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एग्जिट पोल में BJP के उखड़े पैर : काँग्रेस को दिवाली गिफ्ट

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एग्जिट पोल में BJP के उखड़े पैर : काँग्रेस को दिवाली गिफ्ट

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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जम्‍मू-कश्‍मीर में कांग्रेस- नेशनल कॉन्‍फ्रेंस गठबंधन को सत्‍ता के करीब पहुंचने का अनुमान है. कुछ सर्वे में गठबंधन के मजबूत होकर सामने आने की बात कही गई है. हालांकि, जम्‍मू संभाग में बीजेपी सबसे मजबूत पार्टी होगी. जम्‍मू-कश्‍मीर में तकरीबन 10 साल के बाद विधानसभा चुनाव कराया गया. अनुच्‍छेद 370 हटने और विशेष राज्‍य का दर्जा खत्‍म होने के बाद यह पहला असेंबली इलेक्‍शन है. बीजेपी के साथ ही कांग्रेस, नेशनल कॉन्‍फ्रेंस, पीडीपी समेत अन्‍य छोटे-छोटे दलों ने लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्‍सा लिया था. हरियाणा में विधानसभा चुनाव संपन्‍न होने के बाद अब एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ चुके हैं. पोल ऑफ पोल्‍स के नतीजों के अनुसार, केंद्र प्रशास‍ित प्रदेश में बीजेपी को 27 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. इसके अलावा कांग्रेस-नेशनल कॉन्‍फ्रेंस गठबंधन को 41 सीटें मिल सकती हैं. सबसे ज्‍यादा नुकसान महबूबा मुफ्ती की पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक पार्टी को होने के आसार जताए गए हैं. पिछले चुनाव में पीडीपी को दोहरे अंकों में सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार पार्टी को महज सात सीटें मिलने के आसार हैं. पीडीपी से ज्‍यादा ताकतवर निर्दलीय हो सकते हैं. उनके खाते में 15 सीटें जाने की संभावना है.

जम्‍मू-कश्‍मीर में तीन चरणों में विधानसभा का चुनाव कराया गया. पहले चरण के लिए 18 सितंबर को वोट डाले गए थे. दूसरे चरण के लिए 25 सितंबर और तीसरे चरण के लिए 1 अक्‍टूबर 2024 को वोटिंग हुई थी. जम्‍मू-कश्‍मीर में मुख्‍य तौर पर चार पार्टियों के बीच मुकाबला है. बीजेपी, कांग्रेस, नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और पीडीपी के बीच चुनावी जोर आजमाइश है. कांग्रेस और नेशन कॉन्‍फ्रेंस साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. घाटी वाले इलाके में जहां नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और पीडीपी का प्रभाव ज्‍यादा माना जाता है, वहीं जम्‍मू संभाग में बीजेपी की मजबूत पकड़ है. ऐसे में इस बार का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्‍प है.

जम्‍मू-कश्‍मीर विधानसभा चुनाव के दौरान न कोई आतंकी हिंसा हुई, न ही किसी बूथ पर दोबारा से चुनाव कराने की जरूरत पड़ी. जम्मू-कश्मीर में साल 1987 के बाद पहली बार शांति, सुरक्षा और विश्वासपूर्ण वातावरण में हुए विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी एक-दो माह में नहीं बल्कि चार साल पहले शुरू की जा चुकी थी. जम्मू-कश्मीर में हालात सामन्य बनाने और बिना डर और हिंसा के चुनाव संपन्न करवाने में सबसे बड़ी बाधा सरकारी तंत्र में छिपे बैठे वे अधिकारी और कर्मी थे, जो राष्ट्रविरोधी गतिविधयों में संलिप्त होने के साथ आतंकियों और अलगाववादियों के समर्थक थे.

‘दैनिक भास्कर’ के सर्वेक्षण में संभावना जताई गई है कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन को 35 से 40 और भाजपा को 20-25 सीट मिल सकती हैं. इसमें पीडीपी को चार से सात और अन्य को 12-16 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है. ‘पीपुल्स पल्स’ ने अपने सर्वेक्षण में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन को 46-50 सीट मिलने का अनुमान जताया है. उसके सर्वेक्षण के मुताबिक, भाजपा को 23-27 सीट मिल सकती हैं.

मैट्रिज के एग्जिट पोल में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा को 28-30 सीट मिल सकती हैं और नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन के खाते में 31-36 सीट जा सकती हैं. इस सर्वेक्षण में पीडीपी को पांच से सात तथा अन्य को आठ से 16 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है.

कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन को 35-45 सीट मिल सकती है और भाजपा के खाते में 24-34 सीट जा सकती हैं. पीडीपी को 4 से 6, सांसद इंजीनियर रशीद की अवामी इत्तेहाद पार्टी को 3 से 8 सीट मिलने की संभावना आंकड़े क्‍या कहते हैं?

