नास्तिक सूतक ग्रह व्याधिदोष से सांसारिक जीवन विकास बाधित
नई दिल्ली। भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और मनोवैज्ञानिकों की राय के अनुसार, सूतक ग्रह व्याधि दोषों से पीड़ित स्त्री या पुरुष के साथ अशुभ समय अशुद्ध स्थानों में आलिंगन, चुंबन, चूसन और अवैध शारीरिक ससंबंध से नास्तिक सूतक व्याधिदोष लगता है। ग्रह व्याधि दोष शब्द ज्योतिष और सनातन हिंदू धर्म की धार्मिक मान्यताओं से संबंधित हैं। “नास्तिक” का अर्थ है वह व्यक्ति जो ईश्वर या धार्मिक सिद्धांतों को नहीं मानता और विश्वास नहीं रखता है और बुरी संगति से प्रभावित है, “सूतक पातक” का तात्पर्य जीवित सुक्राणुओं की मृत्यु के बाद की अशुद्धि की अवधि से है। “ग्रह” का अर्थ है ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति और “व्याधि” का अर्थ है असाध्य गुप्त रोग या लाइलाज बीमारी। ये शब्द अक्सर धार्मिक और ज्योतिषीय संदर्भों में उपयोग किए जाते हैं और विभिन्न प्रकार के दोषों और प्रभावों से जुड़े होते हैं।
नास्तिक: वह व्यक्ति जो ईश्वर या धार्मिक सिद्धांतों में विश्वास नहीं करता। असामयिक मृत्यु के बाद की अशुद्धि की अवधि को ज्योतिष में ग्रह स्थिति कहा जाता है। रोग: रोग एक लाइलाज बीमारी है जो संक्रमण के कारण होती है। इन शब्दों का प्रयोग अक्सर धार्मिक और ज्योतिषीय संदर्भों में किया जाता है और ये विभिन्न प्रकार के सूतक पातक ग्रह व्याधि दोषों के प्रभावों से जुड़े होते हैं।
उदाहरण: कुछ लोग नास्तिक हैं और धार्मिक विश्वासों में विश्वास नहीं करते हैं। और यौन भावनाओं के प्रभाव में आकर वे किसी के साथ भी अवैध और अनैतिक शारीरिक संबंध बना लेते हैं। परिणामस्वरूप, शुक्राणु बर्बाद हो जाते हैं। अनैतिक यौन संबंधों के कारण वीर्य मलिन होकर नष्ट हो जाता है, जिससे बांझपन, पाप और ग्रह रोग उत्पन्न होते हैं।
इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना होता है।
ग्रह: ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती है। कुछ अतिरिक्त जानकारी: पितृ दोष: कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पितृ दोष पूर्वजों के कर्मों से उत्पन्न दोष है।
विवाह में देरी: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पितृ दोष या अन्य दोषों के कारण विवाह में देरी हो सकती है।
सूतक और ग्रहण: ग्रहण के दौरान सूतक लगता है और इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है।
सूतक और पातक : सूतक और पातक दोनों ही अशुद्धि की अवधि से संबंधित हैं, लेकिन सूतक का संबंध जन्म या मृत्यु से है, जबकि पातक का संबंध पाप या रोग से है।
वस्तुतः अशुभ समय और अशुद्ध स्थानों पर अनैतिक और अवैध यौन संबंध भयंकर नास्तिकता, पाप और ग्रह व्याधिदोष का कारण बनता हैं। क्योंकि कुछ संदिग्ध रोगों से ग्रस्त स्त्री-पुरुषों के साथ अवैध शारीरिक संबंधों के कारण जननांगों में जीवित शुक्राणु कुचल कर मर जाते हैं! इससे नास्तिक सूतक पातक ग्रह व्याधिदोष प्रतीत होता है। क्योंकि, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन वाले पुरुषों के पसीने और लार में 2% तपेदिक, 2% कैंसर, 2% एड्स, 3% वात-पित्त मलेरिया, 3% मधुमेह और 5% नपुंसकता के लक्षण होते हैं। यह नास्तिक सूतक पातक ग्रह व्याधि दोष आलिंगन, चुंबन और चूसने से उत्पन्न होता है।
इसके कारण नास्तिक, पापी और ग्रह व्याधिदोष से ग्रस्त युवतियां कभी मां नहीं बन पातीं। यदि संयोगवश वह मां बन जाती है, तो बच्चा जीवित नहीं रह सकता, अर्थात प्राकृतिक आपदा या अधिभौतिक बीमारी के कारण उसका जीवन पूरा होने से पहले ही उसकी मृत्यु हो सकती है।
इसलिए, व्यक्ति को हमेशा अवैध और अनैतिक अंतरंग संबंधों से बचना चाहिए और चिकित्सा विज्ञान विशेषज्ञों और मनोचिकित्सा विज्ञान विशेषज्ञ की सलाह से उपचार या शुद्धीकरण कर लेना चाहिए .
विश्वभारत News Website