अपनी वाही वाही और सस्ति लोकप्रियता के लिए लालायित रहते हैं नेतागण
टेकचंद्र शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट,9822550220
दुनियाभर के विवि न्याय विशेषज्ञ ऋषि चाणक्य का मानना है कि जिस तरह आम इंसान को तारीफ बहुत पसंद आती है, उसी तरह कई राजनेताओं को भी अपनी प्रशंसा और सस्ती लोकप्रियता में अधिक रुचि रहती है। इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण होते हैं. लगातार प्रशंसा मिलने से राजनेताओं के मन में यह भाव आ सकता है कि वे आम लोगों से अधिक महत्वपूर्ण हैं। यह उनकी आत्म-केंद्रितता को दर्शाता है. कुछ राजनेताओं मे आत्ममुग्धता (नार्सिसिज़्म) का एक पैटर्न होता है, जिसमें वे आत्म-केंद्रित और अहंकारी सोच रखते हैं। ऐसे लोग लगातार तारीफ और प्रशंसा की तलाश में रहते हैं. ऐसे राजनेता दूसरे लोगों के लिए सहानुभूति महसूस नहीं करते और यह मान लेते हैं कि अच्छे अच्छे लोग उनके इर्द-गिर्द घूमती है। इसलिए, जब उन्हें लगता है कि ऐसा नहीं है, तो वे असहज हो जाते हैं। सस्ती लोकप्रियता के तरीके अपनाकर, जैसे कि मुफ्त की योजनाएँ या आकर्षक वादे करके, राजनेता कम समय में जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश करते हैं। राजनीति में चुनाव जीतने के लिए वोटों की जरूरत होती है। जो राजनेता अपने काम से अधिक खुद का गुणगान करते हैं, उनका लक्ष्य अक्सर जनता के बीच अपनी अच्छी छवि बनाना होता है, जिससे उन्हें चुनाव में फायदा मिल सके। कुछ नेता ठोस और टिकाऊ नीतियों के बजाय सतही और आसानी से लागू की जाने वाली नीतियाँ अपनाते हैं,परंतु जब असलियत का पर्दाफाश हो जाता है तो ऐसे स्वार्थी और मौकापरस्त राजनेताओं को छिपने के लिए जगह नहीं मिलती हैं.नेताओं को जिनसे तुरंत वाहवाही मिल सके। कर्नाटक के एक मंत्री ने अपनी ही पार्टी की ‘सस्ती लोकप्रियता’ वाली योजनाओं की आलोचना कर दी थी, हालांकि बाद में उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया था, कुछ राजनेता अपने सार्वजनिक प्रदर्शन और मीडिया कवरेज का इस्तेमाल अपनी छवि को गढ़ने के लिए करते हैं, ताकि जनता के बीच उनकी प्रामाणिकता मजबूत हो सके।
यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सभी राजनेता ऐसे नहीं होते। कुछ नेता ईमानदारी और ठोस काम के दम पर जनता का विश्वास जीतते हैं। लेकिन यह भी सच है कि चुनावी राजनीति के दबाव में और मानवीय स्वभाव के कारण, आत्म-प्रशंसा और सस्ती लोकप्रियता की प्रवृत्ति अक्सर देखने को मिलती है।बे राजनेता नंबर एक के बेवकूप होते हैं जो मीडिया वालों को मुंह मांगे रिश्वतस्वरुप पैकेज देकर अपनी व्यथा वाही वाही प्रसारित कराते हैं.यह आचरण प्राकृतिक कानून और सिद्धांत के खिलाफ है.
विश्वभारत News Website