सी वोटर के एग्जिट पोल में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस का गठबंधन जम्मू-कश्मीर में बहुमत के करीब पहुंच सकता है. इस गठबंधन को 40-48 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है. भाजपा के खाते में 27-32 सीट जाने की संभावना जताई गई है. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को 6 से 8 सीट मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया

कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पिछले 10 साल के शासन को बदलने के लिए मतदान किया है. एग्जिट पोल चाहे जो भी दिखाएं हमारा मानना ​​है कि वोट बदलाव के लिए था. ये दोनों क्षेत्रों (कश्मीर और जम्मू) में भाजपा को बाहर रखने के लिए था. उन्होंने आगे बताया कि नतीजे घोषित होने पर कांग्रेस-नेशनल कॉन्‍फ्रेंस गठबंधन को 55 से अधिक सीटें मिलेंगी.

कांग्रेस के महासचिव गुलाम अहमद मीर ने शनिवार को दावा किया कि केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन को 55 से अधिक सीटें मिलेंगी, क्योंकि विभिन्न एग्जिट पोल में कांग्रेस-NC गठबंधन को अधिक सीटें मिलते हुए दिखाया गया है. जम्मू-कश्मीर के 90 निर्वाचन क्षेत्रों में तीन चरणों में मतदान हुआ और 8 अक्टूबर को परिणाम जारी किए जाएंगे. कई एग्जिट पोल में अनुमान जताया गया है कि एनसी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी.

महबूबा मुफ्ती की पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक पार्टी को एग्जिट पोल में महज सात सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. जम्‍मू-कश्‍मीर में हुए पिछले विधानभा चुनाव में पीडीपी को 28 सीटें मिली थीं. इस बार वह दोहरे अंक में भी नहीं पहुंच पा रही है. पीडीपी से ज्‍यादा ताकतवर निर्दलीय हो सकते हैं. 15 सीटें अन्‍य के खाते में जाने की संभावना जताई गई

जम्‍मू-कश्‍मीर में तीन चरणों में चुनाव कराया गया था. बीजेपी से लेकर कांग्रेस, नेशनल कॉन्‍फ्रेंस, पीडीपी जैसी पार्टियों ने अपने पक्ष में बड़े-बड़े दावे किए थे. एग्जिट पोल के नतीजों में बीजेपी की चुनावी सेहत में सुधार हुई है, लेकिन महबूबा मुफ्ती की पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक पार्टी की हालत सबसे खराब

एग्जिट पोल के आंकड़े सैंपल सर्वे पर आधारित होते हैं. एग्जिट पोल कराने वाली एजेंसियां अपने मानकों के अनुसार सैंपल के तौर पर लोगों की राय और वोटिंग के बारे में जानकारी जुटाते हैं. इसके बाद इसी आधार पर एग्जिट पोल के आंकड़े जारी किए जाते हैं. ऐसे में चुनाव के अंतिम परिणाम से एग्जिट पोल के आंकड़े अलग भी होते

एग्जिट पोल को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुझे आश्चर्य है कि चैनल एग्जिट पोल की परवाह क्यों कर रहे हैं. खासकर हाल ही में हुए आम चुनावों की विफलता के बाद मैं चैनलों, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप आदि पर होने वाले सभी शोर को अनदेखा कर रहा हूं, क्योंकि केवल वही संख्याएं महत्वपूर्ण हैं जो 8 अक्टूबर को सामने आएंगी. जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्‍छेद हटने और विशेष राज्‍य का दर्जा खत्‍म होने के बाद पहली बार चुनाव कराया गया. एक दशक के बाद हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को झटका लगता हुआ दिख सकता है. एग्जिट पोल के नतीजों को देखें तो बीजेपी बहुमत के करीब भी नहीं है, वहीं कांग्रेस और नेशनल कॉन्‍फ्रेंस गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में दिख रही है.

घाटी क्षेत्र में आने वाली 47 सीटों पर निर्दलीय प्रत्‍याशियों ने बड़े-बड़े दिग्‍गजों को झटका दिया है. एग्जिट पोल के नतीजों में निर्दलीय उम्‍मीदवारों की संख्‍या दहाई तक जाने का अनुमान जताया गया है. खासकर महबूबा मुफ्ती की पीडीपी को तगड़ा झटका लगा

जम्मू संभाग में जहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है तो दूसरी तरफ घाटी के इलाकों में कांग्रेस और नेशनल कॉन्‍फ्रेंस गठबंधन मजबूत होकर सामने आ सकती है. सी-वोटर के एग्जिट पोल में कांग्रेस-नेशनल कॉन्‍फ्रेंस की जम्‍मू-कश्‍मीर में सरकार बनने की संभावना जताई गई है.

