना रहे थे तो कपिल सिब्बल बीच बीच में बोल पड़े कि वक्फ बाय यूजर भी लिखिए.

सु्प्रीम कोर्ट ने कहा- वक्फ बोर्ड में कोई नई नियुक्ति न हो

वक्फ संशोधन कानून को लेकर दाखिल याचिकाओं पर गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को सुप्रीम कोर्ट की बेंच सुनवाई के लिए बैठी. कोर्ट ने कानून पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन एक हफ्ते के लिए पहले जैसी स्थिति बने रहने का निर्देश दिया है. फैसला सुनाते वक्त याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल बीच में बोल पड़े तो मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने उन्हें टोक दिया और कहा कि आप बीच में मत बोलिए.

सीजेआई संजीव खन्ना ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘वक्फ घोषित संपत्ति और रजिस्टर्ड संपत्ति को पहले की तरह बने रहने दिया जाए.’ इस दौरान कपिल सिब्बल बोल पड़े कि वक्फ बाय यूजर भी लिखिए. सीजेआई ने उन्हें टोकते हुए कहा, ‘मैं आदेश लिखवा रहा हूं. बीच में मत बोलिए.’ उन्होंने कहा, ‘सॉलिसिटर मेहता ने कहा कि सरकार 7 दिन में जवाब दाखिल करना चाहती है. उन्होंने यह भी कहा कि तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नियुक्ति नहीं होगी.’

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि वह संसद से पारित एक्ट पर रोक लगाने जा रहा है. एक्ट के कुछ सेक्शन को देख कर रोक लगा देना सही नहीं होगा. उन्होंने कहा कि लाखों लोगों से बात कर करके कानून बनाया गया है इसलिए सरकार लोगों के प्रति जवाबदेह हैं. एसजी मेहता ने कोर्ट से जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा है, जिस पर सीजेआई ने अनुमति दे दी. उन्होंने कहा कि अभी वह कानूनी नहीं कर रहे हैं. 1 सप्ताह में कुछ नहीं बदल जाएगा.

 

सीजेआई ने केंद्र से कहा कि वह उसको सुनेंगे, लेकिन वह यह नहीं चाहते कि स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव हो जाए इसलिए फिलहाल पहले जैसी स्थिति बनी रहे ठीक है. कोर्ट ने वक्फ बोर्ड या काउंसिल में नई नियुक्ति पर भी रोक लगा दी है. सीजेआई संजीव खन्ना ने एसजी तुषार मेहता से ये भी पूछा कि क्या 1995 के एक्ट के तहत रजिस्टर्ड संपत्ति पर कार्रवाई नहीं होगी? एसजी ने इस पर कहा कि यह बात कानून का हिस्सा है.

 

कोर्ट ने यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता पक्ष की तरफ से सिर्फ 5 याचिकाएं ही हों. सबको सुनना संभव नहीं है इसलिए इस पर एक दिन में फैसला लेकर बताएं. सीजेआई ने कहा कि बाकी याचिकाओं को निस्तारित माना जाएगा. याचिकाओं की आगे की लिस्टिंग में किसी का नाम नहीं लिखा जाएगा. साथ ही जिरह करने वाले वकीलों की भी लिस्ट दें.

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