आजतक-सीवोटर के एग्जिट पोल में जम्‍मू संभाग में एक बार फिर से बीजेपी के मजबूत बनकर उभरने की बात सामने आई है. जम्‍मू संभाग में विधानसभा की कुल सीटें 43 सीटें हैं. एग्जिट पोल में बीजेपी के खाते में 27 से 31 सीटें जाने की संभावना जताई गई है. कांग्रेस-नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के हिस्‍से में 11 से 15 सीटें जाने की संभावना

न्‍यूज18 इंडिया के महापोल में जम्‍मू-कश्‍मीर में किसी को स्‍पष्‍ट बहुमत मिलने की संभावना नहीं है. बीजेपी को 28 से 30 सीटें मिलने का अनुमान है. दूसरी तरफ, नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन को 33 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. पीडीपी को 6 तो अन्‍य के खाते में 22 सीटें जाने की संभावना है.

एग्जिट पोल के नतीजे आने से ठीक पहले नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के सीनियर नेता उमर अब्‍दुल्‍ला का बड़ा बयान सामने आया है. उन्‍होंने कहा कि असली नंबर 8 अक्‍टूबर को सामने आएगा. उन्‍होंने कहा कि बाकी सब टाइम पास है

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस-माकपा गठबंधन, बीजेपी और पीडीपी के बीच मुकाबला है. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 56 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं तो कांग्रेस ने गठबंधन के तहत 38 सीटों पर चुनाव लड़ा. माकपा ने एक प्रत्याशी को मैदान में उतारा है. बीजेपी ने 62 सीटों पर ही प्रत्याशी उतारा है. महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी की ओर 81 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं.

जम्‍मू-कश्‍मीर में तीन चरणों में विधानसभा चुनाव कराया गया था. कुल मिलाकर केंद्र प्रशासित प्रदेश में 63.88 फीसद वोटिंग हुई थी. अब एग्जिट पोल के नतीजों की घड़ी समीप आ गई है. कुछ ही देर में इसके नतीजे सामने आ जाएंगे. जम्‍मू-कश्‍मीर में विधानसभा की 90 सीटों के लिए चुनाव कराया गया जम्‍मू-कश्‍मीर में तकरीबन 10 साल के बाद विधानसभा चुनाव कराया गया. अनुच्‍छेद 370 हटने और विशेष राज्‍य का दर्जा खत्‍म होने के बाद यह पहला असेंबली इलेक्‍शन है. बीजेपी के साथ ही कांग्रेस, नेशनल कॉन्‍फ्रेंस, पीडीपी समेत अन्‍य छोटे-छोटे दलों ने लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्‍सा लिया था. हरियाणा में विधानसभा चुनाव संपन्‍न होने के बाद अब एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ चुके हैं. पोल ऑफ पोल्‍स के नतीजों के अनुसार, केंद्र प्रशास‍ित प्रदेश में बीजेपी को 27 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. इसके अलावा कांग्रेस-नेशनल कॉन्‍फ्रेंस गठबंधन को 41 सीटें मिल सकती हैं. सबसे ज्‍यादा नुकसान महबूबा मुफ्ती की पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक पार्टी को होने के आसार जताए गए हैं. पिछले चुनाव में पीडीपी को दोहरे अंकों में सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार पार्टी को महज सात सीटें मिलने के आसार हैं. पीडीपी से ज्‍यादा ताकतवर निर्दलीय हो सकते हैं. उनके खाते में 15 सीटें जाने की संभावना है.

जम्‍मू-कश्‍मीर में तीन चरणों में विधानसभा का चुनाव कराया गया. पहले चरण के लिए 18 सितंबर को वोट डाले गए थे. दूसरे चरण के लिए 25 सितंबर और तीसरे चरण के लिए 1 अक्‍टूबर 2024 को वोटिंग हुई थी. जम्‍मू-कश्‍मीर में मुख्‍य तौर पर चार पार्टियों के बीच मुकाबला है. बीजेपी, कांग्रेस, नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और पीडीपी के बीच चुनावी जोर आजमाइश है. कांग्रेस और नेशन कॉन्‍फ्रेंस साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. घाटी वाले इलाके में जहां नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और पीडीपी का प्रभाव ज्‍यादा माना जाता है, वहीं जम्‍मू संभाग में बीजेपी की मजबूत पकड़ है. ऐसे में इस बार का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्‍प है.

जम्‍मू-कश्‍मीर विधानसभा चुनाव के दौरान न कोई आतंकी हिंसा हुई, न ही किसी बूथ पर दोबारा से चुनाव कराने की जरूरत पड़ी. जम्मू-कश्मीर में साल 1987 के बाद पहली बार शांति, सुरक्षा और विश्वासपूर्ण वातावरण में हुए विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी एक-दो माह में नहीं बल्कि चार साल पहले शुरू की जा चुकी थी. जम्मू-कश्मीर में हालात सामन्य बनाने और बिना डर और हिंसा के चुनाव संपन्न करवाने में सबसे बड़ी बाधा सरकारी तंत्र में छिपे बैठे वे अधिकारी और कर्मी थे, जो राष्ट्रविरोधी गतिविधयों में संलिप्त होने के साथ आतंकियों और अलगाववादियों के समर्थक थे

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